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अभियंता दिवस पर भोपाल में पांच इंजीनियर सम्मानित, CM बोले- नया मार्ग विकास और आर्थिक गतिविधियों के रास्ते खोलता है

भोपाल में अभियंता दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पांच श्रेणियों में इंजीनियरों को सम्मानित किया गया। CM मोहन यादव ने सड़क निर्माण और नई तकनीक पर जोर दिया।
अभियंता दिवस पर भोपाल में पांच इंजीनियर सम्मानित, CM बोले- नया मार्ग विकास और आर्थिक गतिविधियों के रास्ते खोलता है
अभियंता दिवस पर भोपाल में पांच इंजीनियर सम्मानित

भोपाल। अभियंता दिवस के अवसर पर भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लोक निर्माण विभाग की ओर से इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले इंजीनियरों को पांच अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसी नए मार्ग का निर्माण सिर्फ आवागमन की सुविधा तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह विकास का रोडमैप तैयार करने के साथ भविष्य की आर्थिक गतिविधियों के लिए नए रास्ते भी खोलता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सीमेंट के इस्तेमाल के बिना सड़क निर्माण की पहल को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने लोक निर्माण विभाग द्वारा अपने स्तर पर बजट जुटाकर सड़क निर्माण कराने के निर्णय की भी सराहना की।

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इंजीनियर में इंजन जैसी क्षमता होती है

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र को नई दिशा देने का काम किया। उन्होंने कहा कि इंजीनियर के भीतर इंजन जैसी क्षमता होती है, जो किसी योजना और विकास कार्य को जमीन पर आकार देने का काम करती है। मुख्यमंत्री ने पुराने समय में कैलाश पर्वत की चट्टानों को काटकर किए गए निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर की कला, तकनीक और निर्माण कौशल अपने आप में असाधारण था। उन्होंने नए और पुराने संसद भवन के निर्माण में मुरैना और विदिशा के पत्थरों तथा वहां की कला के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। डॉ. मोहन यादव ने लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विभाग ने इंजीनियरों के काम को पहचान देने के लिए पांच अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार देकर उनका सम्मान किया है।

चुनौती देखकर रुकना नहीं, समाधान तलाशना जरूरी

लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि इंजीनियर का काम किसी चुनौती के सामने रुक जाना नहीं बल्कि उसका समाधान खोजकर आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि एक बेहतर इंजीनियर के लिए खोजी स्वभाव, अनुशासन और काम में परफेक्शन जरूरी है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक विचारों को दबाने के बजाय उन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और अच्छे विचारों को वास्तविक रूप देने की दिशा में काम होना चाहिए। राकेश सिंह ने इंजीनियरों की ट्रेनिंग को लेकर बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का काम नौ महीने में करीब 85 प्रतिशत पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के इंजीनियरों के लिए बदलती तकनीक और नई चुनौतियों का सामना करना मुश्किल होगा।

सीमेंट के बिना कांक्रीट सड़क निर्माण की तकनीक पर काम

PWD मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि विभाग सीमेंट विहीन कांक्रीट के इस्तेमाल को लेकर CSIR-AMPPRI के साथ समझौता ज्ञापन यानी MOU करने जा रहा है। इसके तहत कुछ सड़कों को संस्थान के साथ मिलकर नई तकनीक के परीक्षण के लिए लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस तकनीक में बिना तराई के भी बेहतर सड़क निर्माण की तकनीक का परीक्षण किया जाएगा। मंत्री के मुताबिक मध्यप्रदेश के इस नवाचार को ओडिशा ने भी अपनाया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों वहां इससे जुड़े काम का शिलान्यास किया है।

MPRDC के काम का दायरा 2 लाख करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य

राकेश सिंह ने बताया कि फिलहाल मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी MPRDC करीब 30 हजार करोड़ रुपये के काम करा रहा है। आने वाले समय में विभाग का लक्ष्य इस राशि को बढ़ाकर करीब 2 लाख करोड़ रुपये के काम तक ले जाना है। उन्होंने इंजीनियरिंग के काम की प्राथमिकताओं को बताते हुए कहा कि निर्माण को जिम्मेदारी, लोक कल्याण को लक्ष्य, गुणवत्ता को पहचान, नवाचार को शक्ति और तकनीक को भविष्य मानकर आगे बढ़ना होगा। कार्यक्रम में इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ लोगों का भी सम्मान किया गया। इस दौरान 95 वर्ष और 86 वर्ष की उम्र के सेवानिवृत्त इंजीनियरों को भी सम्मानित किया गया।

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बढ़ते ट्रैफिक के बीच बेहतर प्लानिंग पर जोर

PWD के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने कहा कि MPRDC ने कई स्थानों पर फ्लाईओवर और बायपास का निर्माण कर ब्लैक स्पॉट खत्म करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में सड़क निर्माण के साथ बेहतर प्लानिंग, प्रभावी एक्जीक्यूशन और नई तकनीक पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सड़कें सिर्फ एक स्थान को दूसरे स्थान से जोड़ने का माध्यम नहीं हैं बल्कि वे उद्योगों की धड़कन हैं। सड़कों के जरिए युवाओं को रोजगार और कार्यस्थल तक पहुंच मिलती है, वहीं किसानों के लिए अपनी उपज मंडी तक पहुंचाना आसान होता है। सुखवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश में 440 से ज्यादा ब्लैक स्पॉट हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 और 2026 में जनवरी से सितंबर तक के नौ महीनों के आंकड़ों में सड़क दुर्घटनाओं में कमी दर्ज की गई है।

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पांच श्रेणियों में दिए गए पुरस्कार

‘लोक निर्माण से लोक कल्याण’ की अवधारणा पर आयोजित इस समारोह में इंजीनियरों को पांच अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए। इनमें मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया पुरस्कार, विश्वकर्मा पुरस्कार, विक्रमादित्य पुरस्कार, रानी दुर्गावती पर्यावरण हितैषी पुरस्कार और राजा भोज पुरस्कार शामिल हैं। अभियंता दिवस के इस आयोजन में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के योगदान को सम्मानित करने के साथ सड़क निर्माण में गुणवत्ता, नई तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि आने वाले समय में प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में इंजीनियरों की भूमिका और महत्वपूर्ण होगी।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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