Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

भोपाल की हवा में घुल रहा ‘साइलेंट जहर’:हर दिन 14 खेतों में जल रही पराली, प्रशासनिक सख्ती बेअसर

भोपाल की हवा में 'साइलेंट जहर' घुल रहा है जिससे प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। हर दिन औसतन 14 खेतों में पराली जलाई जा रही है और प्रशासनिक सख्ती भी इस पर बेअसर साबित हो रही है।
हर दिन 14 खेतों में जल रही पराली, प्रशासनिक सख्ती बेअसर

भोपाल के आसपास पराली जलाने के मामले इस साल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। खेतों में आग लगाने पर रोक के सरकारी दावों के बावजूद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। केंद्र सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक 1 जून 2025 से 21 मई 2026 तक भोपाल जिले में 1069 जगहों पर पराली जलाई गई। यानी औसतन हर दिन करीब 14 खेतों में आग लगाई गई। यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा माना जा रहा है। खास बात यह है कि 2024 में जहां सिर्फ 269 मामले सामने आए थे वहीं दो साल के भीतर यह संख्या सात गुना से ज्यादा बढ़ गई। लगातार बढ़ती घटनाएं प्रशासनिक सख्ती और जागरूकता अभियानों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं।

खेतों से उठता धुआं अब शहर तक पहुंचा

विशेषज्ञों का कहना है कि पराली का धुआं अब केवल गांवों तक सीमित समस्या नहीं रह गया है। इसका असर सीधे राजधानी की हवा और लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है। खेतों से उठने वाला धुआं कई किलोमीटर तक फैलकर शहर की एयर क्वालिटी को प्रभावित कर रहा है। रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ रेस्पीरेटरी डिजीज के श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. पराग शर्मा के मुताबिक पराली जलाने से निकलने वाला धुआं साइलेंट जहर की तरह काम करता है। इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म जहरीले कण शामिल होते हैं जो सीधे फेफड़ों और हृदय पर असर डालते हैं। उन्होंने बताया कि इससे अस्थमा, एलर्जी और सांस संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और हार्ट पेशेंट्स के लिए यह स्थिति ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है।

हर साल बदलते दावे, लेकिन आग पर नहीं लग रही रोक

पराली जलाने पर रोक के लिए प्रशासन हर साल जागरूकता अभियान, निगरानी और जुर्माने की कार्रवाई करता है लेकिन आंकड़े बताते हैं कि समस्या कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है।

  • 2022 में भोपाल में 966 मामले सामने आए
  • 2023 में यह घटकर 494 हुए
  • 2024 में सिर्फ 259 मामले दर्ज किए गए
  • 2025 में अचानक यह संख्या बढ़कर 1116 पहुंच गई
  • 2026 में अब तक 1969 मामले दर्ज हो चुके हैं

विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों तक फसल अवशेष प्रबंधन की वैकल्पिक तकनीकें प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पाई हैं। ऐसे में किसान अब भी पराली जलाना सबसे आसान विकल्प मान रहे हैं।

ये भी पढ़ें: दमोह: मकान की खुदाई में निकले ब्रिटिश कालीन चांदी के सिक्के, मजदूर बोले- बाल्टी भरकर ले गया मालिक

मध्य प्रदेश में ये जिले सबसे ज्यादा प्रभावित

जिला मामले
विदिशा 4381
रायसेन 3126
सिवनी 3111
उज्जैन 2436
छिंदवाड़ा 1885

ये भी पढ़ें: MP में जलसंकट पर सरकार अलर्ट! पेयजल विभागों की छुट्टियां रद्द, कलेक्टरों को रोज मॉनिटरिंग के निर्देश

प्रशासन बोला- लगातार निगरानी और कार्रवाई जारी

भोपाल एडीएम सुमित कुमार पांडे ने कहा कि पराली जलाने के मामलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। संबंधित इलाकों में टीमों को सक्रिय किया गया है और किसानों को जागरूक करने के साथ नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पराली प्रबंधन की वैकल्पिक तकनीकों को ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाया जाए ताकि खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर रोक लग सके।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

Latest Posts