PU Special :भोपाल में रद्दी से संवर रहा 120 से ज्यादा बच्चों का भविष्य, 6 साल से शिक्षा की अलख जगा रहा मंथन फाउंडेशन

पल्लवी वाघेला, भोपाल। घरों में पड़े पुराने अखबार, किताबें, कॉपियां और कबाड़ का सामान किसी के लिए बेकार हो सकता है लेकिन यही रद्दी जरूरतमंद बच्चों के भविष्य को संवारने का जरिया बन रही है। भोपाल की युवा संस्था मंथन फाउंडेशन पिछले छह साल से 'रद्दी कैंपेन' चला रही है। इस अभियान के तहत घरों, सोसायटियों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों से पुरानी रद्दी और अनुपयोगी सामग्री एकत्रित की जाती है। इसे बेचकर मिलने वाली राशि बच्चों की शिक्षा और उनके शैक्षणिक विकास पर खर्च की जाती है। संस्था के इस प्रयास से वर्तमान में 120 से ज्यादा बच्चों की पढ़ाई में मदद मिल रही है। अभियान के तहत ड्रॉपआउट बच्चों को लर्निंग सेंटर और समर कैंप के माध्यम से पढ़ाई से जोड़ने के साथ उन्हें मुख्यधारा के स्कूलों में प्रवेश दिलाने और जरूरी शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने में मदद की जाती है। इस तरह घरों का अनुपयोगी सामान बच्चों की पढ़ाई के संसाधन जुटाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
इस साल अब तक 800 किलो से ज्यादा रद्दी जुटाई
मंथन फाउंडेशन के रद्दी कैंपेन को शहर में अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। संस्था ने भोपाल की करीब 15 सोसायटियों में रद्दी कलेक्शन बॉक्स लगाए हैं। यहां रहवासी अपने घरों की पुरानी रद्दी जमा करते हैं। इसके अलावा शहर के चार कॉलेजों में भी कलेक्शन बॉक्स स्थापित किए गए हैं। कई लोग ऐसे भी हैं, जो सीधे संस्था से संपर्क कर रद्दी दान कर रहे हैं।
अभियान के तहत इस साल अब तक 800 किलो से अधिक रद्दी एकत्रित की जा चुकी है। पिछले वर्षों के आंकड़े भी लोगों की बढ़ती भागीदारी दिखाते हैं।
वर्ष 2024 में करीब 1,000 किलो रद्दी जुटाई गई थी जबकि 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,400 किलो हो गया। इसके साथ ही पिछले साल करीब 1,000 किलो कपड़े भी एकत्रित किए गए थे। संस्था के मुताबिक हर साल पुरानी सोसायटियों के साथ नई सोसायटियां भी इस अभियान से जुड़ रही हैं।
सोशल मीडिया से लेकर घर-घर तक चलाया जागरूकता अभियान
मंथन फाउंडेशन ने शुरुआत से ही लोगों को रद्दी कैंपेन के उद्देश्य के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया। इसके लिए सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया। अभियान का विचार लोगों को पसंद आया और कई लोगों ने खुद अपनी सोसायटी की बैठकों में रद्दी कलेक्शन बॉक्स लगाने का प्रस्ताव रखा। शुरुआती दौर में संस्था के सदस्य घर-घर जाकर रद्दी एकत्रित करते थे। इस दौरान वे लोगों को बताते थे कि घर में अनुपयोगी पड़ी सामग्री किस तरह जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में योगदान दे सकती है। धीरे-धीरे लोगों की भागीदारी बढ़ी और सोसायटियों के साथ कॉलेज भी इस पहल से जुड़ने लगे।
नगर निगम के कचरा कैफे और स्थानीय कबाड़ विक्रेताओं की मदद
रद्दी एकत्रित करने के बाद उसे बेचने के लिए संस्था ने व्यवस्थित प्रक्रिया बनाई है। इसके तहत नगर निगम की मदद से रद्दी को कचरा कैफे जैसे संस्थानों तक पहुंचाया जाता है। जहां ऐसे केंद्र दूर पड़ते हैं, वहां स्थानीय कबाड़ विक्रेताओं को रद्दी बेची जाती है। संस्था के मुताबिक, अभियान का उद्देश्य जानने के बाद कई स्थानीय कबाड़ विक्रेता भी बाजार भाव पर अच्छी कीमत देकर रद्दी खरीदते हैं। एकत्रित सामग्री में पुराने अखबार, किताबें, कॉपियां, गत्ते, कार्टन, लोहे का कबाड़, ई-वेस्ट और अन्य अनुपयोगी सामान शामिल होता है। इससे मिलने वाली राशि बच्चों की पढ़ाई के लिए इस्तेमाल की जाती है।
कपड़ों का अलग से कलेक्शन, जरूरतमंदों को बांटे जाते हैं उपयोगी कपड़े
रद्दी के साथ संस्था कपड़ों का संग्रहण भी अलग से करती है। एकत्रित कपड़ों में से जो इस्तेमाल करने लायक होते हैं, उन्हें विभिन्न बस्तियों में जरूरतमंद लोगों को बांट दिया जाता है। वहीं जिन कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और जो रिसाइक्लिंग के योग्य होते हैं, उन्हें कचरा कैफे को दिया जाता है।
इस तरह अभियान एक साथ कई उद्देश्यों को पूरा कर रहा है। एक ओर जरूरतमंद परिवारों को उपयोगी कपड़े मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अनुपयोगी सामग्री के बेहतर निपटान से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। सबसे अहम बात यह है कि रद्दी बेचकर मिलने वाली राशि बच्चों की शिक्षा के लिए संसाधन जुटाने में काम आ रही है।
आप भी रद्दी दान कर बन सकते हैं बच्चों की शिक्षा का हिस्सा
मंथन फाउंडेशन ने शहर के नागरिकों से इस अभियान में जुड़ने की अपील की है। घरों में रखे पुराने अखबार, किताबें, कॉपियां, गत्ते और अन्य अनुपयोगी सामग्री को फेंकने के बजाय दान किया जा सकता है।
इससे मिलने वाली राशि जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में मदद करेगी। रद्दी दान करने या कलेक्शन के लिए संस्था से 9713738747, 7024432499 मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।
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अब तक 40 से 45 बच्चों को स्कूली शिक्षा से जोड़ा
मंथन फाउंडेशन की शुरुआत करीब छह साल पहले कुछ दोस्तों ने मिलकर की थी। इस पहल के पीछे विचार था कि घरों में बेकार पड़ी चीजों को बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य का माध्यम बनाया जाए।
संस्था के सह-संस्थापक गौरव म्हसे के मुताबिक पिछले वर्षों में रद्दी कैंपेन से मिली राशि की मदद से करीब 40 से 45 जरूरतमंद बच्चों को स्कूली शिक्षा से जोड़ा गया है। हर साल बच्चों के स्कूल में प्रवेश, उनकी शैक्षणिक जरूरतों और अन्य संसाधनों की व्यवस्था में इस राशि का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। उन्होंने बताया कि इस अभियान से मिलने वाले सहयोग के जरिए हर साल करीब 150 बच्चों के लिए मुफ्त समर कैंप आयोजित करने में भी मदद मिलती है। इस साल भी बच्चों को समर कैंप से जोड़ने की प्रक्रिया जारी रहेगी। वर्तमान में संस्था 120 से ज्यादा बच्चों की शिक्षा में सहायता कर रही है।




















