PU Special :नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बालाघाट के 100 गांवों की बदलेगी तस्वीर, 14 दिन में बनेगी विकास की कार्ययोजना

नक्सलवाद से मुक्त बालाघाट के 100 पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी है। 14 दिन में गांववार योजना बनेगी जिसमें सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर फोकस रहेगा।
नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बालाघाट के 100 गांवों की बदलेगी तस्वीर, 14 दिन में बनेगी विकास की कार्ययोजना
मुक्ति के बाद बालाघाट के 100 गांवों की बदलेगी तस्वीर

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप बालाघाट जिले के पूर्व नक्सल प्रभावित 100 गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। इन गांवों की बुनियादी समस्याओं का समाधान करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने के लिए जिला प्रशासन ने गांववार विकास योजना बनाने का अभियान शुरू किया है। इसके तहत अगले 14 दिनों में प्रत्येक गांव की जरूरतों का आकलन कर विभागवार कार्ययोजना तैयार की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारी गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे संवाद कर रहे हैं और उनकी समस्याएं तथा सुझाव दर्ज कर रहे हैं। अभियान की शुरुआत हो चुकी है। शुरुआती दो दिनों में चार विकासखंडों के करीब 29 गांवों तक प्रशासनिक टीमें पहुंच चुकी हैं।

कहीं स्कूल नहीं, तो कहीं सड़क और बिजली का संकट

पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। लांजी विकासखंड के करीब 200 की आबादी वाले केराडीह गांव में प्राथमिक स्कूल नहीं है। यहां के बच्चों को पढ़ाई के लिए चार किलोमीटर दूर टेमनी जाना पड़ता है।

गांव का आंगनबाड़ी केंद्र भी क्षतिग्रस्त भवन के कारण किराये के मकान में संचालित हो रहा है। इसके अलावा बिजली, पेयजल और सड़क जैसी समस्याएं भी हैं। ग्रामीणों को अब तक वन अधिकार पट्टे भी नहीं मिले हैं। इसी विकासखंड के बरगुड़ (सतोना) गांव में नल-जल योजना का पंप खराब होने से पेयजल की समस्या सामने आई है। वहीं बिरसा विकासखंड के केरझरी गांव के युवा रोजगार के लिए दूसरे शहरों में पलायन करने को मजबूर हैं। ग्राम मुंडा में कम वोल्टेज की समस्या के साथ छात्रावास और सभामंच की जरूरत बताई गई है। तुम्मा गांव में एंबुलेंस की उपलब्धता, नदी पर पुलिया और मोबाइल नेटवर्क की समस्या सामने आई है। जबकि सोधन डोंगरी में आंगनबाड़ी भवन की जरूरत है।

100 गांवों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर रहेगा फोकस

जिला प्रशासन की प्रस्तावित विकास योजना में गांवों की जरूरत के मुताबिक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इसमें सड़क, पुल-पुलिया, बिजली, पेयजल और सिंचाई की व्यवस्था के साथ स्कूलों और आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को भी मजबूत किया जाएगा।

इसके साथ ही पात्र हितग्राहियों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए वंचित परिवारों की जानकारी जुटाई जाएगी। प्रशासन का जोर केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि गांवों में आजीविका के स्थायी साधन विकसित करने पर भी रहेगा।

खेती और पशुपालन से गांवों में रोजगार के अवसर

स्थानीय स्तर पर रोजगार विकसित करने के लिए कृषि, उद्यानिकी, डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन और मत्स्यपालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है। इसके अलावा महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से भी आजीविका के अवसर तैयार किए जाएंगे। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन करने से रोकना और उन्हें अपने गांव में ही आय के साधन उपलब्ध कराना है।

दो दिन में चार विकासखंडों के गांवों तक पहुंचीं टीमें

गांववार विकास योजना तैयार करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने मैदानी स्तर पर काम शुरू कर दिया है। 26 अक्टूबर को लांजी, बैहर और किरनापुर क्षेत्र के गांवों में अधिकारियों की टीमों ने पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद किया और उनकी जरूरतों की जानकारी ली। इसके बाद 28 अक्टूबर को कलेक्टर ने चार गांवों का दौरा किया। वहीं जिला पंचायत सीईओ और अन्य विभागीय अधिकारियों ने किरनापुर, बिरसा और बैहर विकासखंड के गांवों में पहुंचकर समस्याओं और विकास की जरूरतों का आकलन किया। ग्रामीणों से मिले सुझावों और मांगों को गूगल शीट में दर्ज किया जा रहा है ताकि सभी विभागों की जरूरतों और प्रस्तावों को व्यवस्थित तरीके से शामिल किया जा सके।

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प्राथमिकता के आधार पर होगा समस्याओं का निराकरण

बालाघाट कलेक्टर आदित्य सिंह के मुताबिक, पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों में लंबे समय से चली आ रही बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों और आजीविका से जुड़ी समस्याओं को एक साथ चिन्हित करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से सभी विभागों के अधिकारियों को गांवों में भेजकर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कराई जा रही है।

कलेक्टर ने कहा कि इससे प्राथमिकता के आधार पर समस्याओं का निराकरण किया जा सकेगा और ग्रामीणों को अपने गांव में ही रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। प्रशासन की कोशिश है कि 14 दिनों में तैयार होने वाली गांववार योजना के जरिए इन क्षेत्रों में विकास कार्यों को जरूरत के अनुसार आगे बढ़ाया जाए।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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