Peoples Update Special :भोपाल में पहाड़ का पोस्टमार्टम...खजूरी गांव में तीन साल में आधा गायब किया, हरियाली दूर-168 करोड़ का कोपरा निकाला

शाहिद खान, भोपाल। राजधानी से महज कुछ किलोमीटर दूर बैरसिया रोड पर ईटखेड़ी से लगी गोलखेड़ी पंचायत के खजूरी गांव का एक पूरा पहाड़ पिछले तीन सालों से लगातार काटा जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा खेल प्रशासन की आंखों के सामने होता रहा, लेकिन किसी विभाग ने इसे रोकने की कोशिश नहीं की।
ड्रोन फोटो-वीडियो आंखें खोलने वाले
पीपुल्स समाचार की पड़ताल में ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेज और मौके के निरीक्षण से सामने आया कि पहाड़ से बड़े पैमाने पर कोपरा (मुरम/खनिज) निकाला जा रहा है। पहले खनन पहाड़ के पिछले हिस्से से होता था, इसलिए गतिविधियां छिपी रहीं। ड्रोन तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि पहाड़ के भीतर तक पहुंचने के लिए अस्थायी सड़कें बनाई गई हैं। कई स्थानों पर जेसीबी मशीनें लगातार खुदाई कर रही हैं। निकाले गए कोपरे को निजी ट्रैक्टरों और डंपरों से बाहर ले जाया जा रहा है। यह पूरा क्षेत्र ग्राम पंचायत गोलखेड़ी में आता है। इसके बावजूद न पंचायत स्तर पर कोई रोक लगी और न ही संबंधित विभागों ने कार्रवाई की।
10 हजार से ज्यादा पेड़ों की बलि
सेटेलाइट तस्वीरों की तुलना से पता चलता है कि पिछले तीन वर्षों में पहाड़ का स्वरूप तेजी से बदला है। जहां पहले घना हरित क्षेत्र दिखाई देता था, वहां अब बड़ी-बड़ी खुली खदानें नजर आ रही हैं। लोगों का दावा है कि अब तक करीब 10 हजार छोटे-बड़े पेड़ काटे जा चुके हैं।
टाइमलाइन
- 2023 : पहाड़ में पीछे से खनन शुरू
- 2024 : अंदर तक कच्ची सड़कें बनीं
- 2025 : अवैध खनन के लिए जेसीबी और डंपरों की संख्या बढ़ी।
- 2026 : पहाड़ के सामने से कटाई शुरू की गई। मुख्य सड़क से पहाड़ की कटाई दिखने लगी।
पीपुल्स समाचार की टीम ने यह देखा
- ड्रोन फुटेज में सक्रिय खनन
- पहाड़ पर कटाई करती जेसीबी मशीनें संचालित
- अंदर तक बनाई कच्ची सड़कें
- ट्रैक्टर और डंपरों से परिवहन
- बड़े पैमाने पर की जा रही पेड़ों की कटाई के निशान
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चार बड़े सवाल
- तीन साल तक अवैध खनन चलता रहा, जिम्मेदार विभागों को जानकारी क्यों नहीं हुई?
- हजारों पेड़ों की कटाई की अनुमति किसने दी?
- खनिज का परिवहन किन दस्तावेजों के आधार पर किया जा रहा था?
- क्या खनन विभाग, वन विभाग और पंचायत प्रशासन ने कभी संयुक्त निरीक्षण किया?
जिम्मेदार कौन
- खनिज विभाग
- वन विभाग
- ग्राम पंचायत
- तहसील प्रशासन
- राजस्व विभाग
- पुलिस (अवैध परिवहन हो रहा)
- पर्यावरण विभाग (वन क्षेत्र प्रभावित)
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रोजाना 100 भारी वाहन आते हैं
रोजाना 100 भारी वाहन भी इस रास्ते से गुजर रहे हैं तो क्या खनिज विभाग, वन विभाग, ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी? यहां पर ये गड़बड़ी 3 साल से चल रही है।
रामसिंह (परिवर्तित नाम)
खनन से पहले पेड़ों को काटा गया
पहाड़ पर बड़ी संख्या में प्राकृतिक वनस्पति और जंगली पेड़ थे। खनन के लिए पहले पेड़ों को काटा गया और उसके बाद जेसीबी से पहाड़ की खुदाई शुरू हुई। यहां से रोज डंपर आते-जाते हैं।
अनिल वर्मा, (परिवर्तित नाम)
अधिकतम लगभग 420 करोड़ का खनन
पहाड़ कटाई वाले क्षेत्र (2.30 लाख वर्गमीटर) और औसतन 80 से 100 फीट गहराई के आधार पर अनुमान है कि यहां से अब तक 56 से 70 लाख घनमीटर कोपरा निकाला जा चुका होगा। यदि एक डंपर की औसत क्षमता 14-16 घनमीटर मानी जाए, तो करीब 3.5 लाख से 5 लाख डंपर कोपरा इस पहाड़ से निकाला जा चुका है। यह अनुमान पहाड़ के क्षेत्रफल, संभावित औसत गहराई और सामान्य डंपर क्षमता पर आधारित है। यदि बाजार में कोपरा/मुरम की औसत कीमत 300 से 600 रुपए प्रति घनमीटर मानी जाए, तो अब तक निकाले गए खनिज का संभावित बाजार मूल्य करीब 168 करोड़ से 420 करोड़ रुपए बैठता है।
शादाब खान, माइनिंग एक्सपर्ट
…और जिम्मेदार यह बोले
बैरसिया रोड पर गोलखेड़ी पंचायत के पहाड़ में चल रहे अवैध खनन की जानकारी नहीं है। आपने जानकारी दी है, मैं इसकी जांच कराऊंगा।
विनोद सोनकिया, एसडीएम, हजूर
प्रथम दृष्टया यह जंगल राजस्व क्षेत्र में प्रतीत होता है। यदि ऐसा है, तो यह हमारे अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इस मामले में कार्रवाई का अधिकार संबंधित एसडीएम और खनिज विभाग के पास है। इसके बावजूद मैं यह मामला संबंधित एसडीएम और खनिज विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में भेज रहा हूं, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
लोकप्रिय भारती, डीएफओ, भोपाल












