मिसेज यूनिवर्स एंबेसडर 2026 बनीं भोपाल की डॉ. पूर्णिमा तिवारी, अब इनफर्टिलिटी अवेयरनेस पर फोकस

भोपाल की डॉ. पूर्णिमा तिवारी ने श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित मिसेज यूनिवर्स प्रतियोगिता में ‘मिसेज यूनिवर्स एंबेसडर’ का खिताब हासिल किया है। इस उपलब्धि के बाद अब उनका फोकस महिलाओं के स्वास्थ्य और इनफर्टिलिटी यानी निःसंतानता को लेकर जागरूकता फैलाने पर है। डॉ. पूर्णिमा का मानना है कि निःसंतानता किसी महिला या पुरुष की व्यक्तिगत असफलता नहीं, बल्कि एक चिकित्सकीय समस्या है। सही जांच और उपचार से इसका समाधान संभव है। डॉ. पूर्णिमा तिवारी ने बताया कि चिकित्सा के क्षेत्र में रहकर लोगों की सेवा करना हमेशा से उनका लक्ष्य रहा है। हालांकि, निःसंतानता से जूझ रही महिलाओं को मानसिक और सामाजिक दबाव का सामना करते देखकर उन्हें महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने की प्रेरणा मिली। उनके लिए मिसेज यूनिवर्स एंबेसडर का खिताब केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है।
85 किलो वजन से मिसेज यूनिवर्स एंबेसडर तक का सफर
डॉ. पूर्णिमा तिवारी के इस सफर की शुरुआत करीब एक साल पहले हुई थी। उस समय उनका वजन 85 किलो था। उन्होंने अपने इस लक्ष्य के बारे में सबसे पहले पति से बात की, जिन्होंने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद उन्होंने अपनी फिटनेस और दिनचर्या पर काम करना शुरू किया। पिछले दस महीनों में उन्होंने अनुशासन के साथ अपनी दिनचर्या में बदलाव किए। सुबह पांच बजे उठने से लेकर ट्रेडमिल पर नियमित अभ्यास करने तक, उन्होंने अपनी तैयारी पर लगातार मेहनत की। डॉ. पूर्णिमा का कहना है कि परिवार का सहयोग, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से किसी भी उम्र में नई शुरुआत की जा सकती है।
IVF थीम पर तैयार की गई खास पोशाक
मिसेज यूनिवर्स प्रतियोगिता में डॉ. पूर्णिमा तिवारी की पोशाक भी खास संदेश देने वाली रही। उनकी नेशनल कॉस्ट्यूम डिजाइनर ज्योति परिहार ने IVF की अवधारणा से प्रेरित होकर टेस्ट-ट्यूब बेबी थीम पर यह पोशाक तैयार की। ज्योति परिहार खुद भी IVF विशेषज्ञ हैं। डॉ. पूर्णिमा के मुताबिक, इस पोशाक के जरिए उनके चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े काम और महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया गया। अब वह महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जमीनी स्तर पर काम करना चाहती हैं। उनका मानना है कि महिलाओं का स्वस्थ, जागरूक और आत्मनिर्भर होना समाज की प्रगति के लिए जरूरी है।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हासिल की थी ऑल इंडिया 96वीं रैंक
डॉ. पूर्णिमा तिवारी ने 12वीं के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा में ऑल इंडिया 96वीं रैंक हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की। डॉक्टर बनना उनका बचपन का सपना था, जबकि ब्यूटी पेजेंट में हिस्सा लेने का फैसला उन्होंने बाद में लिया। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 130 देशों की प्रतिभागियों के बीच अपनी पहचान बनाने के लिए उन्होंने वॉक, ड्रेस, अपीयरेंस और कम्युनिकेशन पर काम किया। इस अनुभव ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें अपनी क्षमताओं को नए तरीके से पहचानने का मौका दिया।
निःसंतानता को लेकर जागरूकता फैलाना है अगला लक्ष्य
डॉ. पूर्णिमा तिवारी अब इनफर्टिलिटी यानी निःसंतानता से जुड़े सामाजिक दबाव और भ्रांतियों के प्रति लोगों को जागरूक करना चाहती हैं। उनका कहना है कि निःसंतानता की समस्या महिला या पुरुष, किसी में भी हो सकती है। इसे व्यक्तिगत असफलता के रूप में देखने के बजाय एक चिकित्सकीय समस्या के तौर पर समझना चाहिए। उनका मानना है कि महिलाओं के स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना और उन्हें सही जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है। मिसेज यूनिवर्स एंबेसडर का खिताब हासिल करने के बाद वह अपनी इस उपलब्धि का इस्तेमाल महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को लोगों तक पहुंचाने के लिए करना चाहती हैं।




















