भोपाल BRICS 2026 में तीन खास प्रदर्शनियों ने खींचा लोगों का ध्यान, भारत की हजारों साल पुरानी विरासत एक ही जगह!

भोपाल। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित BRICS संस्कृति सम्मेलन केवल देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद का मंच नहीं बना है बल्कि यहां भारत की हजारों साल पुरानी विरासत भी दुनिया के सामने रखी जा रही है। सम्मेलन में लगाई गई तीन विशेष प्रदर्शनियां सबसे बड़ा आकर्षण बनकर उभरी हैं। इन प्रदर्शनियों में भारत की समुद्री विरासत, सांस्कृतिक संबंध, प्राचीन पांडुलिपियां और ज्ञान परंपरा को सरल और आधुनिक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। देश-विदेश से आए प्रतिनिधि इनका अवलोकन कर रहे हैं। खास बात यह है कि 7 और 9 अगस्त को आम नागरिकों को भी इन प्रदर्शनियों को देखने का अवसर मिलेगा, जिससे वे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को करीब से जान सकेंगे।
प्रदर्शनियों में दिख रही भारत की सांस्कृतिक पहचान
सम्मेलन में लगाई गई तीनों प्रदर्शनियां भारत की अलग-अलग सांस्कृतिक पहचान को सामने लाती हैं। यहां आने वाले लोग यह समझ पा रहे हैं कि भारत केवल अपनी परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सदियों से दुनिया के कई देशों के साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध रखता आया है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल स्क्रीन और आकर्षक प्रस्तुति के जरिए इन विषयों को आसान भाषा में समझाया गया है।
'प्रोजेक्ट मौसम' से जुड़ रही समुद्री विरासत की कहानी
'प्रोजेक्ट मौसम' प्रदर्शनी हिंद महासागर से जुड़े देशों के साथ भारत के पुराने समुद्री संबंधों को दिखाती है। इसमें बताया गया है कि किस तरह समुद्री व्यापार, संस्कृति और विचारों का आदान-प्रदान सदियों से होता रहा। प्रदर्शनी में डिजिटल फिल्म, इंटरैक्टिव डिस्प्ले और कई रोचक गतिविधियां रखी गई हैं, जिनके माध्यम से आगंतुक भारत की साझा समुद्री विरासत को आसानी से समझ रहे हैं। इसके साथ ही विरासत संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जानकारी भी दी जा रही है।
प्रोजेक्ट मौसम
'बृहत्तर भारत' में दुनिया से भारत के रिश्तों की झलक
'बृहत्तर भारत' प्रदर्शनी भारत और दुनिया के बीच बने सांस्कृतिक संबंधों की कहानी बताती है। इसमें दिखाया गया है कि भारतीय संस्कृति, कला, धर्म, संगीत और शिक्षा का प्रभाव एशिया सहित कई देशों तक पहुंचा। प्रदर्शनी यह संदेश देती है कि भारत ने हमेशा ज्ञान, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के माध्यम से दुनिया से रिश्ते मजबूत किए हैं। यहां कई ऐतिहासिक दस्तावेज, सांस्कृतिक प्रतीक और विरासत से जुड़े उदाहरण भी प्रदर्शित किए गए हैं।
बृहत्तर भारत
'ज्ञान भारतम्' में दिख रही भारत की ज्ञान परंपरा
'ज्ञान भारतम्' प्रदर्शनी भारतीय पांडुलिपियों और ज्ञान परंपरा को समर्पित है। इसमें दुर्लभ ग्रंथों और प्राचीन पांडुलिपियों को डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
ज्ञान भारतम्
गणित, साहित्य, दर्शन, अध्यात्म और वैदिक ज्ञान से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पांडुलिपियां लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। इस परियोजना के माध्यम से प्राचीन ज्ञान को सुरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें: हरदा NSUI अध्यक्ष बोले-प्रत्यक्ष प्रणाली से कराएं छात्र संघ चुनाव, अप्रत्यक्ष चुनाव का करेंगे विरोध
मध्यप्रदेश पवेलियन भी बना आकर्षण
सम्मेलन में मध्यप्रदेश का विशेष पवेलियन भी लोगों को खूब पसंद आ रहा है। यहां प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल, वन्यजीव, ऐतिहासिक धरोहर और लोक कला को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। साथ ही स्थानीय कलाकारों की पारंपरिक कला और स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पाद भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। यह पवेलियन प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर मजबूत तरीके से प्रस्तुत कर रहा है।
ये भी पढ़ें: भोपाल: एमपी में बस सफर हुआ महंगा, 75 पैसे प्रति किलोमीटर बढ़ा किराया
भारत की विरासत को दुनिया तक पहुंचाने की पहल
इन तीनों प्रदर्शनियों के माध्यम से भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान परंपरा और वैश्विक संबंधों को नए अंदाज में दुनिया के सामने रख रहा है। सम्मेलन में आए विदेशी प्रतिनिधियों के साथ साथ आम नागरिक भी भारत की इस समृद्ध धरोहर को नजदीक से देख और समझ सकेंगे। यह आयोजन सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने के साथ भारत की विरासत को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।











