भिंड:जेल से बाहर आते ही बंदी का खुलासा, रिश्वत नहीं दी तो की गई मारपीट

भिंड जिले की गोहद उपजेल से जमानत पर रिहा हुए एक बंदी ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बंदी का दावा है कि जेल में प्रवेश के अगले ही दिन उससे शौचालय की सफाई और अन्य कामों से बचाने के बदले 50 हजार रुपये की मांग की गई। आरोप है कि रुपये देने से इनकार करने पर जेलर, कुछ पुलिसकर्मियों और एक अन्य बंदी की मदद से उसके साथ मारपीट की गई। हालांकि गोहद उपजेल के जेलर ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है।
21 जुलाई को जेल भेजा गया था बंदी
मालनपुर थाना क्षेत्र के लटकनपुरा निवासी धीर सिंह गुर्जर ने बताया कि मारपीट के एक मामले में सजा मिलने के बाद 21 जुलाई को मेडिकल परीक्षण के पश्चात उन्हें गोहद उपजेल भेजा गया था। उनका आरोप है कि 22 जुलाई को जेलर ने उनसे 50 हजार रुपये की मांग की। जब उन्होंने पैसे देने से मना किया तो उनके साथ मारपीट की गई और मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया गया।
गर्दन झुकाकर चलने को मजबूर किया जाता है
धीर सिंह ने जेल की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बंदियों को जेल परिसर में गर्दन झुकाकर और हाथ पीछे रखकर चलने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब न्यायिक अधिकारी या मजिस्ट्रेट जेल निरीक्षण के लिए आते हैं तब बंदियों को अपनी शिकायतें खुलकर रखने नहीं दी जाती। इससे जेल की वास्तविक स्थिति अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती।
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जमानत मिलने के बाद की शिकायत
धीर सिंह ने बताया कि 23 जुलाई को उन्हें अदालत से जमानत मिल गई। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई और संबंधित पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
जेलर बोले- सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद
गोहद उपजेल के जेलर शिवपाल सिंह ने बंदी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि न तो किसी प्रकार की रुपये की मांग की गई और न ही बंदी के साथ किसी तरह की मारपीट हुई। उन्होंने पूरे मामले को निराधार और तथ्यहीन बताया है।
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जांच के बाद ही स्थिति होगी स्पष्ट
फिलहाल बंदी की शिकायत के बाद मामले को लेकर जांच की मांग उठी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी स्तर पर कार्रवाई की आवश्यकता है।












