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Lungs Of City...BHEL ने 11 साल में तैयार कर दिए 6 मिनी फॉरेस्ट

मप्र की राजधानी भोपाल का भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) कारखाना पर्यावरण संतुलन के लिए लगातार काम कर रहा है। फैक्ट्री ने 11 साल में 6 मिनी फॉरेस्ट तैयार किए हैं। इसके अलावा BHEL टाउनशिप में हरियाली के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
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BHEL ने 11 साल में तैयार कर दिए 6 मिनी फॉरेस्ट
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मनोज चौरसिया, भोपाल। राजधानी में सरकारी-गैर सरकारी इमारतें तानने के साथ ही नई सड़कें बनाने और पुरानी सड़कों को चौड़ा करने हजारों पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल रही है। वहीं, शहर की भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) टाउनशिप में हरियाली को सांसों की तरह सहेजने की कोशिशें रंग लाने लगी है। दरअसल BHEL प्रबंधन ने 2014 से इसकी शुरुआत की थी। 

    50 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य

    2024 में बड़े पैमाने पर इस मुहिम ने जोर पकड़ा और 8 एकड़ में अलग-अलग जगहों पर 60 हजार से ज्यादा पौधे लगाए गए। यह पौधे अब घने पेड़ों में तब्दील होकर छह मिनी फॉरेस्ट का रूप ले चुके हैं। अब प्रबंधन का अगला लक्ष्य 50 हजार नए पौधे लगाने का है।  इन्हें अवधपुरी, एटीए क्लब और नेहरू नगर में लगाया जाएगा।

    मियावाकी तकनीक का उपयोग

    BHEL कर्मचारी दीपक गुप्ता ने बताया कि अब तक रोपे गए करीब 60 हजार पौधे मियावाकी तकनीक से लगाए गए, जिससे यह हरियाली सामान्य से तीन गुना तेजी से विकसित हुई। गुप्ता ने बताया कि वे अब तक 2000 से ज्यादा पौधे रोप चुके हैं। उल्लेखनीय है कि मियावाकी जंगल बहुत ज्यादा घना होता है और यह क्षेत्र ऑक्सीजन जोन की तरह काम करता है।शहर के प्रदूषण को तो कम करता ही है साथ ही अपने आसपास के क्षेत्र का तापमान भी नियंत्रित करता है।

    जीरो कार्बन रेटिंग के लिए BHEL समर्पित

    पर्यावरण और जीरो कार्बन रेटिंग के लिए BHEL पूरी तरह समर्पित है। पौधरोपण से न केवल हरियाली बढ़ती है, बल्कि अतिक्रमण भी रुकता है। नगर निगम और जिला प्रशासन के सहयोग से BHEL टाउनशिप में तेजी से वन क्षेत्र विकसित हो रहे हैं।

    उपेंद्र कुमार सिंह, प्रवक्ता BHEL

    यूनियन कार्बाइड की खाली जमीन बनेगें ग्रीन लंग्स

    भोपाल गैस त्रासदी की पहचान रही यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री की खाली भूमि को भी अब मियावाकी जंगल में बदलने की योजना तैयार की जा रही है। यह क्षेत्र भविष्य में भोपाल के सबसे बड़े ग्रीन बफर जोन के रूप में विकसित किया जाएगा, जो शहर के प्रदूषण नियंत्रण में निर्णायक भूमिका निभाएगा। पिछले साल जनवरी में इसका फैसला लिया गया पर अमल अब तक नहीं हुआ। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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