देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। बुधवार को 6 माह के मासूम अव्यान साहू ने दम तोड़ दिया। अव्यान की मां का कहना है कि सरकार बच्चों की मौत की सही जानकारी क्यों नहीं दे रही। उनका आरोप है कि दूषित पानी से और भी बच्चे बीमार हुए होंगे, जिनकी जानकारी सामने नहीं आई है। परिजनों के मुताबिक, अव्यान को बाहरी दूध पिलाया जाता था, जिसमें पानी मिलाया जाता था। आशंका है कि यही पानी दूषित था।
बुधवार को अव्यान साहू के अलावा जिन लोगों की मौत हुई, उनमें शामिल हैं-
मंगलवार को जिन मौतों की जानकारी सामने आई, वे हैं-
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मामले को गंभीर मानते हुए हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने प्रदेश सरकार से 2 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इंदौर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इंसानी ने जनहित याचिका दायर कर शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की थी। कोर्ट ने इस पर त्वरित सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
इंदौर में हुई मौतों के बाद भोपाल नगर निगम भी अलर्ट मोड में आ गया है। महापौर मालती राय ने इंजीनियरों और सुपरवाइजरों को पानी की सप्लाई लाइन की जांच के निर्देश दिए हैं। बुधवार को नगर निगम की टीम अवधपुरी इलाके में पहुंची और कई घरों से पानी के सैंपल लिए गए।
दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस पेट में संक्रमण फैलाते हैं। इससे तेज उल्टी-दस्त होते हैं।
लगातार उल्टी-दस्त से शरीर में पानी और जरूरी नमक (सोडियम-पोटेशियम) की भारी कमी हो जाती है। इससे ब्लड प्रेशर गिर सकता है।
नमक का असंतुलन दिल की धड़कन को बिगाड़ सकता है। बुजुर्गों और हार्ट या बीपी के मरीजों में इससे जान का खतरा बढ़ जाता है।
अगर संक्रमण ज्यादा बढ़ जाए तो बैक्टीरिया खून में फैल जाते हैं। इससे कई अंग फेल हो सकते हैं और इलाज में देरी होने पर मौत हो सकती है।
डायबिटीज, हाई बीपी, हार्ट रोग या कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए दूषित पानी जानलेवा साबित हो सकता है।