नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एअर इंडिया के एक पायलट को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। यह नोटिस जून 2025 में संचालित AI-358 और AI-357 फ्लाइट्स के दौरान विमान के संचालन और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर है। DGCA के मुताबिक, विमान में पहले से कई तकनीकी खराबियां मौजूद थीं, फिर भी पायलट और क्रू ने विमान को उड़ाने की अनुमति दी, जिससे सुरक्षा जोखिम पैदा हुआ। पायलट को नोटिस मिलने के 14 दिन के भीतर जवाब देना अनिवार्य है।
DGCA के अनुसार, AI-358 फ्लाइट के दौरान निम्नलिखित समस्याएं दर्ज की गईं:
Minimum Equipment List (MEL):
Civil Aviation Requirements (CAR):
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DGCA ने कहा कि बार-बार तकनीकी खामियों के बावजूद विमान स्वीकार करना गंभीर लापरवाही है। पायलट को नोटिस मिलने के 14 दिन के अंदर जवाब देना अनिवार्य है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर पायलट के खिलाफ सस्पेंशन या अन्य कार्रवाई की जा सकती है। एयरलाइन की ऑपरेशनल प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जाएगी।
22 दिसंबर 2025, AI-887 (दिल्ली-मुंबई) उड़ान को तकनीकी खराबी के कारण उड़ान के कुछ देर बाद दिल्ली लौटना पड़ा। DGCA ने साफ किया कि बार-बार खराबियों के बावजूद विमान स्वीकार करना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से जोखिमपूर्ण है।
एयर इंडिया की शुरुआत 1932 में टाटा एयरलाइंस के रूप में हुई। 15 अक्टूबर 1932 को जेआरडी टाटा ने कराची से मुंबई की पहली फ्लाइट उड़ाई। 1946 में इसका नाम बदलकर एयर इंडिया हुआ। 1953 में नेशनलाइजेशन हुआ और इंडियन एयरलाइंस के साथ डोमेस्टिक मूवमेंट के लिए एयर इंडिया बनाई गई। 1993 में वायुदूत एयरलाइंस का इंडियन एयरलाइंस में विलय। 2005 में एअर इंडिया ने 50 बोइंग और 43 एयरबस खरीदे, लागत लगभग 70,000 करोड़ रुपए। 2012 तक एयर इंडिया घाटे में रही। 2021 में टाटा ग्रुप ने 18,000 करोड़ रुपए में एअर इंडिया का अधिग्रहण किया। अब टाटा के पास एअर इंडिया, एअर इंडिया एक्सप्रेस और विस्तारा एयरलाइंस ब्रांड हैं।
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