एअर इंडिया पायलट शो-कॉज नोटिस जारी :तकनीकी खराबी के बावजूद भरी उड़ान, DGCA ने मांगा जवाब

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एअर इंडिया के पायलट को AI-358 और AI-357 फ्लाइट्स में तकनीकी खराबियों और मिनिमम इक्विपमेंट लिस्ट (MEL) नियमों के उल्लंघन के चलते कारण बताओ नोटिस जारी किया। पायलट को 14 दिन में जवाब देना होगा, अन्यथा सस्पेंशन की कार्रवाई संभव।
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तकनीकी खराबी के बावजूद भरी उड़ान, DGCA ने मांगा जवाब
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एअर इंडिया के एक पायलट को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। यह नोटिस जून 2025 में संचालित AI-358 और AI-357 फ्लाइट्स के दौरान विमान के संचालन और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर है। DGCA के मुताबिक, विमान में पहले से कई तकनीकी खराबियां मौजूद थीं, फिर भी पायलट और क्रू ने विमान को उड़ाने की अनुमति दी, जिससे सुरक्षा जोखिम पैदा हुआ। पायलट को नोटिस मिलने के 14 दिन के भीतर जवाब देना अनिवार्य है।

    AI-358 और AI-357 फ्लाइट में तकनीकी खामियां

    DGCA के अनुसार, AI-358 फ्लाइट के दौरान निम्नलिखित समस्याएं दर्ज की गईं:

    • PACK ACM L (Left Air Cycle Machine) और पैक मोड से जुड़ी चेतावनी।
    • R2 दरवाजे के पास धुएं जैसी गंध।
    • इन समस्याओं के बावजूद विमान VT-ANI को उड़ान के लिए मंजूरी दी गई।
    • यह सिस्टम पहले की 5 उड़ानों में भी खराबी दर्ज हो चुकी थी। DGCA ने पाया कि, पायलट और क्रू ने इन समस्याओं और सुरक्षा जोखिम का सही आकलन नहीं किया। खासकर लोअर राइट रीसर्कुलेशन फैन से जुड़ी MEL शर्तों का पालन नहीं किया गया।

    MEL और CAR क्या हैं?

    Minimum Equipment List (MEL):

    • यह एक आधिकारिक सूची है जो तय करती है कि कौन-कौन से सिस्टम खराब होने पर भी विमान उड़ान भर सकता है।
    • MEL को DGCA/एविएशन रेगुलेटर से अप्रूव्ड किया जाता है और हर एयरक्राफ्ट टाइप के लिए अलग होती है।
    • MEL में यह भी लिखा होता है कि उड़ान से पहले कौन-सी शर्तें पूरी करना जरूरी हैं और कितने समय तक विमान उड़ सकता है।

    Civil Aviation Requirements (CAR):

    • DGCA द्वारा निर्धारित नियम और मानक, जिन्हें सभी एयरलाइंस और क्रू का पालन करना अनिवार्य है।
    • MEL का उल्लंघन सीधे यात्री सुरक्षा से जुड़ा जोखिम पैदा करता है।
    • DGCA ने स्पष्ट किया कि इस मामले में MEL की ‘O’ कंडीशन का पालन नहीं हुआ और यह गंभीर सुरक्षा उल्लंघन है।

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    DGCA का रुख और संभावित कार्रवाई

    DGCA ने कहा कि बार-बार तकनीकी खामियों के बावजूद विमान स्वीकार करना गंभीर लापरवाही है। पायलट को नोटिस मिलने के 14 दिन के अंदर जवाब देना अनिवार्य है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर पायलट के खिलाफ सस्पेंशन या अन्य कार्रवाई की जा सकती है। एयरलाइन की ऑपरेशनल प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जाएगी।

    पिछले तकनीकी मामले

    22 दिसंबर 2025, AI-887 (दिल्ली-मुंबई) उड़ान को तकनीकी खराबी के कारण उड़ान के कुछ देर बाद दिल्ली लौटना पड़ा। DGCA ने साफ किया कि बार-बार खराबियों के बावजूद विमान स्वीकार करना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से जोखिमपूर्ण है।

    एअर इंडिया का इतिहास और टाटा ग्रुप अधिग्रहण

    एयर इंडिया की शुरुआत 1932 में टाटा एयरलाइंस के रूप में हुई। 15 अक्टूबर 1932 को जेआरडी टाटा ने कराची से मुंबई की पहली फ्लाइट उड़ाई। 1946 में इसका नाम बदलकर एयर इंडिया हुआ। 1953 में नेशनलाइजेशन हुआ और इंडियन एयरलाइंस के साथ डोमेस्टिक मूवमेंट के लिए एयर इंडिया बनाई गई। 1993 में वायुदूत एयरलाइंस का इंडियन एयरलाइंस में विलय। 2005 में एअर इंडिया ने 50 बोइंग और 43 एयरबस खरीदे, लागत लगभग 70,000 करोड़ रुपए। 2012 तक एयर इंडिया घाटे में रही। 2021 में टाटा ग्रुप ने 18,000 करोड़ रुपए में एअर इंडिया का अधिग्रहण किया। अब टाटा के पास एअर इंडिया, एअर इंडिया एक्सप्रेस और विस्तारा एयरलाइंस ब्रांड हैं।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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