श्रावण के अंतिम सोमवार को नीलकंठेश्वर धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, रुद्रि निर्माण का हुआ समापन
बेगमगंज। श्रावण माह के अंतिम सोमवार को क्षेत्र के प्रसिद्ध एवं प्राचीन धार्मिक स्थल नीलकंठेश्वर धाम में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। बाबा महाकाल के सानिध्य में आयोजित सात दिवसीय रुद्री निर्माण अनुष्ठान का सोमवार को विधिवत समापन हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का पूजन-अर्चन कर जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर दिनभर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा। श्रावण माह के पावन अवसर पर नीलकंठेश्वर धाम में सात दिनों तक रुद्री निर्माण एवं शिव आराधना का आयोजन किया गया। इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर भगवान शिव की उपासना की। श्रद्धालुओं ने रुद्री निर्माण के साथ भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छी बारिश की कामना की। अंतिम सोमवार को अनुष्ठान की पूर्णाहुति के साथ श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना की।
नर्मदा जल लेकर पहुंचे कांवड़िए
श्रावण सोमवार के चलते क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से हजारों कांवड़िए मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर नीलकंठेश्वर धाम पहुंचे। कांवड़ियों ने भगवान शिव को नर्मदा जल अर्पित कर विधि-विधान से जलाभिषेक किया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर तक जारी रहा। मंदिर परिसर में शिवभक्तों की लंबी कतारें नजर आईं।

एक जलाभिषेक से 1101 शिवलिंगों के पूजन का फल
नीलकंठेश्वर धाम की धार्मिक मान्यता श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। बताया जाता है कि यहां प्राचीन शिवलिंग में 1101 रुद्रियों का स्वरूप विद्यमान है। मान्यता है कि नीलकंठेश्वर महादेव पर एक बार जल चढ़ाने से 1101 शिवलिंगों पर जल अर्पित करने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इसी धार्मिक आस्था के चलते श्रावण मास में दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
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श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी वितरण
धार्मिक आयोजन के दौरान सामाजिक लोगों और श्रद्धालुओं की ओर से भोजन प्रसादी का वितरण भी किया गया। भक्तों ने प्रसादी ग्रहण कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। अंतिम सोमवार को हुए इस आयोजन के साथ ही सात दिवसीय रुद्री निर्माण अनुष्ठान का श्रद्धा और उल्लास के बीच समापन हुआ।
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