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बेगमगंज-यूसीसी विधेयक के विरोध में मुस्लिम समाज ने सौंपा ज्ञापन, धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग

बेगमगंज में मुस्लिम समाज की विभिन्न संगठनों ने समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 के विरोध में राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। समाज के प्रतिनिधियों ने संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 में प्रदत्त अधिकारों के संरक्षण की मांग करते हुए विधेयक वापस लेने और इसे लागू नहीं करने की मांग की।
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 बेगमगंज-यूसीसी विधेयक के विरोध में मुस्लिम समाज ने सौंपा ज्ञापन, धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग
बेगमगंज। यूसीसी के विरोध में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।

बेगमगंज। समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 के विरोध में बेगमगंज में मुस्लिम समाज के विभिन्न संगठनों ने संयुक्त रूप से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। जमीयत उलेमा, मजलिस-ए-शूरा, मुस्लिम त्योहार कमेटी, इस्लाह-ए-मिल्लत कमेटी और न्यू यंग मोमिन ग्रुप सहित समाज के लोगों ने एसडीएम प्रियंका भलावी को ज्ञापन सौंपते हुए विधेयक को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। समाज के प्रतिनिधियों ने संविधान में प्रदत्त अधिकारों के संरक्षण की मांग की।

संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 का दिया हवाला

 ज्ञापन में कहा गया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 में संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 में दिए गए अधिकारों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों की रक्षा जरूरी है। इसी मांग को लेकर प्रदेश के अन्य हिस्सों के साथ बेगमगंज में भी ज्ञापन सौंपा गया।

व्यक्तिगत और धार्मिक मामलों को लेकर जताई आपत्ति 

जमीयत उलेमा के सदर मौलाना सैयद जैद अली ने ज्ञापन का वाचन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार प्रदान करता है। ज्ञापन में शादी-विवाह, तलाक, विरासत, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत मामलों को एक समान कानून के दायरे में लाने को लेकर आपत्ति जताई गई। समाज के प्रतिनिधियों ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के संरक्षण की मांग करते हुए राष्ट्रपति से समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 को वापस लेने का आग्रह किया। साथ ही भविष्य में इस प्रकार के विधेयक को पारित नहीं किए जाने के संबंध में आवश्यक निर्देश देने की मांग की।

‘संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा जरूरी’ 

ज्ञापन सौंपने पहुंचे लोगों ने कहा कि संविधान की रक्षा करना देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने देश के विभिन्न धर्मों के लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता और अपने धार्मिक अधिकारों का पालन करने की स्वतंत्रता दी है। समाज के प्रतिनिधियों ने आशंका जताई कि यूसीसी विधेयक से इन अधिकारों पर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए विधेयक पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

बड़ी संख्या में समाज के लोग रहे मौजूद 

ज्ञापन सौंपने वालों में मजलिस-ए-शूरा के रुक्न चांद मियां एडवोकेट, जमीयत उलेमा के सदर मौलाना सैयद जैद अली, मुस्लिम त्योहार कमेटी अध्यक्ष आरिफ राईन, इस्लाह-ए-मिल्लत कमेटी अध्यक्ष शब्बीर अहमद और न्यू यंग मोमिन ग्रुप अध्यक्ष हलीम आकाश सहित बड़ी संख्या में समाजजन शामिल रहे।

इनकी भी रही उपस्थिति

इनके अलावा मुस्लिम त्योहार कमेटी के पूर्व अध्यक्ष हाजी शफीक अली, शकील खान, मौलाना सामिद नदवी, मौलाना नजर खान, हाफिज अकबर खान, मौलाना जैद जुल्फी, हाजी नोमान बेग, हाजी रफीक मंसूरी, रफीक नवाब, हाजी नफीस नवाब, जावेद मीर, हाजी मोहम्मद फिरोज खान, प्यारे आकाश, अस्सू नाना, मुफ्ती जुनैद खान, मुफ्ती एहतेशाम खान, महफूज पायलट, आमिर गोलू, शकील बाबा, जावेद पठान, बाबा शोएब पठान, अतीक गौरयान, एहफाज सौदागर, फरहान लाला, सल्लू मंसूरी, आबिद मंसूरी और मौलाना फरहान खान सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

Anand Sharma
By Anand Sharma

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