JPSC रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, हेमंत सरकार को बड़ा झटका; नवनियुक्त अफसरों को राहत

रांची। झारखंड में JPSC यानी झारखंड लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने हाल ही में कई भर्ती परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार के इस फैसले के खिलाफ सफल अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
गुरुवार को हाईकोर्ट में इस मामले से जुड़ी अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका दाखिल करने वाले अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी। हाईकोर्ट ने फिलहाल सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द किया गया था। इस फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जो परीक्षा पास करने के बाद सरकारी नौकरी हासिल कर चुके हैं और सरकार के फैसले के कारण उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया था।
सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाएं की थीं रद्द
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने 18 अगस्त को एक अधिसूचना जारी की थी। इसमें झारखंड लोक सेवा आयोग और एक बाहरी एजेंसी की ओर से आयोजित 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया गया था। इसके साथ ही सरकार ने 23 अन्य परीक्षाओं की जांच कराने के आदेश भी दिए थे। सरकार के इस फैसले के बाद उन परीक्षाओं में सफल होने वाले अभ्यर्थियों के बीच नाराजगी फैल गई। कई अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्होंने लंबे समय तक तैयारी की, परीक्षा दी, मेरिट में जगह बनाई और इसके बाद उन्हें सरकारी नौकरी मिली। ऐसे में पूरी परीक्षा या नियुक्ति को रद्द करने से उन लोगों पर भी असर पड़ रहा है, जिनकी किसी गड़बड़ी में कोई भूमिका नहीं है।
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सफल अभ्यर्थियों ने शुरू किया विरोध
सरकार के फैसले के खिलाफ सफल अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका कहना है कि अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी हुई है या किसी उम्मीदवार ने गलत तरीके से नौकरी हासिल की है, तो जांच के बाद दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। एक सफल अभ्यर्थी ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर उसके खिलाफ कोई सबूत है तो उसके आधार पर कार्रवाई की जाए। लेकिन बिना किसी जांच और सबूत के एक दिन में नौकरी छीन लेना उचित नहीं है। अभ्यर्थी का कहना था कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी थी। मेहनत करके चयन हासिल किया और इसके बाद सरकारी सेवा में योगदान दिया। ऐसे में अचानक नियुक्ति रद्द किए जाने से उनका भविष्य मुश्किल में पड़ गया है।
अभ्यर्थियों का क्या कहना है?
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले अभ्यर्थियों का मुख्य तर्क है कि सरकार ने उनका पक्ष सुने बिना ही एकतरफा फैसला लिया। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में ऐसे उम्मीदवार हैं, जो चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकारी नौकरी ज्वाइन कर चुके हैं। अगर पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया जाता है, तो इसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ता है, जिन्होंने अपनी नौकरी के आधार पर भविष्य की योजनाएं बनाई हैं। अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जांच में अगर किसी उम्मीदवार की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन बिना जांच, बिना सबूत और बिना सुनवाई सभी सफल अभ्यर्थियों को दोषी मान लेना सही नहीं है, ऐसा याचिकाकर्ताओं का कहना है।
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11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा का भी मामला
इस पूरे विवाद में 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियां भी शामिल हैं। सरकार के आदेश के खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।हाईकोर्ट की ओर से सरकार के आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद इन परीक्षाओं और नियुक्तियों से जुड़े सफल अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, यह मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आगे की सुनवाई में अदालत सरकार के फैसले, जांच और नियुक्तियों से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार कर सकती है।
प्रदीप यादव ने कोर्ट के फैसले पर क्या कहा?
झारखंड CLP नेता प्रदीप यादव ने हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार कोर्ट के आदेश का पालन करेगी। उन्होंने कहा कि जांच आगे बढ़ने पर एक-एक करके पूरी स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को प्रथम दृष्टया कुछ परीक्षाओं में गड़बड़ी दिखाई दी होगी, इसलिए उन्हें रद्द करने का फैसला लिया गया। हालांकि, अब मामला कोर्ट में है और अदालत ने याचिकाओं के आधार पर सरकार के आदेश पर रोक लगाई है। प्रदीप यादव ने उन अभ्यर्थियों के प्रति सहानुभूति भी जताई, जिन्होंने मेहनत और अपने परिवार की कमाई खर्च करके परीक्षा पास की और नौकरी हासिल की है।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद JPSC भर्ती विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। सरकार की ओर से परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर जो फैसला लिया गया था, उस पर फिलहाल रोक लग गई है। अब आगे की सुनवाई में यह महत्वपूर्ण होगा कि सरकार ने परीक्षाएं और नियुक्तियां रद्द करने का फैसला किन आधारों पर लिया था और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।




















