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गाय पालने के कारण गोरस-कलमी गांव बने मप्र के बरसाना और वृंदावन

ग्वालियर-चंबल के 24 गांव में 1 हजार गो-पालक
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गाय पालने के कारण गोरस-कलमी गांव बने मप्र के बरसाना और वृंदावन

धर्मेंद्र त्रिवेदी-ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल के गोरस को बरसाना और कलमी गांव को गायों के कारण वृंदावन की संज्ञा दी गई है। ए-2 वीना केसीन से भरपूर गिर और मारवाड़ी गायों का दूध ही इन गांवों की आजीविका का मुख्य साधन है। यहां दिवाली, होली और जन्माष्टमी विशेष रूप से मनती है। इन गांवों के एक हजार से अधिक लोग भगवान कृष्ण और मां राधा को ही अपना इष्ट और खुद को गोप का रूप मानकर गायों की सेवा कर रहे हैं।

ये गांव जहां सबसे ज्यादा गायें

  • 24 गांव में लगभग 80 हजार से अधिक गिर और मारवाड़ी गायें हैं।
  • 35 हजार लीटर से अधिक दूध मिल रहा है किसानों को प्रतिदिन

गो पर्यटन बढ़ा सकता है नाम

कूनो में चीता आने के बाद यहां देशी-विदेशी पर्यटक बढ़ गए हैं। अगर सड़क पर बसे गोरस और कलमी दोनों गांवों को गो पर्यटन के रूप में पहचान मिले तो क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।

यह है अन्य जिलों का हाल

  • ग्वालियर : 2.10 लाख गाय हैं, इनमें 30 हजार पालतू हैं। 2.20 लाख भैंस भी पाली जाती हैं।
  • भिंड : 2 लाख से ज्यादा गाय हैं जिले में इनमें 50 हजार पालतू हैं। 3.30 लाख भैंस भी हैं।
  • मुरैना : 2.10 लाख गाय जिले में हैं। इनमें 10 हजार पालतू हैं। जबकि जिले में 3.30 लाख भैंस हैं।
  • श्योपुर : 2.64 लाख गायें जिले में हैं। गिर नस्ल की 70-80 हजार हैं। 24 गांव गिर गायों के दूध के लिए विख्यात हैं।

श्योपुर में दूध उत्पादन उत्कृष्ट स्तर का है। किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण देकर और उन्नत तरीके सिखाने के प्रयास जारी हैं। गायों की देखरेख में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहती है, इसलिए महिला समूहों को प्रोत्साहन देने का प्लान है। -किशोर कान्याल, कलेक्टर-श्योपुर

People's Reporter
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