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पचमढ़ी में गौर के हमले में सैनिक की मौत, परिजनों को 8 लाख की आर्थिक सहायता

पचमढ़ी में गौर (इंडियन बाइसन) के हमले में जान गंवाने वाले सैनिक आकाश चौहान के परिजनों को 8 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने पूरी कर ली है। वहीं, घटना के बाद वन्य प्राणियों को आबादी वाले क्षेत्रों में आने से रोकने और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने की तैयारी की जा रही है।
पचमढ़ी में गौर के हमले में सैनिक की मौत

पचमढ़ी। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक राखी नंदा के मुताबिक, पचमढ़ी में कई स्थानों पर जालियां लगाई गई हैं और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी की जाएगी। प्रबंधन ने पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से खुले में जूठन और खाद्य अपशिष्ट नहीं फेंकने की अपील की है। खाने की गंध से वन्य प्राणी आकर्षित होकर जंगल से आबादी वाले क्षेत्रों और सड़कों तक पहुंच जाते हैं।

सैनिक के परिजनों को 8 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति

पचमढ़ी स्थित आर्मी एजुकेशन कोर (एईसी) ट्रेनिंग कॉलेज एवं सेंटर के परेड ग्राउंड में गौर के हमले में सैनिक आकाश चौहान की जान चली गई थी। इस घटना के बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने उनके परिजनों को 8 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुक्रवार शाम को ही पूरी कर ली। इसकी जानकारी क्षेत्र संचालक राखी नंदा ने दी।

पचमढ़ी में कई स्थानों पर लगाई गईं जालियां

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक राखी नंदा ने बताया कि वन्य प्राणियों को शहरी और आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश करने से रोकने के लिए पचमढ़ी में कई स्थानों पर जालियां लगाई गई हैं। जिन स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत महसूस होगी, वहां और पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। प्रबंधन का प्रयास है कि वन्य प्राणियों और आम नागरिकों के बीच टकराव की स्थिति न बने।

वन्य प्राणियों को भोजन देना पड़ सकता है भारी

इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने एक बार फिर पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। प्रबंधन का कहना है कि वन्य प्राणियों को किसी भी परिस्थिति में खाद्य पदार्थ न दें और न ही जंगलों, पर्यटन मार्गों या सार्वजनिक स्थानों पर जूठन एवं खाद्य अपशिष्ट फेंकें। ऐसा करने से वन्यजीवों की स्वाभाविक भोजन तलाशने की प्रवृत्ति प्रभावित हो सकती है।

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मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए नागरिकों का सहयोग जरूरी

वन्यजीवों की स्वाभाविक भोजन तलाशने की प्रवृत्ति में मानवीय हस्तक्षेप उनके व्यवहार को प्रभावित करता है। ऐसे में वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए नागरिकों का सहयोग भी बेहद जरूरी है। गौर के हमले की घटना के बाद पचमढ़ी में सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने के साथ आमजन में जागरूकता बढ़ाना भी सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन की प्राथमिकता बन गया है।

Neelam Tiwari
By Neelam Tiwari

नीलम तिवारी - सोहागपुर के वरिष्ठ पत्रकार, 40 वर्षों से निष्पक्ष, जनसरोकार और ग्रामीण मुद्दों की निर्...

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