छतरपुर के सीनियर वकील को अग्रिम जमानत, हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया आपसी सहमति का मामला माना

जबलपुर। दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के आरोपों का सामना कर रहे छतरपुर के सीनियर एडवोकेट इम्तियाज अहमद सिद्दीकी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से राहत मिल गई है। जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली। अदालत ने रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद प्रथम दृष्टया मामले को आपसी सहमति का प्रतीत होने वाला बताया। कोर्ट ने आरोपी को जांच में सहयोग करने के निर्देश भी दिए हैं।
शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप
मामले में 32 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया है कि वह छतरपुर के ग्रामीण क्षेत्र से आकर वकालत की प्रैक्टिस कर रही थी। इसी दौरान उसका परिचय 50 वर्षीय सीनियर एडवोकेट इम्तियाज अहमद सिद्दीकी से हुआ। पीड़िता के मुताबिक आरोपी ने उसे अपने मार्गदर्शन में काम दिलाने का भरोसा दिया और रहने के लिए किराए का कमरा भी उपलब्ध कराया। महिला का आरोप है कि आरोपी ने अपनी पत्नी को तलाक देकर उससे शादी करने का आश्वासन दिया और इसी भरोसे पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाया गया। अभियोजन पक्ष और पीड़िता की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपी ने पहली बार संबंध बनाते समय वीडियो रिकॉर्ड कर लिया था और उसके जरिए उसे ब्लैकमेल करता रहा।
आरोपी पक्ष ने शपथ पत्र और लिव-इन एग्रीमेंट का दिया हवाला
अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त और अधिवक्ता सिद्धार्थ बेंदेल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि दोनों पक्ष बालिग हैं और पेशे से वकील हैं। पीड़िता ने 26 फरवरी 2026 को अपनी स्वेच्छा से शपथ पत्र दिया था, जिसमें उसने सीनियर एडवोकेट से विवाह करने की इच्छा जताई थी। बचाव पक्ष के अनुसार, 20 जुलाई 2026 को दोनों ने लिव-इन रिलेशनशिप एग्रीमेंट भी किया था। इसके बाद वे किराए के मकान में अपनी मर्जी से साथ रह रहे थे। आरोपी पक्ष ने इन्हीं तथ्यों के आधार पर अग्रिम जमानत देने की मांग की।
अभियोजन और पीड़िता के वकील ने किया जमानत का विरोध
वहीं अभियोजन पक्ष और पीड़िता के वकील ने जमानत याचिका का विरोध किया। उनकी दलील थी कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर महिला का शारीरिक शोषण किया और बाद में धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया। उन्होंने वीडियो के जरिए ब्लैकमेल किए जाने का आरोप भी लगाया। पीड़िता पक्ष के मुताबिक इन परिस्थितियों में आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया आपसी सहमति का मामला माना
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि FIR के अनुसार दोनों वर्ष 2024 से संपर्क में थे। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि पीड़िता ने 3 अगस्त 2026 तक कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। इस दौरान दोनों के बीच विवाह की इच्छा से जुड़ा शपथ पत्र और लिव-इन रिलेशनशिप एग्रीमेंट भी हुआ था। इन परिस्थितियों पर विचार करते हुए अदालत ने प्रथम दृष्टया इसे सीनियर एडवोकेट द्वारा यौन शोषण का मामला मानने के बजाय आपसी सहमति का प्रतीत होने वाला मामला बताया। इसी आधार पर कोर्ट ने इम्तियाज अहमद सिद्दीकी की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली और उन्हें जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए।
इन धाराओं में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला 3 अगस्त 2026 को दर्ज किया गया था। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 और 351(3), एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं तथा मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3/5 के तहत केस दर्ज किया गया था। हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद अब आरोपी को जांच में सहयोग करना होगा।




















