पाकिस्तान 14 अगस्त को मनाता है आजादी, बलोचिस्तान 11 अगस्त को क्यों? जानिए 1947 से अब तक का पूरा विवाद

नई दिल्ली। पाकिस्तान हर साल 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है, लेकिन आज यानी 11 अगस्त को बलोच समुदाय और बलोच राष्ट्रवादी संगठन एक अलग दिन को याद करते हैं। कई बलोच राष्ट्रवादी 11 अगस्त को 'बलोचिस्तान स्वतंत्रता दिवस' के तौर पर मनाते हैं। इसके पीछे 1947 में ब्रिटिश भारत के बंटवारे और तत्कालीन कलात रियासत की स्थिति से जुड़ा इतिहास है। हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है कि 11 अगस्त को बलोचिस्तान का स्वतंत्रता दिवस मानने का दावा बलोच राष्ट्रवादी संगठनों का नजरिया है। पाकिस्तान इस दावे को स्वीकार नहीं करता। पाकिस्तान के आधिकारिक रुख के मुताबिक बलोचिस्तान उसके देश का हिस्सा है और कलात का पाकिस्तान में विलय कानूनी प्रक्रिया के तहत हुआ था। तो आखिर 11 अगस्त की तारीख इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? और 14 अगस्त से इसका क्या संबंध है? इसके लिए हमें करीब 80 साल पीछे जाना होगा।
11 अगस्त 1947 को क्या हुआ था?
1947 में ब्रिटिश भारत से सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही थी। उस समय आज के बलोचिस्तान के इलाके में कलात एक रियासत थी, जिसके शासक खान मीर अहमद यार खान थे। कलात की स्थिति दूसरी रियासतों से कुछ अलग थी। ब्रिटिश सरकार और कलात के शासक के बीच विशेष संधि संबंध थे। इसी वजह से कलात के भविष्य को लेकर भारत और पाकिस्तान की आजादी से पहले ही बातचीत शुरू हो गई थी। इतिहासकार ताज मोहम्मद ब्रीसीग ने अपनी किताब Baloch Nationalism: Its Origin and Development Up to 1980 में 11 अगस्त 1947 को हुए एक समझौते का उल्लेख किया है। बलोच राष्ट्रवादी इसी घटना को अपनी अलग राजनीतिक और संवैधानिक पहचान के महत्वपूर्ण आधार के तौर पर देखते हैं। उनका तर्क है कि इस समझौते के बाद कलात को एक अलग संवैधानिक स्थिति हासिल थी और इसी वजह से 11 अगस्त को स्वतंत्रता की तारीख के रूप में याद किया जाता है।
15 अगस्त 1947 को कलात ने क्या किया?
भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ और पाकिस्तान 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है। इसी दौर में कलात के शासक खान मीर अहमद यार खान ने कलात को स्वतंत्र घोषित किया। बलोच राष्ट्रवादी इतिहास की इसी अवधि को कलात की स्वतंत्रता के रूप में पेश करते हैं। उनके मुताबिक, कलात कुछ समय तक पाकिस्तान से अलग एक स्वतंत्र इकाई के तौर पर अस्तित्व में रहा। हालांकि, इस अवधि और कलात की वास्तविक संवैधानिक स्थिति को लेकर इतिहासकारों के बीच अलग-अलग व्याख्याएं हैं। इसलिए इसे बिना संदर्भ के सीधे “स्वतंत्र बलोचिस्तान देश” कहना इतिहास की जटिलता को काफी सरल बना देगा।
फिर पाकिस्तान का हिस्सा कैसे बना कलात?
कलात और पाकिस्तान के बीच संबंध 1947 के आखिर से लेकर 1948 की शुरुआत तक लगातार तनावपूर्ण रहे। दोनों पक्षों के बीच पाकिस्तान में विलय को लेकर बातचीत होती रही। पाकिस्तान का आधिकारिक पक्ष है कि कलात का पाकिस्तान में विलय कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ था। पाकिस्तान के अनुसार, 27 मार्च 1948 को खान मीर अहमद यार खान ने पाकिस्तान में विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद कलात पाकिस्तान का हिस्सा बन गया और बाद में बलोचिस्तान पाकिस्तान के प्रांतों में शामिल हुआ। लेकिन बलोच राष्ट्रवादी संगठनों का इस घटनाक्रम को लेकर अलग दावा है। उनका कहना है कि विलय स्वेच्छा से नहीं हुआ और इसके पीछे पाकिस्तान की ओर से राजनीतिक तथा सैन्य दबाव था। यही वह बिंदु है जहां से आज तक दोनों पक्षों की ऐतिहासिक व्याख्या अलग-अलग रहती है।
1948 में ही शुरू हुआ था विरोध
कलात के पाकिस्तान में विलय के बाद विरोध की शुरुआत भी हुई। इतिहासकार ताज मोहम्मद ब्रीसीग के मुताबिक, खान ऑफ कलात के भाई प्रिंस अब्दुल करीम ने 1948 में पाकिस्तान के खिलाफ विद्रोह शुरू किया था। इसके बाद बलोचिस्तान में अलगाव और स्वायत्तता से जुड़े आंदोलनों के कई दौर देखने को मिले। 1958, 1962, 1973 और 2000 के दशक में भी बड़े विद्रोह और संघर्ष हुए। इन आंदोलनों के पीछे सिर्फ अलग देश की मांग ही नहीं रही। राजनीतिक अधिकार, प्रांत की स्वायत्तता, प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों का नियंत्रण, विकास और केंद्र सरकार की नीतियों जैसे मुद्दे भी इसमें शामिल रहे हैं।
बलोचिस्तान में आज भी क्यों है असंतोष?
बलोचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक संसाधनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां गैस, खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। बलोच राष्ट्रवादी लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि इन संसाधनों का फायदा स्थानीय लोगों को पर्याप्त रूप से नहीं मिलता। इसके अलावा राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आर्थिक विकास और सुरक्षा अभियानों को लेकर भी असंतोष रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार बलोचिस्तान को देश का अभिन्न हिस्सा मानती है और अलगाववादी गतिविधियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताती है। यानी आज का विवाद केवल 1947 की घटनाओं को लेकर नहीं है। इसके पीछे दशकों से चले आ रहे राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी मतभेद भी हैं।
फिर 11 अगस्त और 14 अगस्त में फर्क क्या है?
सीधे शब्दों में समझें तो 14 अगस्त पाकिस्तान का आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस है, जिसे पूरे देश में सरकारी स्तर पर मनाया जाता है। वहीं 11 अगस्त को बलोच राष्ट्रवादी संगठन और कई बलोच समुदाय कलात की ऐतिहासिक स्वतंत्र स्थिति की याद में “बलोचिस्तान स्वतंत्रता दिवस” के रूप में मनाते हैं। दोनों तारीखों के पीछे अलग-अलग ऐतिहासिक व्याख्याएं हैं। पाकिस्तान 11 अगस्त को बलोचिस्तान की स्वतंत्रता के रूप में मान्यता नहीं देता। इसलिए 11 अगस्त को “बलोचिस्तान का आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस” कहना सही नहीं होगा। इसे बलोच राष्ट्रवादियों द्वारा मनाया जाने वाला दिवस कहना ज्यादा सटीक है।
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80 साल बाद भी खत्म नहीं हुई इतिहास की बहस
1947 में शुरू हुआ कलात का विवाद आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। एक तरफ पाकिस्तान का आधिकारिक इतिहास है, जिसमें कलात का पाकिस्तान में विलय कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया जाता है। दूसरी तरफ बलोच राष्ट्रवादी हैं, जो इसे अपने अलग राष्ट्र की पहचान और अधिकारों के सवाल से जोड़ते हैं। इसी ऐतिहासिक मतभेद की वजह से हर साल 11 अगस्त को बलोच राष्ट्रवादी संगठन अपनी राजनीतिक और ऐतिहासिक पहचान को सामने रखते हैं, जबकि पाकिस्तान 14 अगस्त को अपनी आजादी का जश्न मनाता है। यानी 11 अगस्त बनाम 14 अगस्त की कहानी सिर्फ दो तारीखों का अंतर नहीं है। यह कलात की स्थिति, पाकिस्तान में उसके विलय और बलोचिस्तान की राजनीतिक पहचान को लेकर दशकों पुराने विवाद की कहानी है।












