Why not SIR in Assam :असम में अगले साल विधानसभा चुनाव, लेकिन नहीं होगा SIR; चुनाव आयोग ने बताई खास वजह

देशभर में 21 साल बाद शुरू हुई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया अब अपने दूसरे चरण में पहुंच गई है। इस चरण में 12 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं, लेकिन असम को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
दूसरे चरण में 12 राज्य शामिल
मुख्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR का दूसरा चरण इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शुरू होगा —
- अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्यप्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल।
- 4 नवंबर से घर-घर सर्वे किया जाएगा, 9 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होगी और 7 फरवरी 2026 को अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी।
असम को अलग आदेश का इंतजार
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि असम में नागरिकता से जुड़े नियम देश के बाकी हिस्सों से अलग हैं। इसलिए असम के लिए SIR की प्रक्रिया अलग आदेश से और अलग तारीख पर शुरू होगी।
असम में लागू है नागरिकता कानून की विशेष धारा
असम में नागरिकता कानून की धारा 6A लागू है। इसके तहत—
- 1 जनवरी 1966 से पहले आने वालों को सीधे नागरिक माना गया।
- 1 जनवरी 1966 से 25 मार्च 1971 के बीच आने वालों को रजिस्ट्रेशन के बाद नागरिकता मिल सकती है।
- 25 मार्च 1971 के बाद आने वालों को अवैध प्रवासी माना जाता है।
- इन मामलों का निपटारा विदेशी न्यायाधिकरण (Foreigners Tribunal) करता है।
असम समझौते से जुड़ी है धारा 6A
धारा 6A को 1985 में असम समझौते के तहत जोड़ा गया था। इस समझौते का उद्देश्य बांग्लादेश से आए प्रवासियों की पहचान और नागरिकता की सीमा तय करना था। हालांकि, यह प्रावधान बाद में कानूनी विवादों और विरोधों का कारण भी बना।
NRC विवाद के बाद आयोग की सतर्कता
असम में 2019 में जारी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) में करीब 19 लाख लोग सूची से बाहर रह गए थे। इससे राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। अब चुनाव आयोग नहीं चाहता कि SIR प्रक्रिया से फिर वैसा विवाद खड़ा हो, इसलिए वहां अलग आदेश जारी किया जाएगा।











