Ajinkya Rahane Retirement :अजिंक्य रहाणे की वो 5 ऐतिहासिक पारियों जिसने उन्हें बनाया 'विदेशी पिचों का सिकंदर'

स्पोर्ट्स डेस्क। भारत के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाजों में शामिल अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट और सभी फॉर्मेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। अपने शांत स्वभाव, बेहतरीन तकनीक और मुश्किल परिस्थितियों में बड़ी पारियां खेलने की क्षमता के कारण रहाणे को विदेशी पिचों का स्पेशलिस्ट माना जाता था। उन्होंने कई ऐसे मौके पर टीम इंडिया को संभाला, जब दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजी आक्रमण के सामने भारतीय बल्लेबाजी बिखर चुकी थी।
पढ़िए रहाणे की 5 सबसे यादगार पारियां
1. 96 रन बनाम दक्षिण अफ्रीका, डरबन (2013)
अजिंक्य रहाणे ने अपने करियर के दूसरे ही टेस्ट मैच में बता दिया था कि वह विदेशी परिस्थितियों के लिए बने बल्लेबाज हैं। डरबन के किंग्समीड मैदान पर डेल स्टेन, वर्नोन फिलेंडर और मोर्ने मोर्केल जैसे घातक गेंदबाज भारतीय बल्लेबाजों पर हावी थे। ऐसे मुश्किल हालात में रहाणे ने 96 रन की शानदार पारी खेली। वह शतक से सिर्फ चार रन दूर रह गए, लेकिन उनकी इस पारी ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत को विदेशों में एक नया भरोसेमंद बल्लेबाज मिल गया है।
2. 118 रन बनाम न्यूजीलैंड, वेलिंगटन (2014): हार से बचाने वाली पारी
वेलिंगटन के बेसिन रिजर्व की तेज और उछाल भरी पिच पर भारत मुश्किल में था। सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे रहाणे ने धैर्य और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 118 रन की बेहतरीन पारी खेली और टीम को हार से बचाने में अहम भूमिका निभाई। यह उनके टेस्ट करियर का पहला शतक था। इस पारी के बाद विदेशी दौरों पर रहाणे की उपयोगिता पर किसी को कोई संदेह नहीं रहा और वह टीम इंडिया के सबसे भरोसेमंद मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज बन गए।
3. 147 रन बनाम ऑस्ट्रेलिया, मेलबर्न (2014): कंगारुओं को दिया करारा जवाब
मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 530 रन का विशाल स्कोर बनाया था। जवाब में भारत दबाव में था, लेकिन रहाणे ने कप्तान विराट कोहली के साथ शानदार बल्लेबाजी की। मिचेल जॉनसन, रयान हैरिस और जोश हेजलवुड जैसे तेज गेंदबाजों के खिलाफ उन्होंने 147 रन बनाए। विराट के 169 और रहाणे की इस पारी की बदौलत भारत मैच में वापसी कर सका। यह पारी उनकी बेहतरीन तकनीक, बैक-फुट खेल और धैर्य का शानदार उदाहरण मानी जाती है।
4. 103 रन बनाम इंग्लैंड, लॉर्ड्स (2014): रखी ऐतिहासिक जीत की नींव
क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स में शतक लगाना हर बल्लेबाज का सपना होता है। रहाणे ने यह सपना बेहद कठिन परिस्थितियों में पूरा किया। भारत का स्कोर सात विकेट पर सिर्फ 145 रन था और टीम मुश्किल में थी। ऐसे समय रहाणे ने संयम के साथ 103 रन बनाए और भारत को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। उनकी इस पारी ने भारत की ऐतिहासिक जीत की नींव रखी। यह 28 साल बाद लॉर्ड्स में भारत की पहली टेस्ट जीत थी और रहाणे का नाम हमेशा के लिए लॉर्ड्स ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज हो गया।
5. 112 रन बनाम ऑस्ट्रेलिया, मेलबर्न (2020): कप्तान के तौर पर ऐतिहासिक शतक
रहाणे के करियर की सबसे खास पारी 2020 के बॉक्सिंग डे टेस्ट में आई। एडिलेड टेस्ट में भारत सिर्फ 36 रन पर ऑलआउट हुआ था और विराट कोहली स्वदेश लौट चुके थे। ऐसे कठिन दौर में कार्यवाहक कप्तान के रूप में रहाणे ने टीम की जिम्मेदारी संभाली। मेलबर्न में उन्होंने 112 रन की कप्तानी पारी खेली और रवींद्र जडेजा के साथ 121 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। उनकी इस पारी से भारत ने मैच जीता, सीरीज 1-1 से बराबर की और बाद में गाबा में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ऑस्ट्रेलिया को उसकी सरजमीं पर 2-1 से टेस्ट सीरीज में हरा दिया। यह शतक सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की सबसे प्रेरणादायक पारियों में गिना जाता है।
संन्यास का ऐलान करते हुए भावुक हुए रहाणे
अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा एक भावुक वीडियो के जरिए की। इस दौरान वह कई बार अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े और बोलते-बोलते उनकी आवाज भर्रा गई। वीडियो में उन्होंने कहा कि हर शुरुआत का एक अंत होता है और सही समय पर आगे बढ़ना भी जिंदगी का हिस्सा है।
रहाणे ने कहा, जिंदगी की सच्चाई है कि जिस चीज की शुरुआत हुई है, उसका अंत भी होता है। आपको सही समय का सम्मान करके आगे बढ़ना होता है। अपनी बल्लेबाजी में भी मैंने हमेशा टाइमिंग पर भरोसा किया और आज मुझे लगता है कि इंटरनेशनल क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने का यही सही समय है।
'देश हमेशा खुद से ऊपर रखा, अब नई पीढ़ी का साथ दूंगा'- रहाणे
अपने क्रिकेट सफर को याद करते हुए रहाणे ने बचपन के संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे बोरीवली से रोज प्रैक्टिस के लिए सफर करते थे और एक दिन टीम इंडिया की कैप पहनने का सपना देखते थे। रहाणे ने कहा, "हर दिन मेरा सिर्फ एक सपना था कि एक दिन भारतीय टीम की कैप पहनूं। मैंने हमेशा अपने देश को खुद से ऊपर रखा और पूरी ईमानदारी के साथ क्रिकेट खेला। मेरा मानना है कि जब आपकी नियत साफ होती है तो खेल भी आपका साथ देता है।"
उन्होंने आगे कहा कि पिछले 20 वर्षों तक भारतीय क्रिकेट का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है। हालांकि बतौर खिलाड़ी उनका सफर अब खत्म हो रहा है, लेकिन क्रिकेट से उनका रिश्ता हमेशा बना रहेगा। वह आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों की मदद करेंगे और अपने अनुभव उनके साथ साझा करेंगे।











