AI की मदद से प्रॉब्लम्स का सॉल्यूशन बिड्ल अप करने जुटे 280 युवा, भोपाल में आयोजित हुआ क्लॉड कोड बिल्ड डे फेबल 5.1

भोपाल। साधारण रूप से तो यह हैकाथॉन है लेकिन कुछ अलग तरह का। इसमें पार्टिसपेंट्स को AI की मदद से ऐसे सॉल्यूशन बिल्ड करने थे जो उपयोगी हों। इसके लिए 280 से ज्यादा पार्टिसिपेंट्स को चुना गया और उन्होंने अपने-अपने आइडिया पर काम किया। पार्टिसिपेंट्स में 60 प्रतिशत डेवलपर्स, 20 प्रतिशत वर्किंग प्रोफेशनल्स और 20 प्रतिशत नॉन टेक्निकल लोग थे।
कैसे अलग था ईवेंट
एंथ्रोपिक का यह ईवेंट देश में सिर्फ चार शहरों भोपाल, मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरू में हो रहा है। ईवेंट के बारे में क्लॉड के एम्बेसडर अनिकेत साहू ने बताया कि प्रोग्राम सीरीज का उद्देश्य सेंट्रल इंडिया के लोगों को एआई के बारे में एजुकेट करना है। पार्टिसिपेंट्स को क्लॉड के हायर वर्जन फेबल 5.1 (जो कि पेड है) यूज करने के लिए 100 डॉलर का क्रेडिट दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपनी पसंद की प्रॉब्लम का सॉल्यूशन खोजने की कोशिश की। बिल्डअप डे में पार्टिसिपेंट्स ने सरकार के लिए, एनजीओ और डेली प्रॉब्लम्स का सॉल्यूशन खोजने की कोशिश की। इसमें यह भी पता करने की कोशिश की गई कि एआई जो जॉब मार्केट को खत्म कर रहा है नए जॉब्स कैसे क्रिएट कर सकता है।
नॉलेज-पाथ-एआई
इस ईवेंट में पार्टिसिपेंट्स को अपने नॉलेज को एआई के साथ शेयर करना था और इसके बाद एआई उनकी समस्या का पूरा सॉल्यूशन पाथ के साथ देता है। जैसे कि किसी के पास सोशल मीडिया स्किल्स हैं लेकिन उसे अच्छा जॉब नहीं मिल रहा है तो वो एआई को प्रॉम्प्ट दे सकता है कि किस शहर में उसे कैसा और कितने पैकेज का जॉब खोजना है, एआई उसे तुरंत खोजकर दे सकता है।
इंडिया में काफी नया है कॉन्सेप्ट
अमेरिका और चीन की बात करें तो हम काफी पीछे हैं। वहां प्रोडक्ट बेस्ड रिसर्च चल रहा है तो हमारे यहां यह सर्विस बेस्ड है यानी वो मूल सॉफ्टवेयर डेवलप कर रहे हैं तो हम उसका उपयोग कर सर्विस दे रहे हैं। हमें अपने यहां के मॉडल्स को ट्रेन करने की भी जरूरत है, इसमें भी हम काफी पीछे हैं। हालांकि आने वाले 10 साल में देश में रोबोटिक्स पर काफी काम होने जा रहा है जो हमारी दुनिया को बदल सकता है। एआई के रिसर्च में भारत पीछे है इसका कारण है इन्वेस्टर कम होना, हमें इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा।
क्या है सिक्योरिटी प्रॉब्लम्स?
हाल ही में सामने आया है कि कुछ लोगों ने क्लॉड का यूज करके गाइडेड रॉकेट्स और बायोलॉजिकल वेपन बनाने की कोशिश की थी। इस बारे में क्लॉड के एम्बेस्डर अनिकेत का कहना है कि कोई नहीं जानता कि आगे एआई से क्या होगा, लेकिन सिक्योरिटी थ्रेट्स को कम करने के लिए लोगों को एजुकेट करना होग। हाल ही में एआई को स्लो करने की बात पर उन्होंने कहा कि उसे स्लो करने से तो हम सभी चीन से पीछे रह जाएंगे।




















