PU Special :टीबी ने शरीर तोड़ा, सरकार की पोषण मदद भी सात महीने से अटकी; कार्ड बने मरीजों को भी नहीं मिल रही राशि

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। प्रदेश में टीबी से जूझ रहे मरीजों के सामने बीमारी के इलाज के साथ पोषण का संकट भी बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश में टीबी के 1.72 लाख मरीज पंजीकृत हुए, इनमें से 4,733 मरीजों की मौत हो गई। यानी औसतन हर दिन करीब 13 मरीजों ने जान गंवाई। दूसरी ओर, टीबी का इलाज पूरा कर चुके हजारों मरीजों को दिसंबर 2025 से निक्षय पोषण योजना की राशि नहीं मिली है। इलाज के दौरान और उसके बाद शरीर को बीमारी से उबरने में मदद करने वाले पोषण के लिए मिलने वाली सरकारी सहायता करीब सात महीने से अटकी हुई है। कई मरीजों ने इस संबंध में सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत भी दर्ज कराई लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। भोपाल में स्थिति और गंभीर है। यहां करीब 12 हजार टीबी मरीज पंजीकृत हैं जिनमें 2 हजार से ज्यादा गैस पीड़ित शामिल हैं। ऐसे मरीजों के लिए इलाज के साथ पौष्टिक भोजन का खर्च उठाना अतिरिक्त चुनौती बन रहा है।
कार्ड बना है, फिर भी नहीं मिली राशि
टीबी मरीजों को पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार ने निक्षय पोषण योजना शुरू की थी। वर्तमान व्यवस्था के तहत पात्र मरीज को उपचार की अवधि में हर माह 1,000 रुपए की सहायता डीबीटी के जरिए दी जाती है। यह राशि सीधे मरीज के बैंक खाते में भेजी जाती है। मामले में एनएचएम की उप संचालक और स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. रूबी खान का कहना है कि जिन मरीजों के कार्ड नहीं बने हैं, संभव है उन्हें राशि नहीं मिल रही हो। हालांकि, जमीनी स्थिति में ऐसे मरीज भी सामने आए हैं जिनका निक्षय कार्ड बना हुआ है, इसके बावजूद उन्हें भुगतान नहीं मिला। पीपुल्स समाचार ने ऐसे दो मरीजों से बात की, जिन्होंने बताया कि इलाज पूरा होने के बाद भी वे पोषण सहायता की राशि का इंतजार कर रहे हैं।
योजनाओं की हकीकत बताते दो केस
केस-1: सात महीने से भुगतान का इंतजार
उड़िया बस्ती निवासी विनोद कुमार गैस पीड़ित हैं। उन्होंने टीबी का छह महीने का उपचार पूरा कर लिया है, लेकिन कमजोरी अभी भी बनी हुई है। विनोद के मुताबिक वह जेएनएच गैस राहत अस्पताल के डॉट्स केंद्र से जुड़े हैं और पिछले सात महीने से निक्षय पोषण योजना की राशि का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि हर बार जल्द भुगतान होने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन अब तक राशि उनके खाते में नहीं पहुंची है।
केस-2: इलाज पूरा, लेकिन पौष्टिक भोजन का खर्च मुश्किल
कांग्रेस नगर निवासी राशिदा बी के लिए टीबी की दवाओं के साथ पौष्टिक भोजन का इंतजाम करना भी चुनौती बना हुआ है। इलाज पूरा होने के बावजूद कमजोरी बरकरार है। निक्षय की राशि नहीं मिलने के कारण परिवार को भोजन का अतिरिक्त खर्च अपनी जेब से उठाना पड़ रहा है। राशिदा का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि लंबे समय तक पौष्टिक भोजन का अतिरिक्त खर्च आसानी से उठाया जा सके।
टीबी में पोषण क्यों जरूरी
गांधी मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. अनिल शेजवार के मुताबिक टीबी संक्रमण के दौरान शरीर में काफी कमजोरी आ सकती है। ऐसे समय में शरीर को सामान्य स्थिति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा और पर्याप्त पोषण की जरूरत होती है। पर्याप्त भोजन और प्रोटीन नहीं मिलने पर वजन कम होना, मांसपेशियों में कमजोरी, थकान और भूख कम लगने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पहले से कमजोर मरीज में पोषण की कमी से रोग प्रतिरोधक क्षमता और कमजोर हो सकती है जिससे दूसरी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। उनके मुताबिक टीबी के इलाज में दवाओं का नियमित सेवन जितना जरूरी है, उतना ही संतुलित और पर्याप्त भोजन भी जरूरी है। पोषण की कमी होने पर शरीर को बीमारी से उबरने में ज्यादा समय लग सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए सरकार की पोषण सहायता इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है।
6 महीने तक हर माह 1,000 रुपए की सहायता
निक्षय पोषण योजना टीबी मरीजों को उपचार के दौरान पोषण संबंधी खर्च में मदद देने के लिए संचालित की जाती है। वर्तमान व्यवस्था में पात्र मरीज को 1,000 रुपए प्रतिमाह डीबीटी के जरिए दिए जाते हैं। यह राशि सीधे मरीज के बैंक खाते में भेजी जाती है। योजना का उद्देश्य मरीज और उसके परिवार पर पौष्टिक भोजन के अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करना है। सहायता उपचार की अवधि के अनुसार दी जाती है। योजना का लाभ लेने के लिए मरीज का निक्षय प्रणाली में पंजीयन और निर्धारित प्रक्रिया के तहत पात्र होना जरूरी है। यह गैस पीड़ितों के लिए अलग से संचालित योजना नहीं है। हालांकि, कोई गैस पीड़ित व्यक्ति टीबी का मरीज है और निर्धारित पात्रता पूरी करता है तो वह इस योजना का लाभ ले सकता है।
रिपोर्ट में 1.87 लाख पात्र लाभार्थी दर्ज
इंडिया टीबी रिपोर्ट 2024 के मुताबिक मध्यप्रदेश में निक्षय पोषण योजना के 1,87,211 पात्र लाभार्थी दर्ज थे। इनमें 1,72,591 मरीजों के बैंक खाते की जानकारी उपलब्ध थी, जबकि 1,63,709 खातों का सत्यापन पूरा हो चुका था। रिपोर्ट के अनुसार 1,56,862 लाभार्थियों को कम से कम एक बार भुगतान मिला था। इसका मतलब है कि रिपोर्टिंग अवधि तक 30,349 पात्र लाभार्थियों को कम से कम एक भुगतान नहीं मिला था। आंकड़ों के मुताबिक पात्र लाभार्थियों में कम से कम एक भुगतान पाने वालों का अनुपात करीब 83.8 प्रतिशत रहा। यानी योजना के पात्र सभी मरीजों तक भुगतान पहुंचने की स्थिति नहीं थी।
आधार सीडिंग और डीबीटी भी हो सकती है वजह
निक्षय पोषण योजना की राशि सभी पात्र मरीजों तक नहीं पहुंचने के सवाल पर डॉ. रूबी खान, उप संचालक एवं स्टेट कोऑर्डिनेटर, एनएचएम ने कहा कि ऐसा संभव है कि जिन मरीजों के बैंक खाते आधार से सीड नहीं हैं या डीबीटी के लिए सक्रिय नहीं हैं, उन्हें राशि नहीं मिल पा रही हो। उन्होंने कहा कि विभाग की कोशिश है कि प्रत्येक पात्र मरीज को योजना के तहत सही समय पर पोषण सहायता मिल सके। हालांकि मरीजों की शिकायत यह है कि पात्रता और कार्ड होने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। ऐसे में बैंक खाते, आधार सीडिंग और डीबीटी की स्थिति के साथ भुगतान प्रक्रिया की जांच जरूरी हो जाती है।
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बीमारी से उबरने के बाद भी पोषण की जरूरत
टीबी का 6 महीने का इलाज पूरा कर लेना बीमारी से लड़ाई का एक महत्वपूर्ण चरण है लेकिन कई मरीजों में कमजोरी और पोषण की कमी लंबे समय तक बनी रह सकती है। ऐसे में इलाज के बाद भी पर्याप्त भोजन और प्रोटीन की जरूरत होती है। सरकारी पोषण सहायता का उद्देश्य इसी आर्थिक बोझ को कम करना है। लेकिन यदि पात्र मरीजों को महीनों तक राशि नहीं मिलती है तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने पौष्टिक भोजन की व्यवस्था करना मुश्किल हो सकता है। भोपाल जैसे शहर में बड़ी संख्या में टीबी मरीजों और उनमें शामिल गैस पीड़ितों के लिए यह समस्या और महत्वपूर्ण हो जाती है।




















