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सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में पादप विविधता संरक्षण पर कार्यशाला, IUCN मानकों की दी गई जानकारी

सोहागपुर के इको सेंटर मटकुली में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और मध्य प्रदेश जैव विविधता बोर्ड के सहयोग से पादप विविधता संरक्षण पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें वन अधिकारियों, शोधकर्ताओं और मैदानी कर्मचारियों को IUCN मानकों के अनुसार संकटग्रस्त पादप प्रजातियों के आकलन, संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी दी गई।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में पादप विविधता संरक्षण पर कार्यशाला

सोहागपुर। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य IUCN मानकों के अनुसार संकटग्रस्त पादप प्रजातियों का आकलन, संरक्षण और उनके सतत प्रबंधन से जुड़ी तकनीकी जानकारी प्रतिभागियों तक पहुंचाना रहा। प्रशिक्षण का आयोजन द यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रांस-डिसीप्लिनरी हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (TDU)/FRLHT, बेंगलुरु के विशेषज्ञों ने किया।

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों की मौजूदगी में शुरुआत

कार्यशाला का शुभारंभ सतपुड़ा टाइगर रिजर्व पचमढ़ी के सहायक संचालक संजीव शर्मा और पिपरिया के सहायक संचालक आशीष खोबरागड़े की मौजूदगी में हुआ। इस दौरान परिक्षेत्र अधिकारी मटकुली, परिक्षेत्र अधिकारी पूर्व पचमढ़ी समेत विभिन्न परिक्षेत्रों के वनपाल, वनरक्षक और प्रकृति प्रेमियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में करीब 40 प्रतिभागी शामिल हुए। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें पादप प्रजातियों के संरक्षण, पहचान और वैज्ञानिक तरीके से उनके मूल्यांकन से जुड़ी जानकारी दी गई।

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विशेषज्ञों ने पादप संरक्षण की वैज्ञानिक तकनीकें समझाईं

TDU बेंगलुरु से डॉ. सुमा तगादुर और डॉ. के. रविकुमार और नर्मदा कॉलेज नर्मदापुरम के प्रोफेसर डॉ. रवि उपाध्याय ने प्रशिक्षण दिया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को पादप संरक्षण, प्रजातियों की पहचान और उनके वैज्ञानिक मूल्यांकन से जुड़ा व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान IUCN मानकों के अनुरूप संकटग्रस्त पादप प्रजातियों के आकलन और संरक्षण से जुड़े तरीकों पर भी जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य मैदानी स्तर पर पादप विविधता के वैज्ञानिक प्रबंधन को बेहतर बनाना रहा।

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मैदानी क्षेत्र में कराई गई पेड़ प्रजातियों की पहचान

कार्यशाला के व्यावहारिक चरण में प्रतिभागियों को मैदानी क्षेत्र में ले जाया गया। यहां विभिन्न पेड़ प्रजातियों की पहचान कराई गई और मौके पर पाई गई प्रजातियों की विस्तृत सूची तैयार की गई। तैयार की गई यह सूची भविष्य में क्षेत्र के वानिकी प्रबंधन, पादप विविधता संरक्षण और जैव विविधता से जुड़े कार्यों के लिए उपयोगी आधार के रूप में काम करेगी। कार्यशाला के जरिए प्रतिभागियों को पादप विविधता के संरक्षण और वैज्ञानिक मूल्यांकन की जानकारी मैदानी अनुभव के साथ दी गई।

Neelam Tiwari
By Neelam Tiwari

नीलम तिवारी - सोहागपुर के वरिष्ठ पत्रकार, 40 वर्षों से निष्पक्ष, जनसरोकार और ग्रामीण मुद्दों की निर्...Read More

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