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भोपाल से पकड़े युवक बोले- राजस्थान पुलिस ने हमारे साथ ज्यादती की, हाईकोर्ट ने सीजेएम को तीनों के बयान दर्ज करने कहा

राजस्थान पुलिस की ओर से बताया गया कि पूरा मामला जयपुर कमिश्नरेट के डीआईजी क्राइम और भोपाल के डीसीपी क्राइम के बीच मौखिक बातचीत से शुरू हुआ था।
राजस्थान पुलिस ने हमारे साथ ज्यादती की, हाईकोर्ट ने सीजेएम को तीनों के बयान दर्ज करने कहा

पीपुल्स संवाददाता, जबलपुर। पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे को लेकर एक विवादित पोस्ट सोशल मीडिया में वायरल करने के आरोप में राजस्थान पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए तीन युवकों को बुधवार को हाईकोर्ट में पेश किया गया। राजस्थान पुलिस की ओर से गिरफ्तारी का ब्यौरा पेश किया गया, वहीं तीनों युवकों ने कहा कि उनके साथ पुलिस ने ज्यादती की है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीजेएम को कहा है कि वे तीनों के बयान दर्ज करें। बयान में यह दर्ज किया जाए कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संपर्क किए जाने से लेकर जयपुर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के दौरान वास्तव में क्या हुआ। मामले की अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित करके बेंच ने कोर्ट में मौजूद सभी अधिकारियों को अगली सुनवाई पर फिर से हाजिर रहने कहा है।

हाईकोर्ट ने ये निर्देश भोपाल के खिजर खान ने अपने भाई बिलाल खान, उदय घेनघट ने अपने मित्र निखिल प्रजापति और अनाम अहमद ने अपने भाई इनाम अहमद की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता हरजस सिंह छाबड़ा, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ब्रम्हदत्त सिंह और राजस्थान पुलिस की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह हाजिर हुए।

सुरक्षा के साए में पेश हुए युवक

हाईकोर्ट द्वारा दिए गए  निर्देश पर एडिशनल एसपी रामस्वरूप शर्मा, अशोक नगर के एसीपी बलराम चौधरी के अलावा एक दर्जन पुलिस वालों ने तीनों युवकों को कोर्ट में पेश किया। राजस्थान पुलिस की ओर से बताया गया कि तीनों को 22 अप्रैल की दोपहर को गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से वे जेल भेजे गए। चूंकि तीनों को जमानत तो मिल गई, लेकिन बेल बॉण्ड न भरने के कारण वे अभी हिरासत में ही हैं।

यह भी पढ़ें: MP High Court: महिला को ‘टेस्टिंग टूल’ बनाने पर हाईकोर्ट सख्त, बर्खास्त इंस्पेक्टर को राहत से इनकार

गिरफ्तार नहीं किया, साथ आए थे

राजस्थान पुलिस ने यह भी कहा कि युवकों को गिरफ्तार कर नहीं लाया गया था, बल्कि वे मध्यप्रदेश पुलिस अधिकारियों के साथ स्वयं जयपुर आए थे। हालांकि उन्हें जयपुर ले जाने की प्रक्रिया में कुछ अनियमितताएं पाई गई हैं, जिन पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

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डीआईजी और डीसीपी दें हलफनामा

राजस्थान पुलिस की ओर से बताया गया कि पूरा मामला जयपुर कमिश्नरेट के डीआईजी क्राइम और भोपाल के डीसीपी क्राइम के बीच मौखिक बातचीत से शुरू हुआ था। इस पर हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को निर्देश दिया कि पहली बातचीत से लेकर युवकों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने तक पूरे घटनाक्रम का विस्तृत शपथपत्र एक सप्ताह में दाखिल करें।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...

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