MP News :मध्य प्रदेश के आयोगों में खाली पड़े शीर्ष पद, फैसलों और निगरानी व्यवस्था पर पड़ रहा है असर

मप्र में कई आयोगों में शीर्ष पद खाली पड़े हैं। इस वजह से फैसलों और निगरानी की व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। मानवाधिकार आयोग बीते 5 साल से कार्यवाहक अध्यक्ष के भरोसे है।इसी तरह रेरा, बिजली नियामक आयोग एवं अन्य का हाल है।
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मध्य प्रदेश के आयोगों में खाली पड़े शीर्ष पद, फैसलों और निगरानी व्यवस्था पर पड़ रहा है असर

अशोक गौतम, भोपाल। मप्र की कई महत्वपूर्ण नियामक और सलाहकार संस्थाएं लंबे समय से स्थायी नेतृत्व के अभाव में संचालित हो रही हैं। रेरा, बिजली नियामक, मानवाधिकार संरक्षण, प्रशासनिक सुधार, निर्माण गुणवत्ता और प्रदूषण नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े आयोगों एवं प्राधिकरणों में अध्यक्ष या शीर्ष अधिकारियों के पद रिक्त हैं।

अधिकांश संस्थाएं कार्यवाहक व्यवस्था के सहारे

पद रिक्त होने से न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है, बल्कि लंबित मामलों के निराकरण और नीतिगत निर्णयों की प्रक्रिया भी धीमी पड़ रही है। प्रदेश सरकार प्रशासनिक सुधार और सुशासन को प्राथमिकता देने का दावा करती रही है, लेकिन कई महत्वपूर्ण संस्थानों में नियमित नियुक्तियां नहीं हो पाने से उनकी कार्यक्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। अधिकांश संस्थाएं कार्यवाहक व्यवस्था के सहारे चल रही हैं, जबकि महत्वपूर्ण निर्णय लंबित हैं।

मप्र रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) 

यहां अप्रैल 2026 से अध्यक्ष का पद रिक्त है। वहीं रेरा अपीलीय ट्रिब्यूनल का कार्यकाल मार्च में समाप्त हो चुका है। दोनों संस्थानों में मिलाकर 450 से अधिक प्रकरण लंबित बताए जा रहे हैं। रेरा में दो सदस्यों के कारण नियमित सुनवाई जारी है।

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प्रशासनिक सुधार एवं पुनर्गठन आयोग 

शासन व्यवस्था में सुधार, विभागीय पुनर्गठन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए गठित इस आयोग में गठन के बाद से ही नियमित अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है। वर्तमान में सदस्य एसएन मिश्रा को अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

मानव अधिकार आयोग

करीब पांच वर्षों से यहां नियमित अध्यक्ष नहीं है। आयोग में लगभग पांच हजार शिकायतें लंबित हैं। वर्तमान में एपी सिंह कार्यवाहक अध्यक्ष है।

मप्र विद्युत नियामक आयोग 

17 माह से अध्यक्ष का पद रिक्त है। आयोग बिजली दर निर्धारण, वितरण कंपनियों के नियमन और उपभोक्ता हितों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले करता है। ऐसे में स्थायी अध्यक्ष  ने होने से नीतिगत प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। इसके कार्यवाहक अध्यक्ष गोपाल श्रीवास्तव है।

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मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 

यहां नियमित अध्यक्ष की नियुक्ति वर्षों से नहीं हो सकी है। पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय फिलहाल प्रभार व्यवस्था के माध्यम से लिए जा रहे हैं। बोर्ड के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के पास है।

राज्य निर्माण गुणवत्ता नियंत्रक परिषद

परिषद में महानिदेशक (डीजी) का पद अक्टूबर 2023 से खाली है। पूर्व डीजी अशोक शाह के अन्य पद पर नियुक्त होने के बाद से यह पद नहीं भरा गया है। इससे काम प्रभावित हो रहे हैं।

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फुलफिल अध्यक्ष होना चाहिए

आयोग में जो भी पद होते हैं,वे मंथन के बाद बनाए जाते हैं। मानव अधिकार आयोग में फुलफिल अध्यक्ष होना चाहिए। अध्यक्ष उस परसेप्शन के आधार पर निर्णय लेता है, ये प्रभावी भी होते है। न्यायिक से जुड़े मसलों को ये बेहतर समझ सकते हैं।

मनोहर ममतानी, पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष, मानव अधिकार आयोग

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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