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MP High Court:महिला को ‘टेस्टिंग टूल’ बनाने पर हाईकोर्ट सख्त, बर्खास्त इंस्पेक्टर को राहत से इनकार

भोपाल के एक पुलिस इंस्पेक्टर द्वारा महिला कर्मी के साथ की गई अमर्यादित हरकत पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि यह घटना बेहद शर्मनाक है और इसमें न्याय जरूर होगा।
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महिला को ‘टेस्टिंग टूल’ बनाने पर हाईकोर्ट सख्त, बर्खास्त इंस्पेक्टर को राहत से इनकार

भोपाल के एक पुलिस इंस्पेक्टर द्वारा महिला कर्मी के साथ की गई अमर्यादित हरकत पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि यह घटना बेहद शर्मनाक है और इसमें न्याय जरूर होगा। कोर्ट ने फिलहाल आरोपी इंस्पेक्टर को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया और अगली सुनवाई की तारीख 14 जुलाई तय की है।

क्या है मामला?

यह मामला उस घटना से जुड़ा है जिसमें भोपाल के डायल-100 कंट्रोल रूम में पदस्थ इंस्पेक्टर राजेश कुमार त्रिपाठी पर आरोप लगा कि उन्होंने पुरुष कर्मचारियों के शराब पीने की जांच करने के लिए एक महिला पुलिस कर्मी को ‘टेस्टिंग टूल’ की तरह इस्तेमाल किया। आरोप के मुताबिक उन्होंने महिला को खड़ा कर सभी पुरुष कर्मचारियों को उसके चेहरे पर फूंक मारने को कहा ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन कर्मचारी नशे में है। इस पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया था।

कोर्ट ने कहा- तरीका बेहद शर्मनाक

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि उन्होंने घटना का वीडियो देखा है और यह तरीका पूरी तरह से अस्वीकार्य और अपमानजनक है। अदालत ने प्रसिद्ध साहित्यकार विलियम शेक्सपियर की पंक्तियों का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में न्याय जरूर होगा। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जो अधिकारी अपने ही कार्यालय में महिला कर्मचारियों के सम्मान की रक्षा नहीं कर सकता, उससे समाज की महिलाओं की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है। अदालत के इस रुख से साफ है कि मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।

बर्खास्तगी के खिलाफ इंस्पेक्टर ने दी थी चुनौती

घटना 30-31 अगस्त 2025 की रात की है। वीडियो सामने आने के बाद 8 सितंबर 2025 को राज्य सरकार ने इंस्पेक्टर राजेश कुमार त्रिपाठी को बर्खास्त कर दिया था। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। फरवरी 2026 में सिंगल बेंच ने बिना विभागीय जांच के बर्खास्तगी को अनुचित मानते हुए आदेश को रद्द कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पहले ही सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी थी।

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सरकार और बचाव पक्ष के तर्कों पर हुई बहस

बुधवार को हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी उपस्थित हुए। वहीं इंस्पेक्टर के वकील ने अदालत से राहत देने की मांग की और कहा कि बिना विभागीय जांच के इतनी सख्त कार्रवाई उचित नहीं है। हालांकि कोर्ट इस दलील से संतुष्ट नहीं दिखा। बेंच ने साफ कहा कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई होना जरूरी है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा बनी रहे।

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14 जुलाई को अगली सुनवाई 

पूरे मामले पर गंभीर रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने फिलहाल इंस्पेक्टर को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी जिसमें आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। यह मामला सिर्फ एक अनुशासनहीनता का नहीं बल्कि कार्यस्थल पर महिला सम्मान और गरिमा से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है। कोर्ट की सख्त टिप्पणियों से यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले समय में इस तरह के मामलों में और भी कड़े मानदंड तय हो सकते हैं।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

मास कम्युनिकेशन में Ph.D और M.Phil पूर्ण की है तथा टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते ...Read More

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