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यमन में हूती विद्रोहियों की बड़ी साजिश, चीन से आए पुर्जों से बना रहे एडवांस बैलिस्टिक मिसाइल, सऊदी-इजराइल निशाने पर  

Houthi Missile China Parts: Wall Street Journal की रिपोर्ट में खुलासा, ईरान समर्थित हूती चीन से मंगाए पुर्जों से बना रहे Kheibar Shekan जैसी 2000 KM रेंज वाली मिसाइल, Bloomberg जांच में सप्लाई नेटवर्क का पता चला, दो खेप पकड़ी गईं।
यमन में हूती विद्रोहियों की बड़ी साजिश, चीन से आए पुर्जों से बना रहे एडवांस बैलिस्टिक मिसाइल, सऊदी-इजराइल निशाने पर   
हूती चीन से मंगाए पुर्जों से बना रहे मिसाइल।

वॉशिंगटन। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोही चीन से प्राप्त पुर्जों का इस्तेमाल करके उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलें बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे इस समूह को सऊदी अरब और इजराइल में कहीं भी निशाना बनाने की क्षमता मिल सकती है। यह खुलासा  'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट से हुआ है। ब्लूमबर्ग की एक अलग जांच में एक बड़े सप्लाई नेटवर्क का पता चला है, जिसके जरिए मिसाइल के पुर्जे, ड्रोन के हिस्से और औद्योगिक मशीनें यमन पहुंचाई जा रही हैं। ये बातें बताती हैं कि हूती अब पूरी तरह से ईरान से तैयार हथियार प्रणालियों पर निर्भर रहने के बजाय, खुद अपने हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि, वे अपने दम पर कितनी उन्नत मिसाइलें बना सकते हैं, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है।

चीन से आई खेप से मिसाइल बनाने के इरादों का खुलासा 

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट 'कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च' (CAR) के निष्कर्षों पर आधारित है। CAR संघर्ष वाले इलाकों में हथियारों और उनकी सप्लाई चेन पर नज़र रखता है। यह  बताती है कि पिछले साल यमन के अधिकारियों ने दो खेपें पकड़ी थीं। इनमें ऐसे पुर्जे थे जिनका इस्तेमाल ईरान की 'खैबर शेकन' (Kheibar Shekan) सटीक निशाना लगाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल जैसी मिसाइल बनाने में किया जा सकता है। इस खेप में मिसाइल मोटर और एयरफ्रेम के लिए विशेष रूप से बनाए गए धातु के पुर्जे, स्टेबलाइजिंग फिन (स्थिर रखने वाले पंख) और सॉलिड-प्रोपेलेंट रॉकेट मोटर के हिस्से शामिल थे। जांचकर्ताओं को ऐसी सामग्री भी मिली, जिसका इस्तेमाल 'हीट शील्ड' बनाने में होता है। ये हीट शील्ड मिसाइलों को वायुमंडल में उड़ान के दौरान सुरक्षित रखती हैं। इनमें से कुछ पुर्जे खास तौर पर मिसाइल बनाने के लिए डिजाइन किए गए थे, जबकि कुछ अन्य पुर्जों का इस्तेमाल आम नागरिक कार्यों में भी हो सकता है।

2000 किलोमीटर है मिसाइल की रेंज

'खैबर शेकन' मिसाइल को ईरान ने पहली बार 2022 में पेश किया था। इसकी मारक क्षमता लगभग 2,000 किलोमीटर बताई जाती है। इसका मतलब है कि सऊदी अरब और इजराइल का पूरा इलाका इसकी पहुंच में आ सकता है। इसकी पैंतरेबाजी की क्षमता के कारण एयर-डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना और भी मुश्किल हो जाए। CAR के सीनियर एनालिस्ट फैबियन हिन्ज ने WSJ को बताया कि चीनी पुर्जों के मिलने से संकेत मिलता है कि हूती विद्रोही या तो पहले से ही मिसाइलें बना रहे हैं या फिर ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं। फैबियन हिन्ज ने चेतावनी दी कि हथियारों की उनकी सीक्रेट फैसेलिटीज के कारण यह पता लगाना मुश्किल है कि उत्पादन किस हद तक आगे बढ़ चुका है। 

एक व्यापक सप्लाई नेटवर्क

ब्लूमबर्ग की 23 सितंबर की एक जांच में यमन के दक्षिणी बंदरगाह अदन में जब्त किए गए चार शिपिंग कंटेनरों की पड़ताल की गई। यह खेप चीन से भेजी गई थी और इसे होदेइदाह ले जाया जा रहा था। यह लाल सागर पर स्थित एक बंदरगाह है और हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में है। हथियार विशेषज्ञों को वहां मिसाइल के संदिग्ध पुर्जे, ड्रोन के हिस्से, कंट्रोल सिस्टम, लॉन्च करने के उपकरण, कंप्यूटर से चलने वाली मशीनें, इंजन और सुरंग बनाने के उपकरण मिले। इस सामग्री में पीछे के हिस्से (फिन्स) शामिल थे, जो ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाले पुर्जों जैसे दिखते थे। इसके अलावा, इसमें फेनोलिक रेजिन भी था जिसका इस्तेमाल मिसाइल के लिए गर्मी सहने वाली शील्ड बनाने में किया जा सकता है। अदन के जमीनी, समुद्री और हवाई बंदरगाह विभाग के महानिदेशक फवाजा अल-बसेसी ने ब्लूमबर्ग को बताया कि ऐसा लगता है कि इन पुर्जों को चार कंटेनरों में बांटकर रखा गया था, ताकि इनका पता लगाना मुश्किल हो जाए। उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को लिखे एक नोट में बताया कि उन्हें तीन कंटेनरों में एक पूरी मिसाइल का ढांचा बिखरा हुआ मिला।

जांच में कमर्शियल नेटवर्क का भी पता चला

इस संबंध में हुई जांच में एक कर्मशियल नेटवर्क का भी पता चला है जो चीनी निर्यातकों को हूती-नियंत्रित इलाकों में भेजे जा रहे माल से जोड़ता है। ब्लूमबर्ग द्वारा देखे गए शिपिंग रिकॉर्ड से पता चलता है कि 41 'बिल ऑफ लैडिंग' (माल के लदान संबंधी दस्तावेजों) के तहत दर्जनों कंटेनर भेजे गए थे। इनमें से 25 मामलों में शिपिंग दस्तावेजों में दर्ज यमनी आयातक का नाम उस समय बदल दिया गया, जब माल रास्ते में था। अदन के अधिकारियों का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि इन शिपमेंट के पीछे मौजूद हूती-समर्थित कंपनियों को छिपाया जा सके। 

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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