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मजबूत दिखने वाली इमारत अचानक क्यों गिरती है? जानें ढहने से पहले मिलने वाले खतरनाक संकेत

इमारतें अचानक क्यों गिर जाती हैं? जानें कमजोर नींव, मिट्टी का धंसना, खराब निर्माण सामग्री, जंग, ओवरलोडिंग और रखरखाव की कमी कैसे भवन को कमजोर बनाती है। साथ ही जानें इमारत गिरने से पहले मिलने वाले खतरनाक संकेत, जैसे चौड़ी दरारें, झुकी दीवारें, कंक्रीट झड़ना और पानी का रिसाव।
मजबूत दिखने वाली इमारत अचानक क्यों गिरती है? जानें ढहने से पहले मिलने वाले खतरनाक संकेत

दिल्ली में इमारत गिरने की घटनाओं के बाद एक बार फिर भवनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। बड़ी और मजबूत दिखने वाली इमारत आखिर कुछ ही सेकंड में कैसे ढह जाती है? विशेषज्ञों और रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार, किसी इमारत का गिरना आमतौर पर अचानक शुरू होने वाली समस्या नहीं होती। इसके पीछे कई सालों से चली आ रही तकनीकी खामियां, खराब निर्माण और रखरखाव में लापरवाही जिम्मेदार हो सकती है। इमारत गिरने से पहले कई बार खतरे के संकेत भी देती है। अगर समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए और विशेषज्ञों से जांच कराई जाए, तो बड़े हादसे से बचा जा सकता है।

इमारत गिरने से पहले दिख सकते हैं ये खतरनाक संकेत

पुरानी या कमजोर हो रही इमारतों में कई बदलाव दिखाई देने लगते हैं। इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

  • कॉलम और बीम में चौड़ी या बढ़ती दरारें दिखाई देना।
  • दीवारों का झुकना या बाहर की तरफ फूलना।
  • कंक्रीट का टूटकर झड़ना।
  • प्लास्टर का लगातार गिरना।
  • कंक्रीट के अंदर लगे सरिए का दिखाई देना।
  • दरवाजे और खिड़कियों का खुलने-बंद होने में फंसना।
  • फर्श का धंसना या तिरछा होना।
  • छत से लगातार पानी का रिसाव होना।
  • दीवारों और छत में लंबे समय तक सीलन रहना।
  • ऐसे संकेत दिखाई देने पर इमारत की तुरंत स्ट्रक्चरल जांच करानी चाहिए।

कमजोर नींव बन सकती है सबसे बड़ा खतरा

किसी भी इमारत की मजबूती उसकी नींव और जमीन पर निर्भर करती है। नींव का काम पूरी इमारत का भार जमीन तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाना होता है। इसके लिए निर्माण से पहले मिट्टी की जांच, जमीन की भार सहन करने की क्षमता, भूजल स्तर और इमारत के संभावित वजन का आकलन जरूरी होता है। अगर जमीन की क्षमता कम हो और उस पर जरूरत से ज्यादा भारी इमारत बना दी जाए, तो जमीन धीरे-धीरे धंस सकती है। इससे नींव पर दबाव बढ़ता है और दीवारों, बीम व कॉलम में दरारें आने लगती हैं।

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मिट्टी का सही कंपैक्शन न होना भी बड़ी वजह

निर्माण से पहले मिट्टी को मजबूत और दबाना जरूरी होता है, जिसे कंपैक्शन कहा जाता है। अगर मिट्टी का सही तरीके से कंपैक्शन नहीं किया जाता, तो इमारत का भार पड़ने पर जमीन असमान रूप से बैठ सकती है। इससे नींव झुक सकती है और इमारत का भार बराबर तरीके से नहीं बंट पाता। नतीजतन दीवारों, बीम और कॉलम पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगता है और ढांचा कमजोर हो सकता है।

खराब निर्माण सामग्री बढ़ाती है खतरा

घटिया ईंट, सीमेंट, सरिया और अन्य निर्माण सामग्री भी इमारत के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। शुरुआत में भवन मजबूत दिखाई दे सकता है, लेकिन समय के साथ खराब सामग्री अपनी ताकत खोने लगती है। इसके अलावा प्रशिक्षित इंजीनियर और कुशल मजदूरों की कमी भी समस्या पैदा कर सकती है। अगर लोड कैलकुलेशन, फाउंडेशन डिजाइन, ड्रेनेज सिस्टम और निर्माण मानकों का सही पालन नहीं किया जाता, तो इमारत की सुरक्षा प्रभावित होती है।

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ज्यादा भार और अतिरिक्त मंजिलें भी बन सकती हैं कारण

हर इमारत को एक तय क्षमता के अनुसार डिजाइन किया जाता है। अगर बाद में बिना सही इंजीनियरिंग जांच के अतिरिक्त मंजिल बना दी जाए या जरूरत से ज्यादा भारी सामान रखा जाए, तो निचले हिस्सों पर दबाव बढ़ सकता है। पुरानी इमारतों में अतिरिक्त मंजिल का निर्माण और भी खतरनाक हो सकता है। इससे कॉलम, बीम और नींव पर उनकी क्षमता से अधिक भार पड़ सकता है।

कॉलम फेल होने पर शुरू हो सकता है ‘चेन रिएक्शन’

कॉलम इमारत का मुख्य भार संभालते हैं, जबकि बीम इस भार को अलग-अलग हिस्सों में बांटते हैं। अगर कोई महत्वपूर्ण कॉलम खराब निर्माण, जंग, ज्यादा भार या किसी तकनीकी कमी के कारण फेल हो जाता है, तो उसका भार आसपास के कॉलम पर पहुंच जाता है। अगर दूसरे कॉलम भी अचानक बढ़ा हुआ भार नहीं संभाल पाते, तो एक के बाद एक हिस्से फेल होने लगते हैं। इसे प्रोग्रेसिव कॉलेप्स कहा जाता है। इसी वजह से कई बार पूरी इमारत कुछ ही सेकंड में ढह जाती है।

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क्या होता है ‘पैनकेक कॉलेप्स’?

प्रोग्रेसिव कॉलेप्स की स्थिति में एक मंजिल नीचे वाली मंजिल पर गिरती चली जाती है। इस तरह पूरी इमारत परत दर परत ढह सकती है। इसे आम भाषा में पैनकेक कॉलेप्स कहा जाता है। कई मंजिला इमारतों में इस तरह का ढहना बेहद खतरनाक होता है, क्योंकि मलबे में बड़े हिस्से एक-दूसरे के ऊपर जमा हो जाते हैं।

जंग और पानी का रिसाव भी कमजोर करते हैं ढांचा

कंक्रीट के अंदर मजबूती के लिए स्टील के सरिए लगाए जाते हैं। लंबे समय तक पानी और नमी के संपर्क में रहने पर कंक्रीट के अंदर मौजूद स्टील तक पानी पहुंच सकता है। इससे सरिए में जंग लगने लगती है। जंग लगने के बाद स्टील फैल सकता है, जिससे आसपास के कंक्रीट में दरारें पड़ सकती हैं। समय के साथ कॉलम, बीम और स्लैब कमजोर होते जाते हैं। इसलिए पानी का लगातार रिसाव, पाइपलाइन लीकेज और सीलन को मामूली समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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बारिश और बाढ़ से भी कमजोर हो सकती है नींव

भारी बारिश, बाढ़ या जमीन के नीचे पाइपलाइन से लगातार पानी रिसने पर मिट्टी का कटाव हो सकता है। इससे नींव को मिलने वाला सहारा कमजोर पड़ सकता है। अगर जमीन का कुछ हिस्सा बह जाए या धंस जाए, तो नींव असमान हो सकती है। इसके बाद इमारत के अलग-अलग हिस्सों पर असंतुलित दबाव पड़ने लगता है।

रखरखाव की कमी बन सकती है हादसे की वजह

कई इमारतें दशकों तक बिना बड़े मरम्मत कार्य के इस्तेमाल होती रहती हैं। छत से पानी रिसना, पाइपलाइन लीकेज, सीलन, टूटता प्लास्टर और कंक्रीट का झड़ना जैसी समस्याएं धीरे-धीरे ढांचे को कमजोर करती रहती हैं। समय-समय पर स्ट्रक्चरल जांच और जरूरी मरम्मत न होने पर छोटी समस्या भी गंभीर खतरे में बदल सकती है।

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भूकंप भी बन सकता है संरचनात्मक विफलता का कारण

भूकंप के दौरान इमारत पर तेज क्षैतिज और गतिशील बल पड़ते हैं। अगर भवन का डिजाइन भूकंपरोधी मानकों के अनुसार नहीं है या उसमें पर्याप्त मजबूती नहीं दी गई है, तो कॉलम, बीम और दीवारों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

इमारत की सुरक्षा के लिए क्या है जरूरी?

विशेषज्ञों के अनुसार, इमारत की सुरक्षा के लिए सही मिट्टी जांच, मजबूत नींव, गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री, सही इंजीनियरिंग डिजाइन और नियमित रखरखाव बेहद जरूरी है। खासकर पुरानी इमारतों में दरार, झुकी दीवार, सरिया दिखाई देना या लगातार पानी रिसने जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए। ध्यान रखें, इमारत अक्सर एक दिन में कमजोर नहीं होती। छोटी-छोटी तकनीकी कमियां और लंबे समय तक की गई लापरवाही मिलकर उसे धीरे-धीरे खतरनाक बना सकती हैं।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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