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बीमारी के लिए राज कपूर से लिया उधार वापस करने गए तो उन्होंने लिखवाए गीत

गीतकार स्व. शैलेंद्र के बेटे दिनेश शैलेंद्र ने आईएम भोपाल से साझा किए पिता से जुड़े किस्से
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बीमारी के लिए राज कपूर से लिया उधार वापस करने गए तो उन्होंने लिखवाए गीत

अनुज मीणा- आज फिर जीने की तमन्ना है..., किसी की मुस्कुराहटों पर पे हो निसार..., पान खाये सैयां हमारो.., चलत मुसाफिर मोह लियो रे... जैसे गाने लिखने वाले गीतकार स्व. शैलेंद्र पर बायोपिक फिल्म बनाई जाएगी। फिलहाल इस फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम किया जा रहा है। यह बात स्व. शैलेंद्र के पुत्र, फिल्म राइटर व डायरेक्टर दिनेश शैलेंद्र ने गुरुवार को आईएम भोपाल से चर्चा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि इस फिल्म की स्क्रिप्ट वह खुद ही लिख रहे हैं। इस फिल्म में बाबा (शैलेंद्र) की जिंदगी से जुड़े कई ऐसे पहलुओं को भी सामने लाया जाएगा, जिनके बारे में लोगों को पता नहीं है। बाबा की लिखी हुई करीब 12 डायरियां हैं, जिनमें उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जिनके बारे में मुझे भी पता नहीं था।

दिनेश शैलेंद्र स्वरांजलि संस्था द्वारा शहीद भवन में आयोजित ‘गीतकार की कलम से’ कार्यक्रम में 14 जून को उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम शाम 6 बजे से शुरू होगा, जिसमें शहर के गायक प्रस्तुति देंगे और कला, साहित्य एवं सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी रखने वाले विशिष्ट व्यक्तियों को ‘मध्य प्रदेश गौरव सम्मान’ दिया जाएगा।

‘जलता है पंजाब’ कविता सुनकर राज कपूर ने दिया था ऑफर

दिनेश शैलेंद्र ने बताया कि उनके पिता का जन्म रावलपिंडी में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उन्हें शुरू से कविताएं लिखने का शौक था। वह भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय में एक कवि सम्मेलन में ‘जलता है पंजाब’ सुना रहे थे। इसे सुनकर राज कपूर ने उन्हें अपनी फिल्मों में गीत लिखने को कहा, लेकिन बाबा ने उनकी पेशकश ठुकरा दी। कुछ समय बाद मां के बीमार होने पर वह राज कपूर के पास पहुंचे और उनसे 500 रुपए उधार लिए। जब वह रुपए वापस करने पहुंचे तो राज कपूर ने उन्हें वापस लेने से मना कर दिया और उनके बदले अपनी फिल्म ‘बरसात’ के लिए गाने लिखने को कहा।

अंतिम संस्कार पर पता चली उनकी पॉपुलरिटी

बाबा (शैलेंद्र) ने बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं... गीत के बोल में 4-5 बार बदलाव किए थे। उन्होंने बताया कि जब वो 10 साल के थे तभी उनके पिता गुजर गए थे। जब बड़े-बड़े सितारे उनके अंतिम संस्कार के दिन आए तब हमें अहसास हुआ की वो आम इंसान नहीं थे।

आज के गानों में समझ नहीं आते बोल

आज के समय के गानों के बारे में दिनेश शैलेंद्र ने कहा कि जिस तरह के गाने आज लिखे जा रहे हैं उसके लिए सबसे अधिक इन गानों को सुनने वाले श्रोता जिम्मेदार हैं। इसके साथ ही गानों को लिखने और कंपोज करने वाले भी जिम्मेदार हैं। आज के गानों में म्यूजिक अधिक होता है और उनके बोल समझ ही नहीं आते हैं। आज के समय में गीतकार को दबाकर रखा गया है।

People's Reporter
By People's Reporter

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