TMC में सियासी भूचाल : बगावत से घिरीं ममता बनर्जी, अब बिधानगर की मेयर ने दिया इस्तीफा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर कथित तौर पर बड़ा सियासी संकट खड़ा हो गया है। पार्टी के अंदर बढ़ते असंतोष और नेताओं की नाराजगी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। हाल के घटनाक्रमों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, जहां पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के फैसलों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
निजी कारणों का दिया हवाला
ताजा घटनाक्रम में ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली नेता कृष्णा चक्रवर्ती ने बिधाननगर के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने फैसले के पीछे निजी कारणों का हवाला दिया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में उनके इस्तीफे को पार्टी के भीतर चल रही उथल-पुथल से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
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फिरहाद हकीम के इस्तीफे ने बढ़ाई थी अटकलें
कृष्णा चक्रवर्ती से पहले कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने भी अपने पद से इस्तीफा दिया था। वर्ष 2018 से इस पद पर कार्यरत रहे हकीम का इस्तीफा राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लगातार हो रहे इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऋतब्रत बनर्जी बने बगावत का चेहरा
पार्टी के भीतर उभरे विवाद के केंद्र में ऋतब्रत बनर्जी का नाम सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर हुए विवाद और कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आरोपों के बाद पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और ऋतब्रत बनर्जी कथित बागी गुट के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे।
दो-तिहाई समर्थन के दावे से बदला सियासी समीकरण
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि ऋतब्रत बनर्जी ने बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया है। यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो इससे राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इस घटनाक्रम ने तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व क्षमता पर भी बहस छेड़ दी है।
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अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर उठे सवाल
पार्टी के भीतर असंतोष की एक वजह अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को भी बताया जा रहा है। कुछ नेताओं का कहना है कि संगठन में निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर कई विधायक असहज महसूस कर रहे हैं। हालांकि ममता बनर्जी के नेतृत्व को लेकर खुलकर सवाल कम ही उठाए गए हैं, लेकिन पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
बंगाल की राजनीति पर सबकी नजर
लगातार बदलते घटनाक्रमों के बीच अब सभी की नजर तृणमूल कांग्रेस के अगले कदम पर टिकी हुई है। पार्टी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है और संगठन को किस तरह एकजुट रखने की कोशिश करता है, यह आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
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