
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोठरी कलां स्थित VIT यूनिवर्सिटी कैंपस में फैले टाइफाइड की वजह से फिर सुर्खियों में है। पिछले 10 दिनों में हॉस्टल में रहने वाले 250 से ज्यादा छात्र तेज बुखार, उल्टी और शरीर दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। अचानक इतनी बड़ी संख्या में बीमार छात्रों के मिलने से पूरे परिसर में तनाव का माहौल बन गया है। कई छात्रों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि कुछ का इलाज कैंपस के अंदर ही चल रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब इस यूनिवर्सिटी में हालात बिगड़े हों। नवंबर 2025 में भी यहां दूषित पानी की वजह से सैकड़ों छात्र बीमार पड़ गए थे। उस समय छात्रों ने प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे।
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विवाद इतना बढ़ा कि एक वार्डन द्वारा कथित तौर पर एक छात्र के साथ मारपीट की घटना सामने आई। इसके बाद छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और कैंपस में हिंसक प्रदर्शन हुआ। कई बसों में आग लगा दी गई और कैंपस को नुकसान पहुंचाया गया।
अब जब फिर से बड़ी संख्या में छात्र बीमार हो रहे हैं, तो यूनिवर्सिटी प्रबंधन मामले को अलग तरीके से पेश कर रहा है। दावा किया है कि यह टाइफाइड नहीं है, बल्कि केवल मौसमी वायरल बुखार के 80 मामले हैं। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और कैंपस में कोई गंभीर संक्रमण नहीं फैला है।
हालांकि मेडिकल जांच की रिपोर्ट ने दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चिरायु मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती 57 सैंपल में से 23 छात्रों में साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया पाया गया है, जो टाइफाइड का कारण होता है।
डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमण फैला हुआ है और केवल वायरल बुखार की बात सही नहीं लगती। अभी 34 अन्य सैंपल की रिपोर्ट आनी बाकी है, जिससे संक्रमित छात्रों की संख्या और बढ़ सकती है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि एक छात्र को ICU में भर्ती करना पड़ा है। उसे Life Support System पर रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय पर इलाज न मिलता, तो स्थिति और बिगड़ सकती थी।
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एक्सपर्ट का मानना है कि एक ही संस्थान में इतनी बड़ी संख्या में टाइफाइड के केस मिलना सामान्य नहीं है। यह सीधे तौर पर दूषित पानी या खराब भोजन की ओर इशारा करता है। यह एक क्लस्टर इंफेक्शन का मामला हो सकता है। आशंका है कि हॉस्टल की मेस में इस्तेमाल होने वाला पानी या भोजन सुरक्षित नहीं था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने 2025 बैच के छात्रों को अस्थायी रूप से घर भेज दिया है। साथ ही यूनिवर्सिटी प्रबंधन से बातचीत कर कई निर्देश दिए हैं। इनमें पानी की सप्लाई की थर्ड पार्टी जांच, मेस की साफ-सफाई की जांच और मेस कर्मचारियों का मेडिकल टेस्ट का निर्देश दिए। कॉलेज का पुराना इतिहास फिर बना चिंता का कारण बन गया है।
नवंबर 2025 की घटनाओं को देखते हुए छात्रों में पहले से ही नाराजगी थी। उस समय भी पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठे थे और बड़ा बवाल हुआ था। फिलहाल मेडिकल टीमें लगातार जांच कर रही हैं और बाकी सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार है।