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MP News : कोर्ट ने कहा 14 साल से नहीं साथ, रिश्ता बचने की अब संभावना नहीं, लव मैरिज करने वाले दंपति का हुआ तलाक

भोपाल फैमिली कोर्ट में एक ऐसा मामला आया जिसमें लव मैरिज करने वाले पति-पत्नी ने 14 साल अलग रहने के बाद तलाक का रास्ता चुना। कोर्ट की समझाइश कि अब पुनर्मिलन की संभावना कम है पर पति तलाक के लिए राजी हुआ।
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कोर्ट ने कहा 14 साल से नहीं साथ, रिश्ता बचने की अब संभावना नहीं, लव मैरिज करने वाले दंपति का हुआ तलाक

पल्लवी वाघेला, भोपाल। 15 साल पहले लव मैरिज और 14 साल की कानूनी लड़ाई के बाद आखिर दंपति ने आपसी सहमति से तलाक के फैसले पर मोहर लगा दी। मामला भोपाल फैमिली कोर्ट का है, जहां दंपति को समझाया गया कि 14 साल में सुलह की एक कोशिश तक नहीं हुई तो ऐसे में पुनर्मिलन की संभावना न के बराबर हो जाती है। यह विवाह केवल नाम मात्र का है। इसके बाद आखिर पति सहमति से तलाक को राजी हुआ। बता दें, मामले में पत्नी सालों से तलाक की मांग कर रही है, लेकिन पति तलाक देने राजी नहीं था। अब 14 साल बाद तलाक की डिक्री जारी करने के निर्देश कोर्ट ने दिए हैं।

परिवार की मर्जी के खिलाफ किया था प्रेम विवाह

दंपति ने करीब 15 साल पहले प्रेम विवाह किया था। दोनों परिवार शादी को राजी नहीं थे। ऐसे में दंपति ने छिपकर आर्य समाज मंदिर से शादी की। शादी के दो दिन बाद जेठ के समझाने पर पति का परिवार मान गया और दंपति का गृह प्रवेश हुआ। महिला ने मामले में बताया कि 20-22 दिन अच्छे से निकले। इसके बाद पति ने कहा कि उसके परिवार ने अपना तो लिया है, लेकिन उसे जो दहेज मिलना चाहिए वह तो जायज है।

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दहेज के लिए दबाव बनाने पर बिगड़ी बात

पति और ससुराल पक्ष ने दबाव बनाया कि वो घर जाए और पैसा लेकर आए। मना करने पर विवाद बढ़ा और पति ने कहा कि यदि मायके से पैसा नहीं ला सकती तो अपने पीएफ से पैसा निकालकर दे दो या जो जमीन तुम्हारे नाम है, उसे मेरे नाम कर दो। महिला के मुताबिक यह उसके लिए किसी धोखे से कम नहीं था। इसलिए उसने घर छोड़ने का निर्णय लिया और छह माह के भीतर ही घर से निकल आई और कोर्ट में तलाक के लिए आवेदन लगाया।

तलाक नहीं देने की जिद पर अड़ा रहा पति

मामले में पति का कहना था कि पत्नी, उसके परिवार के साथ रहना नहीं चाहती थी और उससे भरण-पोषण के रूप में मोटी रकम ऐंठने के लिए शादी के बाद आरोप लगा रही है। इस जिद के चलते पति ने तलाक से साफ इंकार कर दिया। मामले में पति तलाक न देने और पत्नी को घर न लाने की जिद पर अड़ा रहा। ऐसे में 14 साल बाद इस केस का निराकरण हो पाया।

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दुखद है स्थिति, ईगो के चलते नहीं देते तलाक 

'बहुत से ऐसे मामले आते हैं जहां दंपति में से कोई एक अपने ईगो या गुस्से के चलते इस जिद पर अड़ जाता है कि न तलाक लेना है और न ही साथ रहना है। इसमें दोनों का पैसा और समय खराब होता है। जरूरी है कि दंपति इस बात को समझे और यदि रहना किसी तरह भी संभव न हो तो आपसी सहमति से दोनों के हित का निर्णय ले।'

शैल अवस्थी, काउंसलर

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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