Peoples Update Special :अयोध्या चढ़ावा चोरी मामले से विहिप केमंदिर मुक्ति अभियान पर कोई असर नहीं

राजीव सोनी, भोपाल। विश्व हिंदू परिषद, मध्यप्रदेश सहित देश के सभी राज्यों में हिंदू मठ-मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने की मुहिम फिर तेज करेगी। परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार इन दिनों देश भर के संतों के मिलकर इस मुद्दे पर विचार मंथन करने में जुटे हैं। मप्र में ही 40 हजार से अधिक ऐसे मंदिर हैं जो पहले रियासतों द्वारा संचालित थे जिन्हें शासन को सौंपा गया है।
अयोध्या मामले का कोई प्रभाव नहीं
अयोध्या में हुए चढ़ावा चोरी मामले के चलते विहिप के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कोई ढिलाई अथवा बदलाव नहीं हुआ। विहिप का कहना है कि चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट निगरानी कर रहा है। एसआईटी जांच की समग्र रिपोर्ट अन्य मंदिरों के मैनेजमेंट सिस्टम को भी मार्गदर्शी साबित होगी। सभी राज्यों में राज्यपाल और विधायकों को भी इस बारे में ज्ञापन सौंपे गए हैं। मप्र में ही बड़े-छोटे मंदिरों की संख्या हजारों में हैं।
विहिप ने डेढ साल पहले शुरू किया था अभियान
विहिप ने डेढ़ साल पहले हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए विजयवाड़ा से राष्ट्रीय अभियान की शुरूआत करने के बाद अन्य सभी प्रदेश के राज्यपालों को ज्ञापन सौंपे हैं। सभी राज्यों में मौजूद शासन के अधीन मंदिरों की सूची बनाने का आग्रह किया गया है। इस मुद्दे पर विहिप का कहना है कि मस्जिद, गिरजाघर अथवा गुरुद्वारा जैसे किसी भी धर्मस्थल पर सरकार का नियंत्रण नहीं है। इन पूजा स्थलों की देखरेख इन्हीं समाज के लोग करते हैं। लेकिन हिंदुओं के मंदिर शासन के अधीन क्यों? विहिप ने यह मुद्दा भी उठाया है कि मंदिरों से प्राप्त आमदनी हिंदू समाज पर ही खर्च हो।
ज्यादातर मंदिर रियासतों के
धर्मस्व विभाग के सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा ग्वालियर-चंबल, मालवा-निमाड़ और विंध्य अंचल में सर्वाधिक मंदिर हैं। पहले इन्हें रियासतों द्वारा संचालित किया जाता था। अब इनका प्रबंधन ट्रस्ट के माध्यम से प्रशासन के अधीन है। इन मंदिरों के साथ हजारों करोड़ रुपए की प्रापर्टी भी है।
‘अयोध्या मामले से हमारी मुहिम पर असर नहीं’
सीधी बात : विनोद बंसल, राष्ट्रीय प्रवक्ता विश्व हिंदू परिषद दिल्ली
सवाल: अयोध्या चढ़ावा चोरी के बाद क्या विहिप के इस अभियान पर कोई असर पड़ा?
जवाब: हमारे अभियान पर कोई असर नहीं पड़ा। अयोध्या श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच एसआईटी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट निगरानी कर रहा है। इसकी एडवायजरी से काफी कुछ सीखने को मिलेगा।
सवाल: राज्यों में किस तरह की मुहिम चला रहे हैं?
जवाब: हमने सभी राज्यों में राज्यपालों को ज्ञापन सौंपे हैं। सरकारों से मंदिरों की सूची बनाने का आग्रह भी किया है।
सवाल: विहिप किस तरह की व्यवस्था की मांग कर रही है?
जवाब: हमारा मानना है कि सरकार का काम मंदिरों की व्यवस्था देखना नहीं है। गुरुद्वारा, गिरजाघर और मस्जिद का संचालन जिस तरह उन्हीं का समाज करता है वैसे ही मठ-मंदिरों का प्रबंधन भी होगा।
ये हैं मप्र के प्रमुख मंदिर
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, ओंकारेश्वर, मां शारदा मंदिर मैहर, खजराना गणेश इंदौर, बिजासन माता मंदिर सलकनपुर, चौसठ योगिनी मंदिर, राम राजा मंदिर ओरछा,काल भैरव मंदिर उज्जैन, हरिसिद्धि देवी मंदिर उज्जैन, चामुंडा टेकरी देवास, दादाजी धूनी वाले खंडवा, पशुपतिनाथ मंदिर मंदसौर एवं चिंतामन गणेश उज्जैन। इनके अलावा भोजपुर शिव मंदिर (भोजेश्वर मंदिर) और कंदरिया महादेव व मातंगेश्वर मंदिर खजुराहो भी हैं।
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संविधान का उल्लंघन
मप्र सहित अन्य राज्यों के बड़े तीर्थ स्थल और मंदिरों पर शासन के नियंत्रण को विहिप ने संविधान का उल्लंघन बताया है। संविधान में सभी के साथ बराबरी का व्यवहार की बात कही गई है लेकिन सरकारें गैर हिंदू धर्म स्थलों के साथ अलग व्यवहार कर रही हैं।












