इजरायल में चुनाव के बाद भी सत्ता का सस्पेंस बरकरार, 53 सीटों पर अटके नेतन्याहू, अब कैसे बनेगी सरकार?

Israel Election Results 2026: इजरायल में चुनाव खत्म होने के बाद भी नई सरकार को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। शुरुआती नतीजों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन सबसे आगे दिखाई दे रहा है, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत उसके पास नहीं है। दूसरी तरफ विपक्षी नेता गादी आइजनकोट का गठबंधन भी बहुमत के आंकड़े से पीछे है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इजरायल का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा? क्या नेतन्याहू दोबारा सत्ता में लौटेंगे या फिर विपक्ष सरकार बनाएगा? दिलचस्प बात यह है कि बहुमत नहीं मिलने के बावजूद नेतन्याहू अगले साल तक प्रधानमंत्री पद पर बने रह सकते हैं।
इजरायल चुनाव में किसे मिली कितनी सीटें?
दिए गए शुरुआती चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, इजरायल की 120 सीटों वाली संसद में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को करीब 48 सीटें मिल सकती हैं। अरब पार्टियों के खाते में 19 सीटें जाने की संभावना है। इजरायल में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में नेतन्याहू को बहुमत तक पहुंचने के लिए 8 और सांसदों की जरूरत होगी। फिलहाल किसी भी गठबंधन के पास अपने दम पर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं हैं।
बहुमत नहीं मिला तो क्या चली जाएगी नेतन्याहू की कुर्सी?
इजरायल में चुनाव के बाद प्रधानमंत्री को तुरंत पद नहीं छोड़ना पड़ता। देश के नियमों के मुताबिक, जब तक नई सरकार नहीं बन जाती, तब तक मौजूदा प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट कामकाज संभालते रहते हैं। इसे कार्यवाहक सरकार कहा जाता है। इसका मतलब है कि अगर नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत नहीं जुटा पाता, तब भी वह प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि नई सरकार बनाने में कितना समय लगता है।
इजरायल में कैसे बनती है नई सरकार?
इजरायल में चुनाव के बाद राष्ट्रपति सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं से बातचीत करते हैं। इसके बाद वह उस सांसद को सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं, जिसके बहुमत जुटाने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। सरकार बनाने के लिए शुरुआत में 28 दिन का समय मिलता है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति 14 दिन का अतिरिक्त समय भी दे सकते हैं। इस दौरान संबंधित नेता दूसरी पार्टियों से बातचीत करके गठबंधन बनाने की कोशिश करता है। अगर वह बहुमत नहीं जुटा पाता, तो राष्ट्रपति किसी दूसरे नेता को मौका दे सकते हैं।
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दूसरी पार्टियों के हाथ में सत्ता की चाबी
इजरायल की राजनीति में गठबंधन की बड़ी भूमिका होती है। यहां किसी एक पार्टी को अकेले बहुमत मिलना आसान नहीं होता। इसलिए छोटी पार्टियां भी सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। मौजूदा अनुमान के अनुसार, नेतन्याहू और आइजनकोट दोनों को सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों का समर्थन चाहिए। ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक बातचीत और गठबंधन की कोशिशें तेज हो सकती हैं।
नई सरकार नहीं बनी तो क्या दोबारा होंगे चुनाव?
अगर सरकार बनाने के सभी प्रयास नाकाम हो जाते हैं, तो इजरायल में दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। इसके लिए संसद भंग करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इस पूरी प्रक्रिया में कई हफ्ते या उससे ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे हालात में नई सरकार बनने तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। हालांकि, कार्यवाहक सरकार से बड़े नीतिगत फैसले लेते समय सावधानी बरतने की उम्मीद की जाती है।
क्या अगले साल तक PM बने रहेंगे नेतन्याहू?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि नेतन्याहू कितने समय तक प्रधानमंत्री बने रहेंगे। अगर कोई भी गठबंधन बहुमत नहीं जुटा पाता और दोबारा चुनाव कराने पड़ते हैं, तो सरकार गठन की प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है। ऐसी स्थिति में नेतन्याहू अगले साल तक भी कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं। हालांकि, यह तय नहीं है। सब कुछ राजनीतिक दलों के बीच होने वाली बातचीत और नई सरकार के गठन पर निर्भर करेगा।




















