ईरान युद्ध के बीच अमेरिका का यू-टर्न :रूसी तेल पर फिर मिली राहत, कीमतों को काबू में रखने की कोशिश

ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच बढ़ती तेल कीमतों ने अमेरिका को बड़ा यू-टर्न लेने पर मजबूर कर दिया। ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल खरीद पर फिर अस्थायी छूट देकर बाजार में सप्लाई बनाए रखने की कोशिश की है। इससे तेल कीमतों में हल्की गिरावट आई, लेकिन यूरोपीय देशों में नाराजगी बढ़ सकती है।
रूसी तेल पर फिर मिली राहत, कीमतों को काबू में रखने की कोशिश
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ईरान के साथ चल रहे तनाव और युद्ध जैसे हालात ने ग्लोबल सप्लाई को प्रभावित किया है। इसी दबाव के बीच अमेरिका ने एक बड़ा फैसला लेते हुए रूसी तेल खरीद पर फिर से अस्थायी छूट दे दी है। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने 17 अप्रैल से नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत अब देशों को 16 मई तक रूसी तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स खरीदने की अनुमति मिल गई है। यानी लगभग एक महीने तक समुद्र में लोड किए गए रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू नहीं होंगे।

    ध्यान देने वाली बात यह है कि इससे पहले दी गई 30 दिन की छूट 11 अप्रैल को खत्म हो चुकी थी और संकेत थे कि अब सख्ती बढ़ाई जाएगी, लेकिन हालात बदलते ही फैसला भी बदल गया।

    क्यों लेना पड़ा यू-टर्न?

    ईरान के साथ तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते खतरे ने वैश्विक तेल सप्लाई को झटका दिया है। दुनिया की करीब 20% तेल और गैस सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ऐसे में जैसे ही इस रूट पर खतरा बढ़ा, कीमतें तेजी से ऊपर जाने लगीं। अमेरिका के सामने चुनौती यह थी कि अगर सप्लाई और घटती, तो तेल की कीमतें और बढ़ जातीं, जिससे आम लोगों पर सीधा असर पड़ता। इसी वजह से ट्रंप प्रशासन ने बाजार में सप्लाई बनाए रखने के लिए यह अस्थायी राहत देने का फैसला लिया।

    सप्लाई पर कितना असर पड़ेगा?रूस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, पिछली छूट के जरिए करीब 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल बाजार में आ सकता था। यह मात्रा लगभग दुनिया की एक दिन की खपत के बराबर है। ऐसे में नई छूट से भी सप्लाई को सहारा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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    सहयोगी देशों में बढ़ सकती है नाराजगी

    अमेरिका के इस फैसले से उसके सहयोगी देशों, खासकर यूरोप, में नाराजगी बढ़ सकती है। यूरोपीय यूनियन लंबे समय से रूस पर कड़े प्रतिबंध बनाए रखने की बात करता रहा है। यूरोपीय नेतृत्व का मानना है कि अभी रूस को राहत देना सही समय नहीं है। ऐसे में अमेरिका का यह कदम पश्चिमी देशों की एकजुट रणनीति को कमजोर कर सकता है।

    तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा?

    अमेरिका के इस ऐलान के बाद तेल बाजार में थोड़ी राहत देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 9% गिरकर 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई, जो पिछले एक महीने का निचला स्तर है। इस गिरावट की एक वजह यह भी है कि ईरान की तरफ से संकेत मिले हैं कि सीजफायर के दौरान होर्मुज स्ट्रेट को कमर्शियल जहाजों के लिए खोल दिया गया है।

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    फिलहाल यह राहत अस्थायी है, लेकिन इससे साफ है कि वैश्विक हालात के दबाव में बड़े देश अपने फैसले बदलने को मजबूर हैं। आने वाले समय में तेल की कीमतें पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेंगी कि ईरान से जुड़ा तनाव कितना कम होता है और सप्लाई कितनी स्थिर रहती है।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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