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13 साल की उम्र में हुई शादी, अब हाई कोर्ट ने दिया बड़ा राहत आदेश

हाई कोर्ट ने कहा- बाल विवाह की शिकार लड़की को दोबारा प्रताड़ित नहीं किया जा सकता, आर्थिक तंगी का हवाला देने वाले पति को अभिभावकों से सहायता लेने की सलाह।
13 साल की उम्र में हुई शादी, अब हाई कोर्ट ने दिया बड़ा राहत आदेश
फाइल फोटो

इंदौर - बाल विवाह से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हाई कोर्ट ने पीड़ित महिला को राहत देते हुए उसके भरण-पोषण की राशि तीन गुना बढ़ा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बाल विवाह कराने वाले माता-पिता अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते और यदि पति आर्थिक रूप से कमजोर है तो उसे उन अभिभावकों से सहायता लेनी चाहिए जिन्होंने कम उम्र में उसका विवाह कराया था। हाई कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पीड़िता को पहले बाल विवाह का शिकार बनाया गया और बाद में उसे बेहद कम भरण-पोषण राशि देकर दूसरी बार पीड़ित किया जा रहा है।

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कुटुंब न्यायालय के आदेश को दी थी चुनौती

मामला नीमच कुटुंब न्यायालय के आदेश से जुड़ा है। कुटुंब न्यायालय ने महिला को दो हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। महिला ने इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर भरण-पोषण बढ़ाने की मांग की। याचिका में महिला ने बताया कि उसका विवाह 27 अप्रैल 2015 को हुआ था। विवाह के बाद उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उसने आरोप लगाया कि पति पर्याप्त साधन होने के बावजूद उसके भरण-पोषण का खर्च नहीं दे रहा है। महिला ने अदालत से 10 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण तथा अलग से आवास खर्च दिलाने की मांग की थी।

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पति बोला- शादी के समय पत्नी 13 साल की थी

मामले में पति की ओर से जवाब पेश करते हुए कहा गया कि विवाह के समय पत्नी की उम्र केवल 13 वर्ष थी, जबकि उसकी उम्र 18 वर्ष थी। पति ने यह भी दावा किया कि विवाह के बाद वह उदयपुर चला गया था और दोनों के बीच वैवाहिक संबंध स्थापित ही नहीं हुए। पति ने पत्नी द्वारा लगाए गए प्रताड़ना के आरोपों को भी निराधार बताया।

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हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि यदि पति के इस कथन को सही भी मान लिया जाए कि विवाह के समय पत्नी नाबालिग थी, तब भी यह स्पष्ट है कि वह बाल विवाह की शिकार रही है। कोर्ट ने कहा कि सामाजिक परंपराओं और रीति-रिवाजों की आड़ में किसी महिला को दोबारा प्रताड़ित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि वर्तमान परिस्थितियों में दो हजार रुपये प्रतिमाह की राशि जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं है।

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अगस्त 2021 से मिलेगा बढ़ा हुआ भरण-पोषण

हाई कोर्ट ने कुटुंब न्यायालय के आदेश में संशोधन करते हुए भरण-पोषण राशि 2 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार रुपये प्रतिमाह कर दी। अदालत ने निर्देश दिया कि यह बढ़ी हुई राशि अगस्त 2021 से प्रभावी मानी जाएगी।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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