Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

वर्ल्ड साइकिल डे विशेष:ट्रैक से उतरी साइकिल, कभी ग्रीन ट्रांसपोर्ट का मॉडल रहा प्रोजेक्ट अब बदहाली का शिकार

शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और नॉन मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए जर्मनी की तर्ज पर शुरू किया गया भोपाल का स्मार्ट साइकिल ट्रैक और पब्लिक बाइक शेयरिंग सिस्टम खुद आखिरी सांसें गिन रहा है। वर्ष 2017 में बड़े विजन के साथ शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट में 11 किमी लंबा साइकिल ट्रैक, 50 स्टेशन और 500 जीपीएस लैस स्मार्ट साइकिलें उतारी गई थीं।
ट्रैक से उतरी साइकिल, कभी ग्रीन ट्रांसपोर्ट का मॉडल रहा प्रोजेक्ट अब बदहाली का शिकार

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान करीब 223 टन कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन कम हुआ, लेकिन अब वही साइकिलें कबाड़ हो चुकी हैं, ट्रैक भी अतिक्रमण, टूट-फूट और पार्किंग में बदल चुका है। आज वर्ल्ड साइकिल-डे है। इस मौके पर कभी शहर की पहचान बने इस प्रोजेक्ट की हालत सवाल खड़े कर रही है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी यह व्यवस्था आखिर क्यों नहीं बच सकी ?

तीन करोड़ का प्रोजेक्ट, अब नए सिरे से शुरुआत

स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट लिमिटेड से मिली जानकारी के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में करीब तीन करोड़ रुपए खर्च हुए थे। करीब 40 हजार लोगों ने इसमें रजिस्ट्रेशन भी कराया, लेकिन प्रोजेक्ट बंद हो चुका है। अब इस प्रोजेक्ट को नए सिरे से और बड़े स्वरूप में शुरू किया जाएगा। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि पब्लिक बाइक शेयरिंग सिस्टम को फिर से सक्रिय बनाने की तैयारी चल रही है। हालांकि मौजूदा हालात इस योजना की बदहाली को साफ बयां कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें: Education News: केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, लोखंडे प्रशांत सीताराम बने CBSE के नए चेयरमैन

भोपाल का मॉडल समय के साथ कमजोर पड़ा

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जिस ट्रैक को कभी देश में सबसे लंबा बताया गया था, वह अब यह दर्जा भी खो चुका है। हैदराबाद में 23 किमी लंबा सोलर साइकिल ट्रैक और आगरा-इटावा के बीच 207 किमी लंबा साइकिल मार्ग जैसी परियोजनाएं उससे कहीं आगे निकल चुकी हैं। देश के कई शहरों ने साइकिलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत किया है। वहीं भोपाल का मॉडल समय के साथ कमजोर पड़ता चला गया। आज यह तुलना शहर की योजना पर कई सवाल खड़े करती है।

ये भी पढ़ें: 13 साल की उम्र में हुई शादी, अब हाई कोर्ट ने दिया बड़ा राहत आदेश

ट्रैक की यह है हालात 

आरआरएल तिराहे के आगे डेडिकेटेड साइकिल ट्रैक पार्किंग के काम आ रहा है। यहां कार और टू व्हीलर मोटर साइकिल पार्क होती हैं। वृंदावन ढाबा और मेपल हाई स्ट्रीट के आसपास शोरूम्स ने यहां कब्जा कर परमानेंट पार्किंग बना दी गई है। कई जगह दुकानों का सामान रखा रहता है। वहीं बीयू से लेकर दानिश नगर तक ट्रैक की हालत बहुत खराब है, बैरियर टूट चुके हैं और डक्ट होल के ढक्कन तक गायब हो गए हैं।

/img/118/1780417635718

मेंटेनेंस न होने से ज्यादातर साइकिल बर्बाद

करीब 250 साइकिलें आईएसबीटी स्थित स्टोर में पड़ी हुई हैं। मेंटेनेंस न होने से अधिकतर साइकिल बर्बाद हो चुकी हैं। इन साइकिलों की मॉनिटरिंग के लिए लगाए गए जीपीएस सिस्टम भी चोरी हो गए। देखरेख ना होने की वजह से पूरी व्यवस्था धीरे-धीरे खत्म होती चली गई। जो साइकिलें कभी शहर की सड़कों पर दौड़ती थीं, वे आज कबाड़ में बदल चुकी हैं।

/img/118/1780417680583

लोगों की उम्मीदें और अधिकारियों का दावा

रवि शर्मा, रोहित विश्वकर्मा, अमित तिवारी, रोहित सेन और पंकज पटेल जैसे उपयोगकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था सस्ती, सुरक्षित और पर्यावरण हितैषी थी, लेकिन धीरे-धीरे स्टेशन बंद होते गए और पूरा सिस्टम खत्म हो गया। उनका मानना है कि सेवा बंद होने के बाद लोग फिर पेट्रोल वाहनों पर निर्भर हो गए हैं। वहीं स्मार्ट सिटी के पीआरओ नितिन दवे का कहना है कि इसे खत्म नहीं माना जा सकता। पब्लिक बाइक शेयरिंग को फिर से शुरू करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसे और विस्तार के साथ दोबारा शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

Latest Posts