
करीब दो महीने से जारी तनाव और टकराव के बीच ईरान ने अमेरिका के सामने प्रस्ताव रखा है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए तैयार है, लेकिन इसके साथ उसने एक अहम शर्त जोड़ दी है-परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत अभी नहीं होगी। यानी तेहरान संकेत दे रहा है कि वह पहले आर्थिक और समुद्री दबाव से राहत चाहता है, जबकि परमाणु मुद्दे को बाद के लिए टालना चाहता है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है। क्योंकि अब तक ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में परमाणु कार्यक्रम ही सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। लेकिन इस बार ईरान ने प्राथमिकता बदल दी है-पहले होर्मुज, फिर न्यूक्लियर।
ईरान का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोला जाता है और उस पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी खत्म होती है, तभी आगे की बातचीत का रास्ता साफ हो सकता है। इस प्रस्ताव में ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह मौजूदा सीजफायर को लंबा खींचने या स्थायी बनाने के लिए भी तैयार है।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे ईरान के अंदरूनी हालात भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान की लीडरशिप में परमाणु कार्यक्रम को लेकर एकराय नहीं है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी संकेत दिए हैं कि यूरेनियम संवर्धन की सीमा और उसके भंडार को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। यही वजह है कि ईरान फिलहाल परमाणु मुद्दे को टालकर आर्थिक राहत हासिल करना चाहता है। यानी पहले नाकाबंदी हटे, व्यापार सामान्य हो और फिर धीरे-धीरे परमाणु मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़े।
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ईरान के इस प्रस्ताव ने अमेरिका के सामने नई दुविधा खड़ी कर दी है। वॉशिंगटन के अधिकारियों को डर है कि अगर उन्होंने पहले नाकाबंदी हटा ली, तो ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव कम हो जाएगा। वहीं, ईरान के इस प्रस्ताव ने वॉशिंगटन की टेंशन बढ़ा दी है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अगर नाकाबंदी पहले हटा ली गई, तो परमाणु मांगों पर ईरान को झुकाने की ताकत कम हो जाएगी। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन को लंबे समय तक निलंबित करे। उन्हें डर है कि ईरान परमाणु से जुड़ी शर्तों से बच सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में कई देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान के अलावा मिस्र, तुर्की और कतर भी इस बातचीत को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। खास तौर पर पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव को अमेरिका तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, ईरान ने खुद भी संकेत दिए हैं कि उसे कुछ मध्यस्थों पर पूरी तरह भरोसा नहीं है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका इस प्रस्ताव पर क्या फैसला लेगा। ट्रंप जल्द ही अपनी सुरक्षा टीम के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग कर सकते हैं जिसमें बातचीत और भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी। इससे पहले ट्रंप ने संकेत दिए थे कि जब तक ईरान के साथ कोई ठोस समझौता नहीं होता, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नौसैनिक नाकाबंदी जारी रह सकती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि निर्यात रुकने से ईरान का ऑयल सिसटम तबाह हो सकता है।