ऑयल क्राइसिस के बीच अमेरिका का बड़ा फैसला :30 दिन तक रूस से तेल खरीद सकेंगे सभी देश, कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर पार

ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के बीच वैश्विक तेल संकट गहराता जा रहा है। बढ़ती कीमतों को काबू में रखने के लिए अमेरिका ने दुनिया के देशों को 30 दिन तक सीमित मात्रा में रूस से तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी है। इस फैसले से समुद्र में फंसे करोड़ों बैरल रूसी तेल की सप्लाई बाजार तक पहुंच सकती है।
Follow on Google News
30 दिन तक रूस से तेल खरीद सकेंगे सभी देश, कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर पार
AI Image
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन डीसी। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रही जंग का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। सबसे बड़ा झटका ऊर्जा बाजार को लगा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और समुद्री रास्तों में आई रुकावटों की वजह से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और वैश्विक सप्लाई पर भी दबाव बढ़ गया है।

    इसी बीच अमेरिका ने एक अहम फैसला लेते हुए दुनियाभर के देशों को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दे दी है। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाना और तेजी से बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना बताया जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान के रणनीतिक कदमों और युद्ध के कारण दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

    अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने की दी अस्थायी अनुमति

    अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने घोषणा की है कि, सभी देशों को सीमित मात्रा में रूस से तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दी जा रही है। यह अनुमति खास तौर पर उस रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए दी गई है जो पहले से ही जहाजों पर लादे जा चुके हैं और समुद्र में फंसे हुए हैं।

    अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह लाइसेंस 12 मार्च तक जहाजों पर लदे तेल की डिलीवरी और बिक्री की अनुमति देता है और यह 11 अप्रैल तक वैध रहेगा। इसका मतलब साफ है कि, अगले एक महीने तक दुनिया के देश सीमित मात्रा में रूस से तेल खरीद सकते हैं।

    यह भी पढ़ें: US Israel Iran War : ट्रंप का बड़ा दावा- अमेरिका जंग जीत चुका, लेकिन ऑपरेशन जारी रहेगा; युद्ध खत्म करने के लिए ईरान की 3 शर्तें

    समुद्र में फंसा हुआ है करोड़ों बैरल तेल

    अमेरिका के इस फैसले के बाद दुनियाभर के देशों को समुद्र में फंसे रूसी तेल तक पहुंच मिल सकेगी। बताया जा रहा है कि, इस समय दुनिया के अलग-अलग समुद्री इलाकों में करीब 124 से 125 मिलियन बैरल रूसी तेल जहाजों में लदा हुआ है। यह तेल लगभग 30 अलग-अलग स्थानों पर समुद्र में खड़े जहाजों में मौजूद है। अमेरिका का मानना है कि, अगर यह तेल बाजार तक पहुंचता है तो इससे वैश्विक सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।

    ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद होने से बढ़ा संकट

    मिडिल ईस्ट में युद्ध के दौरान ईरान द्वारा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया गया है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। आमतौर पर दुनिया के कुल तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। हाल के दिनों में इस क्षेत्र में कई जहाजों पर हमले भी हुए हैं। इसी वजह से कई देश अपने तेल टैंकर इस रास्ते से निकालने से डर रहे हैं। इसका सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ा है और बाजार में घबराहट का माहौल बन गया है।

    Featured News

    कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार

    युद्ध और सप्लाई में आई बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो अगस्त 2022 के बाद पहली बार हुआ है।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि, अगर युद्ध लंबे समय तक जारी रहता है और समुद्री रास्ते बंद रहते हैं तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

    भारत को सबसे पहले मिली थी छूट

    अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने की अस्थायी छूट सबसे पहले भारत को दी थी। 5 मार्च को जारी फैसले के तहत भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल के कार्गो खरीदने की अनुमति दी गई थी। इस कदम का उद्देश्य यह था कि, वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बनी रहे और ऊर्जा संकट को कुछ हद तक कम किया जा सके।

    यह भी पढ़ें: ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का पहला बयान: ‘हर मौत का लेंगे बदला’, होर्मुज की खाड़ी बंद करने की चेतावनी

    ट्रंप प्रशासन का दावा- इससे कीमतें रहेंगी नियंत्रित

    अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि, यह अस्थायी उपाय केवल उस तेल के लिए है जो पहले से जहाजों में लोड होकर समुद्र में फंसा हुआ है।

    बेसेंट के मुताबिक, इस फैसले से रूस को ज्यादा वित्तीय फायदा नहीं होगा क्योंकि रूस की ऊर्जा आय का बड़ा हिस्सा उत्पादन स्थल पर लगाए गए टैक्स से आता है।

    अमेरिका का दावा- लंबी अवधि में होगा फायदा

    स्कॉट बेसेंट ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की ऊर्जा समर्थक नीतियों की वजह से अमेरिका का तेल और गैस उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। उनके मुताबिक इससे अमेरिकी नागरिकों के लिए ईंधन की कीमतें कम रखने में मदद मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि, मौजूदा तेल संकट एक अस्थायी स्थिति है और लंबे समय में अमेरिका की ऊर्जा नीतियों से वैश्विक बाजार को फायदा होगा।

    Breaking News

    इराक में अमेरिकी सैन्य विमान क्रैश

    इसी बीच युद्ध के माहौल में इराक से एक और बड़ी खबर सामने आई है। इराक में अमेरिकी सेना का KC-135 सैन्य विमान क्रैश हो गया। इसके बाद इराक के एक विद्रोही संगठन ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने एयर डिफेंस सिस्टम से हमला कर विमान को गिराया है। यह दावा इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक नाम के संगठन ने किया, जो ईरान समर्थित कई गुटों का गठबंधन माना जाता है। हालांकि, अमेरिकी सेना ने इस दावे को खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह हादसा किसी हमले की वजह से नहीं बल्कि तकनीकी कारणों से हुआ।

    यह भी पढ़ें: ट्रंप को तगड़ा झटका : KC-135 विमान पश्चिमी इराक में क्रैश, घटना में दो विमान शामिल थे

    अमेरिकी सेना का बयान

    अमेरिकी सेना के अनुसार दो विमानों से जुड़ी एक घटना हुई थी। इसमें एक विमान पश्चिमी इराक में क्रैश हो गया, जबकि दूसरा विमान सुरक्षित रूप से इजराइल में उतर गया। सेना का कहना है कि, यह दुर्घटना फ्रेंडली एयरस्पेस में हुई और इसमें किसी दुश्मन हमले की पुष्टि नहीं हुई है।

    ईरान की टॉप लीडरशिप पर हमले के बावजूद जारी है जंग

    इस बीच ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध को करीब 12 दिन हो चुके हैं। युद्ध के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई थी। इसके बाद अब तक करीब 50 शीर्ष अधिकारी हमलों में मारे जाने की जानकारी दी गई है। इसके बावजूद ईरान का दावा है कि, वह लंबे समय तक युद्ध जारी रख सकता है।

    यह भी पढ़ें: LPG Crisis : गैस संकट पर संसद में बोले राहुल गांधी-अभी तो दर्द की शुरुआत हुई है

    ईरान की खास रणनीति

    रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने युद्ध के दौरान एक विशेष रणनीति अपनाई है। इस रणनीति के तहत सेना की कमान किसी एक व्यक्ति के हाथ में नहीं है बल्कि इसे सात अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया है। इसके अलावा हर महत्वपूर्ण पद के लिए पहले से चार संभावित उत्तराधिकारी तय किए गए हैं ताकि किसी भी हमले के बाद सैन्य कमान प्रभावित न हो।

    क्या खत्म होगी जंग?

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास फिलहाल इस युद्ध को खत्म करने की कोई स्पष्ट योजना नहीं है। हालांकि, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने पहले कहा था कि युद्ध का तेल बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक पहले भी ऐसे संघर्ष हुए हैं, जिनका असर थोड़े समय के लिए रहा और बाद में बाजार स्थिर हो गया।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

    नई दिल्ली
    --°
    बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
    Source:AccuWeather
    icon

    Latest Posts