मिडिल ईस्ट में चल रही अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग अब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा संकट बन चुकी है। युद्ध के 13वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि, अमेरिका इस जंग में पहले ही जीत हासिल कर चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि जब तक सभी सैन्य लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते, तब तक अभियान जारी रहेगा। दूसरी तरफ ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए तीन बड़ी शर्तें सामने रख दी हैं। इस बीच तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कार्रवाई ने इस संघर्ष को और गंभीर बना दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केंटकी के हेब्रॉन में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध प्रभावी तरीके से जीत लिया है। उन्होंने कहा कि, युद्ध के शुरुआती घंटों में ही साफ हो गया था कि अमेरिका बढ़त बना चुका है।
ट्रंप ने कहा कि, आप जल्दी यह नहीं कहना चाहते कि आप जीत गए, लेकिन हम जीत चुके हैं। पहले ही घंटे में तय हो गया था कि परिणाम क्या होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका अभी सैन्य अभियान से पीछे नहीं हटेगा। उनके अनुसार अमेरिकी सेना तब तक ऑपरेशन जारी रखेगी जब तक सभी रणनीतिक लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते।
रैली के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी सेना की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया है।
उनका दावा है कि, अमेरिकी सेना ने ईरान के 58 नौसैनिक जहाज नष्ट कर दिए। कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने कहा कि, एक समय ऐसा भी आया जब ईरान के पास निशाना बनाने के लिए लगभग कुछ भी नहीं बचा था।
यह भी पढ़ें: UNSC में ईरान के खिलाफ प्रस्ताव पास : खाड़ी देशों पर हमले तुरंत रोकने की मांग, रूस-चीन ने वोटिंग से बनाई दूरी
ट्रंप ने अपने भाषण में अमेरिकी सैन्य अभियान के नाम Epic Fury का भी जिक्र किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि, ऑपरेशन के लिए कई नाम सुझाए गए थे लेकिन उन्हें कोई पसंद नहीं आया।
ट्रंप ने कहा कि, उन्होंने मुझे करीब 20 नाम दिए, मैं तो ऊंघने लगा था। फिर मैंने Epic Fury देखा और कहा कि यही सही है। उन्होंने समर्थकों से पूछा कि क्या यह शानदार नाम है।
ट्रंप ने साफ किया कि, अमेरिका जल्दबाजी में युद्ध खत्म नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि अगर अभी पीछे हटे तो भविष्य में फिर ऐसा संघर्ष हो सकता है। ट्रंप के अनुसार, अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को खत्म करना है। अमेरिका स्थायी समाधान चाहता है। मिशन पूरा होने तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने संसद को बताया कि ईरान के खिलाफ युद्ध में भारी खर्च हो रहा है। पेंटागन के मुताबिक, युद्ध के पहले 6 दिनों में अमेरिका ने 11.3 अरब डॉलर खर्च किए। यह राशि भारतीय मुद्रा में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के बराबर है।
इसमें से करीब 5 अरब डॉलर हथियार और गोला-बारूद पर खर्च किए गए। यह जानकारी अमेरिकी संसद को एक निजी बैठक में दी गई।
[breaking type="Breaking"]
दूसरी तरफ ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें सामने रखी हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूज पजशकियान ने कहा कि, अगर इन शर्तों को मान लिया जाए तो युद्ध समाप्त हो सकता है।
ईरान की तीन शर्तें
ईरान के राष्ट्रपति का कहना है कि, इन शर्तों को मानना ही युद्ध समाप्त करने का एकमात्र रास्ता है।
इस युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार-
यानी बहुत कम समय में तेल की कीमतों में लगभग 20% तक बढ़ोतरी देखी गई है।
यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की पहल : Air India-IndiGo चलाएंगी स्पेशल फ्लाइट्स, फंसे यात्रियों की होगी घर वापसी
विशेषज्ञों का कहना है कि, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण होर्मुज स्ट्रेट है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। अगर इस मार्ग पर खतरा बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी संकट आ सकता है।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए ट्रंप ने कहा कि, अमेरिका जरूरत पड़ने पर अपने Strategic Petroleum Reserve का इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने कहा कि, सरकार तेल बाजार को स्थिर रखने की कोशिश करेगी। जरूरत पड़ने पर रिजर्व से तेल जारी किया जाएगा। ट्रंप का मानना है कि, इससे तेल की कीमतों को नीचे लाने में मदद मिल सकती है।
इस युद्ध का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। यह हमला इराक के समुद्री इलाके में एक तेल टैंकर पर हुआ। जहाज का नाम सेफसी विष्णु बताया गया है। बताया जा रहा है कि हमले में सुसाइड बोट का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, जहाज पर मौजूद अन्य 27 लोग सुरक्षित बचा लिए गए।
[breaking type="Breaking"]
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच बहरीन ने भी बड़ा दावा किया है। बहरीन के गृह मंत्रालय के अनुसार, ईरान के लिए जासूसी करने के आरोप में 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनकी उम्र 22 से 36 साल के बीच बताई गई है। जांच में सामने आया कि, आरोपियों ने बहरीन के कई संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें लेकर उन्हें ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) को भेजा।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने भी इस युद्ध को लेकर कार्रवाई की है। सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित कर ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए गए हमलों की निंदा की और तुरंत हमले रोकने की मांग की, इस प्रस्ताव को 13 देशों ने समर्थन दिया।
हालांकि, रूस और चीन ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन उन्होंने वीटो का इस्तेमाल भी नहीं किया। इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र के 135 देशों का समर्थन मिला।
28 फरवरी : अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया।
1 मार्च : ईरान ने इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
2 मार्च : ईरान के नतांज न्यूक्लियर सेंटर पर हमला।
3 मार्च : खाड़ी देशों में अमेरिकी दूतावास बंद।
4 मार्च : ईरानी वॉरशिप पर हमला, कई नौसैनिक मारे गए।
5 मार्च : ट्रंप ने कहा- ईरान का नया सुप्रीम लीडर अमेरिका के बिना नहीं चुना जाएगा।
6 मार्च : इजरायल ने ईरान के 400 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर हमला किया।
7 मार्च : अमेरिका ने ईरान के वाटर प्लांट को निशाना बनाया।
8 मार्च : मुजतबा खामेनेई ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने।
9 मार्च : कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर पार।
11 मार्च : होर्मुज स्ट्रेट के पास कार्गो जहाज पर हमला।
इस युद्ध का असर भारत पर भी पड़ सकता है। मुख्य कारण हैं-
कई जगहों पर एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई में भी देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं।