दिल्ली-भोपाल समेत कई शहरों में आग के बढ़ते हादसों पर केंद्र सख्त,अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की होगी फायर सेफ्टी जांच

देशभर में लगातार सामने आ रहे आग के हादसों ने सरकार और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली, भोपाल समेत कई बड़े शहरों में अस्पतालों, व्यावसायिक इमारतों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आग लगने की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को फायर सेफ्टी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसी कड़ी में अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में अग्नि सुरक्षा मानकों की व्यापक जांच की तैयारी की जा रही है। सरकार का फोकस केवल हादसों के बाद राहत कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से मजबूत व्यवस्था तैयार करने पर है।
आग की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता, केंद्र ने दिखाई सख्ती
हाल के महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से आग लगने की कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। इन हादसों में कई लोगों की जान गई है और करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों में आग लगने की घटनाओं ने सबसे ज्यादा चिंता पैदा की है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन मौजूद रहते हैं। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को अग्नि सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने और अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों सहित महत्वपूर्ण संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन करने को कहा है। अधिकारियों का मानना है कि समय रहते खामियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाए तो बड़े हादसों को रोका जा सकता है।
दिल्ली में संवेदनशील इलाकों की पहचान पर काम
राजधानी दिल्ली में आग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए दिल्ली सरकार और दिल्ली अग्निशमन सेवा नई रणनीति तैयार कर रही है। इसके तहत उन क्षेत्रों का अध्ययन किया जा रहा है जहां आग लगने की घटनाएं ज्यादा होती हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि किन कारणों से बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। सरकार का उद्देश्य जोखिम वाले इलाकों में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराना और दमकल विभाग की प्रतिक्रिया क्षमता को बेहतर बनाना है। इसके लिए आधुनिक उपकरणों, विशेष वाहनों और प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती की योजना बनाई जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में फौरन कार्रवाई की जा सके।
मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड ने खोली कई खामियां
बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में 4 जून को आईसीयू में लगी आग ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हादसे में सात मरीजों की मौत हो गई थी। घटना की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि आईसीयू में मौजूद कर्मचारियों को यह तक नहीं पता था कि फायर एक्सटिंग्विशर का सही उपयोग कैसे किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार आग लगने के बाद स्थिति के अनुरूप सही अग्निशमन यंत्र का इस्तेमाल नहीं किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशिक्षित कर्मचारी मौजूद होते और शुरुआती स्तर पर सही कार्रवाई की जाती तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
डीएम ने दिए कार्रवाई के निर्देश
मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और उसकी विस्तृत समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि अस्पताल भवन स्वीकृत नक्शे के विपरीत बनाया गया है। इस मामले में नगर निगम को अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं अग्निशमन विभाग द्वारा जारी एनओसी और अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है।
केवल उपकरण नहीं, प्रशिक्षण भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भवन में फायर एक्सटिंग्विशर लगा देना ही पर्याप्त नहीं है। कर्मचारियों को उसका सही उपयोग भी आना चाहिए। कई बार आग लगने के शुरुआती मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और उसी दौरान सही कदम उठाकर बड़े हादसे को टाला जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि नियमित फायर सेफ्टी ट्रेनिंग, मॉक ड्रिल और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। आईसीयू और अन्य संवेदनशील विभागों में बिजली के उपकरणों का अत्यधिक उपयोग होता है, इसलिए इलेक्ट्रिकल ऑडिट भी जरूरी माना गया है।
फायर सेफ्टी ऑडिट को लेकर बढ़ेगी निगरानी
मुजफ्फरपुर हादसे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए फायर सेफ्टी ऑडिट को अनिवार्य बनाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। संस्थानों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी विभागीय पोर्टल पर अपलोड करनी होगी और संबंधित दस्तावेज जमा करने होंगे। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर जवाबदेही भी तय होगी। आने वाले दिनों में अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच के दौरान अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, आपातकालीन निकास, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और भवन की सुरक्षा व्यवस्था का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
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फायर फाइटिंग मास्टर प्लान पर भी जोर
दिल्ली सरकार राजधानी के लिए व्यापक फायर फाइटिंग मास्टर प्लान तैयार कर रही है। इसके तहत जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान, नए फायर स्टेशनों की स्थापना और आधुनिक अग्निशमन वाहनों को शामिल करने पर काम किया जा रहा है। घनी आबादी वाले इलाकों, तंग गलियों और ऊंची इमारतों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए नई तकनीकों को भी अपनाया जाएगा। सरकार और प्रशासन का मानना है कि आग लगने के बाद राहत कार्य से ज्यादा जरूरी है ऐसी घटनाओं को रोकना।












