PlayBreaking News

एक्शन में 'सिंघम' :क्या हाल कर दिया 'पुष्पा' का, हाफ पैंट में कराई पूरे शहर में कराई परेड!

पश्चिम बंगाल में कभी फिल्मी स्टाइली में 'पुष्पा' कहलाने वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता जहांगीर की पुलिस अच्छी खबर ले रही है। जहांगीर को पुलिस ने हाफ पैंट में पूरे शहर में घुमाया। हर कोईयह देखकर हैरान था।
Follow on Google News
क्या हाल कर दिया 'पुष्पा' का, हाफ पैंट में कराई पूरे शहर में कराई परेड!

कोलकाता।  पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी नतीजों के बाद एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। कभी हजारों समर्थकों के बीच मंच से जोशीले भाषण देने वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता जहांगीर खान आज बिल्कुल अलग परिस्थितियों में नजर आ रहे हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान अपने आक्रामक अंदाज और राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चा में रहने वाले जहांगीर खान चुनावी हार के बाद अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए थे। 

नेपाल सीमा के पास STF के हाथ लगा बड़ा सुराग 

चुनाव खत्म होने के बाद जहांगीर खान की तलाश में पश्चिम बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स (STF) लगातार सक्रिय थी। कई दिनों तक चली खोजबीन और खुफिया जानकारी जुटाने के बाद आखिरकार एजेंसियों को सफलता मिली। एसटीएफ ने उन्हें नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई। सोशल मीडिया पर उनकी गिरफ्तारी से जुड़े वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगे। जिन लोगों ने कभी उन्हें राजनीतिक ताकत के प्रतीक के रूप में देखा था, वे अब उनकी बदली हुई स्थिति को देखकर हैरान नजर आए।

ये भी पढ़ें: जब अपने ही हुए बागी, तब ममता के साथ चट्टान बनकर खड़े दिखे दो बिहारी चेहरे; 20 सांसद और 60 विधायक हुए दूर

‘सिंघम बनाम पुष्पा’ वाला बयान फिर आया चर्चा में 

जहांगीर खान की गिरफ्तारी के बाद एक पुराना बयान भी फिर सुर्खियों में आ गया। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को लेकर कहा था, अगर अजय पाल शर्मा सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं। यह बयान उस समय काफी चर्चा में रहा था। दरअसल, फालता विधानसभा क्षेत्र में मतदान के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने और दबाव बनाने के आरोप सामने आए थे। इसी सिलसिले में अजय पाल शर्मा अपनी टीम के साथ कुछ संदिग्ध ठिकानों पर पहुंचे थे और स्पष्ट संदेश दिया था कि चुनाव प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा या डराने-धमकाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सात एफआईआर और बढ़ती कानूनी चुनौतियां 

जहांगीर खान की मुश्किलें केवल राजनीतिक हार तक सीमित नहीं रहीं। उनके खिलाफ फलता पुलिस थाने में करीब सात एफआईआर दर्ज बताई गई हैं। इनमें कई मामले चुनावी गतिविधियों और कथित अनियमितताओं से जुड़े हुए हैं। इन शिकायतों के आधार पर जांच आगे बढ़ी और मामला अदालत तक पहुंच गया। कानूनी प्रक्रिया के दौरान उन्हें कुछ समय के लिए राहत जरूर मिली, लेकिन जांच एजेंसियां लगातार मामले की निगरानी करती रहीं।

ये भी पढ़ें: 58 विधायक-19 सांसद... हार के 14 दिन बाद ही टूटी TMC! ममता के खिलाफ स्पीकर को दी चिट्ठी, सामने आई लिस्ट

अंतरिम राहत खत्म होते ही गिरफ्तारी 

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 18 मई को जहांगीर खान को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी, ताकि वे 21 मई को हुए फलता विधानसभा क्षेत्र के पुनर्मतदान (री-पोल) में हिस्सा ले सकें। फलता सीट पर दोबारा मतदान कराया गया था और उसके परिणाम 24 मई को घोषित हुए थे। हालांकि यह राहत सीमित अवधि के लिए थी। सुरक्षा अवधि समाप्त होने के बाद जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी और अंततः उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अब यह मामला केवल एक नेता की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति, कानूनी कार्रवाई और बदलते सियासी हालात का बड़ा उदाहरण बन गया है।

  

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts