शहरी लोगों को पसंद आईं जंगली भाजियां : रेट 1000 रु/ किलो तक, जंगल से बाजार तक छाईं प्राकृतिक सब्जियां; बिना खाद-पानी के होती हैं तैयार

संजय दुबे, जबलपुर। मध्य प्रदेश के वनांचल में इन दिनों ऐसी मौसमी जंगली सब्जियों की बहार छाई है, जिनका स्वाद ही नहीं, बल्कि औषधीय गुण भी इन्हें खास बनाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली परोड़ा, पिहरी, पोटू और पिड़री शहरों के बाजारों में 'हर्बल डाइट' के रूप में जगह बना रही हैं। परोड़ा, पिहरी, पोटू और खासकर पिड़री जैसी सब्जियां स्थानीय हाट-बाजारों से होती हुई अब शहरी रसोई तक पहुंच चुकी हैं।
पेट के रोगों में लाभकारी इन सब्जियों को आयुर्वेद विशेषज्ञ भी सेहत के लिए संजीवनी मानते हैं । खासकर पिड़री को 'सब्जियों की रानी' कहा जाता है। बढ़ती मांग के चलते बाजार में पिड़री 800 से 1000 रुपए प्रति किलो, जबकि परोड़ा 250 से 300 रुपए किलो तक बिक रही है।
पाए जाने वाले पोषक तत्व
पोटू और पिड़रीः फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, पोटैशियम, विटामिन 'सी'
पड़ोरा: एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट आदि।
खुद-ब-खुद होती हैं तैयार
इन जंगली सब्जियों को न तो कोई खाद चाहिए और न ही सिंचाई। ये प्रकृति की सौगात हैं, जो हर साल बारिश के मौसम में जंगलों में खुद- ब-खुद उग आती हैं। आदिवासी और ग्रामीण समुदाय पीढ़ियों से इनका संग्रह कर परंपरागत व्यंजनों में इस्तेमाल करता आ रहा है।
सरई के पेड़ों के नीचे उगती है
ये सब्जियां सरई के पेड़ों के नीचे प्राकृतिक रूप से उगती हैं। पिड़री एक प्रकार की छते जैसी दिखने वाली जंगल सब्जी है, जो देखने में सुंदर होती है और स्वाद में भी खास।





















