Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

शहरी लोगों को पसंद आईं जंगली भाजियां : रेट 1000 रु/ किलो तक, जंगल से बाजार तक छाईं प्राकृतिक सब्जियां; बिना खाद-पानी के होती हैं तैयार

Follow on Google News
शहरी लोगों को पसंद आईं जंगली भाजियां : रेट 1000 रु/ किलो तक, जंगल से बाजार तक छाईं प्राकृतिक सब्जियां; बिना खाद-पानी के होती हैं तैयार
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    संजय दुबे, जबलपुर। मध्य प्रदेश के वनांचल में इन दिनों ऐसी मौसमी जंगली सब्जियों की बहार छाई है, जिनका स्वाद ही नहीं, बल्कि औषधीय गुण भी इन्हें खास बनाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली परोड़ा, पिहरी, पोटू और पिड़री शहरों के बाजारों में 'हर्बल डाइट' के रूप में जगह बना रही हैं। परोड़ा, पिहरी, पोटू और खासकर पिड़री जैसी सब्जियां स्थानीय हाट-बाजारों से होती हुई अब शहरी रसोई तक पहुंच चुकी हैं।

    पेट के रोगों में लाभकारी इन सब्जियों को आयुर्वेद विशेषज्ञ भी सेहत के लिए संजीवनी मानते हैं । खासकर पिड़री को 'सब्जियों की रानी' कहा जाता है। बढ़ती मांग के चलते बाजार में पिड़री 800 से 1000 रुपए प्रति किलो, जबकि परोड़ा 250 से 300 रुपए किलो तक बिक रही है।

    पाए जाने वाले पोषक तत्व

    पोटू और पिड़रीः फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, पोटैशियम, विटामिन 'सी'

    पड़ोरा: एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट आदि।

    खुद-ब-खुद होती हैं तैयार

    इन जंगली सब्जियों को न तो कोई खाद चाहिए और न ही सिंचाई। ये प्रकृति की सौगात हैं, जो हर साल बारिश के मौसम में जंगलों में खुद- ब-खुद उग आती हैं। आदिवासी और ग्रामीण समुदाय पीढ़ियों से इनका संग्रह कर परंपरागत व्यंजनों में इस्तेमाल करता आ रहा है।

    सरई के पेड़ों के नीचे उगती है

    ये सब्जियां सरई के पेड़ों के नीचे प्राकृतिक रूप से उगती हैं। पिड़री एक प्रकार की छते जैसी दिखने वाली जंगल सब्जी है, जो देखने में सुंदर होती है और स्वाद में भी खास।

    “”
    मैं हर हफ्ते हाट बाजार से पिड़री, पड़ोरा और पोटू जरूर खरीदता हूं। पिड़री पेट के लिए बहुत फायदेमंद है और इसका स्वाद तो कोई भी सब्जी नहीं दे सकती। पड़ोरा शरीर को ठंडा रखती है। पोटू को उबालकर नमक-नींबू के साथ खाना तो हमारे घर की बरसात की परंपरा है। ये महंगी हैं पर सेहत के लिए अमूल्य हैं।
    - रामप्रसाद वर्मा, स्थानीय निवासी, उमरिया

    “”
    पिड़र, पड़ोरा, पोटू और पिहरी बरसात के मौसम में  जंगलों में अपने आप उगने वाली सब्जियां हैं। हम जंगल जाकर काफी मशक्कत के बाद इन सब्जियों को लेकर आते हैं और हा बाजारों में बेचते हैं।
    - धनेश प्रसाद रैदास, सब्जी विक्रेता, कछरवार, उमरिया

    “”
    पिड़री, परोड़ा और पिहरी जैसे वन उत्पाद फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स से भरपूर होते हैं । ये न केवल पाचन क्रिया को दुरुस्त रखते हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं। खासकर बरसात के मौसम में इनका सेवन पेट के संक्रमण से बचाने में कारगर होता है ।
    - डॉ. रश्मि त्रिपाठी, पोषण विशेषज्ञ, मानपुर

    People's Reporter
    By People's Reporter

    Latest Posts