
भोपाल निवासी दंपती आकाश और कृतिका बच्ची को तीन महीने की उम्र में अपने साथ लाए थे और करीब दो साल तक अपने पास रखा। इस दौरान बच्ची के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किए जाने की बात सामने आई है। फिलहाल पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है और असली माता-पिता की तलाश जारी है।
मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में हाईवे पर मिली ढाई साल की मासूम बच्ची के मामले में आरोपियों को तीन दिन का पुलिस रिमांड मिल गया है। हालांकि पहले इसे लावारिस बच्ची का मामला माना जा रहा था, लेकिन पुलिस जांच में सामने आया कि भोपाल निवासी दंपती आकाश और कृतिका उसे तीन महीने की उम्र में अपने साथ लाए थे। करीब दो साल तक बच्ची उनके पास रही और इस दौरान उसके साथ मारपीट व दुर्व्यवहार किए जाने की बात सामने आई है। और बाद में बच्ची को बीच सड़क पर छोड़ दिया गया। जब पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया और पूछताछ की तो आकाश और कृतिका गोद लेने के कोई वैध दस्तावेज भी पेश नहीं कर पाए हैं।
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बच्ची की केयरटेकर बबीता ने बताया कि एक दिन बच्ची के पिता आकाश का फोन आया और उन्होंने कहा कि उनके दो बच्चों की देखभाल करनी होगी। बबीता के अनुसार, दंपत्ति बच्ची के साथ बेहद बुरा व्यवहार करते थे और उसे बेरहमी से पीटते थे। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने फेसबुक पर बच्ची की तस्वीर देखी, तो वह उसे पहचान गईं। बबीता ने आगे कहा कि एक दिन आकाश ने फोन कर उनसे बच्ची को अपने पास रखने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया और कहा कि बिना किसी वैध कागजी प्रक्रिया के वह बच्ची को नहीं रख सकतीं। उन्होंने यह भी अपील की कि लोग सोशल मीडिया पर गलत या भ्रामक तस्वीरें शेयर न करें।
आरोपी दंपती का व्यवहार आसपास के लोगों के प्रति भी असामान्य था, क्योंकि वे किसी से बातचीत नहीं करते थे और खुद को अलग रखते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, उनके घर पर कई संदिग्ध लोगों का आना-जाना लगा रहता था, जिससे शक और बढ़ गया था। इतना ही नहीं, आरोपी दंपती का पांच वर्षीय बेटा भी मासूम बच्ची के साथ मारपीट करता था, पड़ोसियों को बच्ची की हालत देखकर दया आती थी और वे कई बार रोकने की कोशिश करते थे, लेकिन दंपती किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थे।
सोंईकलां के पास एक ईंट भट्ठे पर काम करने वाले मजदूर ने बच्ची को हाईवे पर अकेले घूमते देखा और तुरंत इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और बच्ची को सुरक्षित अपने साथ ले गई। इसके बाद बच्ची को बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया गया, जहां से उसे वन स्टॉप सेंटर में रखा गया है।
फिलहाल बच्ची सुरक्षित है और उसकी देखभाल की जा रही है, लेकिन इस घटना ने समाज में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।