रूस से डीजल खरीदेंगे ट्रंप, पुतिन से दोस्ती या… जेलेंस्की ने उठाए सवाल?

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल की बड़ी खेप मंगाने की घोषणा कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप का कहना है कि रूसी ईंधन की सप्लाई बढ़ने से अमेरिकी बाजार में कीमतें कम हो सकती हैं। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका रूस के तेल कारोबार पर दबाव बनाने और उससे तेल खरीदने वाले देशों को चेतावनी देने की नीति अपनाता रहा है। अब खुद रूस से ईंधन लेने की तैयारी ने अमेरिकी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यूक्रेन ने भी इस कदम का विरोध किया है।
पुतिन से बातचीत के बाद ट्रंप का ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के बाद डीजल की सप्लाई को लेकर बड़ा दावा किया। ट्रंप के मुताबिक, रूस तुरंत तीन लाख टन से ज्यादा डीजल वैश्विक बाजार में भेजने के लिए तैयार है। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और फिर दस लाख टन की सप्लाई की बात कही गई है। ट्रंप ने आगे भी ज्यादा ईंधन मिलने की संभावना जताई है। हालांकि, अतिरिक्त सप्लाई रूस की रिफाइनरियों की स्थिति पर निर्भर करेगी।
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महंगे ईंधन से परेशान अमेरिका को राहत की उम्मीद
अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतें सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। डीजल महंगा होने से ट्रक से सामान पहुंचाने, खेती करने और रोजमर्रा की चीजों को बाजार तक लाने का खर्च बढ़ जाता है। इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ता है। ट्रंप को उम्मीद है कि रूस से डीजल आने पर बाजार में सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों को नीचे लाने में मदद मिलेगी। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले यह फैसला उनके लिए राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
रूस पर दबाव की नीति पर उठे सवाल
अमेरिका लंबे समय से रूस की तेल से होने वाली कमाई पर रोक लगाने की कोशिश करता रहा है। इसकी वजह यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध है। पश्चिमी देशों का मानना है कि तेल की कमाई से रूस को युद्ध जारी रखने के लिए पैसा मिलता है। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भी दबाव बनाया है। ऐसे में खुद रूसी डीजल खरीदने की तैयारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि अगर अमेरिका अपनी जरूरत के लिए रूस से ईंधन लेता है, तो दूसरे देशों को ऐसा करने से रोकने का तर्क कमजोर पड़ सकता है।
जेलेंस्की ने फैसले पर जताई नाराजगी
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने ट्रंप के इस कदम पर असहमति जताई है। यूक्रेन की ओर से इसे मजबूत सहयोगियों का कमजोर फैसला बताया गया। यूक्रेन की चिंता है कि रूस को ऊर्जा कारोबार से कमाई होने पर उसके खिलाफ युद्ध से जुड़े आर्थिक दबाव का असर घट सकता है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी और यूक्रेनी अधिकारियों के बीच युद्ध खत्म करने के संभावित रास्तों पर बातचीत भी चल रही है।




















