Tiger Of Bhopal :केरवा का ‘त्रिशूल’ टाइगर रातापानी का नया सितारा, दोनों गालों पर दुर्लभ आकृति

संतोष चौधरी, भोपाल। राजधानी भोपाल के केरवा जंगलों में जन्मा युवा बाघ ‘टी-1236’ इन दिनों रातापानी टाइगर रिजर्व का आकर्षण बना हुआ है। अपनी शानदार कद-काठी, बेखौफ अंदाज और चेहरे पर बनी दुर्लभ ‘त्रिशूल’ आकृति के कारण यह बाघ पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
केरवा के जंगलों में 2022 में हुआ जन्म
टी-1236 ने अब रातापानी में अपनी स्थायी टेरेटरी भी स्थापित कर ली है। इधर, वन विभाग अब इस अनोखे बाघ का नाम ‘त्रिशूल’ रखने पर विचार कर रहा है। इसके लिए अभियान चलाकर सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। टी-1236 का जन्म वर्ष 2022 में केरवा के जंगलों में हुआ था। युवावस्था में पहुंचने के बाद उसने अपना क्षेत्र तलाशना शुरू किया और विचरण करते हुए रातापानी टाइगर रिजर्व के मुख्य वन क्षेत्रों तक पहुंच गया।
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बांधवगढ़ और रणथंभौर के बाद अब मप्र में ऐसा बाघ
इस बाघ की सबसे बड़ी पहचान उसके चेहरे के दोनों गालों पर बनी त्रिशूल जैसी स्पष्ट और आकर्षक आकृति है। वन अधिकारियों का कहना है कि देश में पहले राजस्थान के रणथंभौर और मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ऐसे बाघ देखे गए हैं, जिनके एक गाल पर त्रिशूल जैसा निशान था, लेकिन दोनों गालों पर लगभग समान आकृति वाला यह संभवत: अपनी तरह का अनूठा बाघ है।
सफारी वाहनों से बिल्कुल नहीं घबराता
रातापानी टाइगर रिजर्व में नियमित सफारी करने वाली अंजली सिंह और उनके पुत्र वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर आमेय विक्रम सिंह बताते हैं कि टी-1236 सफारी वाहनों की मौजूदगी से बिल्कुल नहीं घबराता।
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बाघों के नामकरण के लिए सुझाव मांगे जाएंगे
इस युवा बाघ के चेहरे के दोनों तरफ त्रिशूल की आकृति है। इस बाघ के साथ ही अन्य बाघों के नामकरण के लिए शासन स्तर पर सुझाव बुला सकते हैं।
हेमंत रायकवार, डीएफओ, औबेदुल्लागंज












