'देश से इतना प्यार है तो दुबई में क्यों रहते हैं?', राज ठाकरे ने विवेक ओबेरॉय और आर. माधवन पर उठाए सवाल

महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना के 20वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने अपने भाषण के दौरान कई अहम मुद्दों को उठाया। उन्होंने देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और सोशल मीडिया के प्रभाव पर अपनी स्पष्ट राय रखी। इसी क्रम में उन्होंने अभिनेता विवेक ओबेरॉय और आर. माधवन का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति इतना सम्मान और प्रेम रखते हैं, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि वे भारत छोड़कर विदेश में क्यों बस गए हैं।
विवेक ओबेरॉय और आर. माधवन पर क्या बोले?
राज ठाकरे ने कहा कि अगर किसी को देश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इतना प्यार है, तो फिर वह विदेश में क्यों रहता है? उन्होंने कहा कि विवेक ओबेरॉय और आर. माधवन दुबई में रहते हैं। अगर देश से इतना लगाव है, तो भारत में रहकर काम करना चाहिए। सिर्फ फिल्मों की शूटिंग के लिए भारत आना और फिर वापस विदेश चले जाना सही नहीं है। राज ठाकरे ने बताया कि विवेक ओबेरॉय ने फिल्म 'पीएम नरेंद्र मोदी' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किरदार निभाया था। वहीं, आर. माधवन ने फिल्म 'धुरंधर' में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का रोल निभाया है। इसी वजह से उन्होंने दोनों कलाकारों का उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी।
सोशल मीडिया पर भी साधा निशाना
राज ठाकरे ने प्रधानमंत्री के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें सोशल मीडिया पर गलत भाषा इस्तेमाल करने वाले युवाओं को माफ करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि किसी के परिवार या मां के बारे में गलत भाषा बोलना बिल्कुल ठीक नहीं है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग की शुरुआत पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी से जुड़े लोगों ने की थी। उनका कहना था कि सभी राजनीतिक दलों को अपने कार्यकर्ताओं को मर्यादा में रहने की सलाह देनी चाहिए।
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बेरोजगारी और शिक्षा पर जताई चिंता
राज ठाकरे ने कहा कि छात्रों का गुस्सा सिर्फ NEET पेपर लीक तक सीमित नहीं है। असली समस्या बेरोजगारी, नौकरी की कमी और युवाओं में बढ़ती निराशा है। उन्होंने कहा कि बच्चों के खेलने के मैदान भी कम होते जा रहे हैं और राजनीति का ध्यान असली मुद्दों से हट गया है।
Gen-Z और शिक्षा बजट पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि 1997 के बाद जन्मी Gen-Z पीढ़ी सिर्फ बड़े शहरों में नहीं, बल्कि गांवों में भी रहती है। इसलिए उनकी जरूरतों को समझना जरूरी है। शिक्षा पर बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि 2004 में देश के बजट का 3.4 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च होता था, जो अब घटकर 2.8 प्रतिशत रह गया है।
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मंदिरों की व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
अपने भाषण में राज ठाकरे ने चंद्रकांत पाटिल के कुछ बयानों पर भी तंज कसा। साथ ही राम मंदिर और सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ियों का जिक्र करते हुए कहा कि जब लोग आस्था के साथ मंदिर जाते हैं और वहां अनियमितताओं की खबरें सामने आती हैं, तो लोगों का भरोसा कमजोर होता है। उन्होंने ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग भी की।












