मध्यप्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 27 साल पुराने एफडी हेराफेरी मामले में दोषी ठहरा दिया है। कोर्ट ने उन्हें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी गंभीर धाराओं में दोषी माना है। इस मामले में सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी करार दिया गया है। सजा पर अंतिम फैसला गुरुवार दोपहर 2 बजे सुनाया जाएगा।
यह मामला साल 1998 का है, जब राजेंद्र भारती जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे। आरोप है कि उन्होंने अपने पिता के नाम पर एक संस्थान के लिए 10 लाख रुपये की एफडी कराई थी। उस समय इसकी अवधि 3 साल और ब्याज दर 13.5% तय थी।
जांच में सामने आया कि भारती ने बैंक लिपिक के साथ मिलकर एफडी के दस्तावेजों में हेरफेर की। पहले इसकी अवधि 10 साल और फिर 15 साल कर दी गई। इस दौरान ब्याज दर कम होने के बावजूद वे लगातार 13.5% के हिसाब से हर साल ब्याज निकालते रहे।
इस घोटाले का खुलासा साल 2011 में हुआ, जब भाजपा नेता पप्पू पुजारी बैंक के अध्यक्ष बने। उन्होंने मामले की जांच कराई, जिसमें एफडी पर ऑडिट आपत्ति दर्ज की गई। सहकारिता विभाग के तत्कालीन संयुक्त पंजीयक अभय खरे की जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई।
साल 2012 में भारती ने एफडी की राशि निकालने की कोशिश की, लेकिन ऑडिट आपत्ति के कारण भुगतान रोक दिया गया। इसके बाद वे उपभोक्ता फोरम पहुंचे, जहां से उन्हें राहत नहीं मिली। राज्य उपभोक्ता फोरम से राहत मिलने के बावजूद मामला राष्ट्रीय फोरम और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया, लेकिन वहां भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
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इसके बाद 2015 में तत्कालीन कलेक्टर प्रकाश जांगरे की पहल पर इस मामले में आपराधिक केस दर्ज किया गया। अदालत के आदेश पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ। एमपी-एमएलए कोर्ट के गठन के बाद केस ग्वालियर से होते हुए अक्टूबर 2025 में दिल्ली स्थानांतरित किया गया।
कोर्ट ने भारती को IPC की धारा 420, 467, 468, 471 और 120B के तहत दोषी ठहराया है। यदि उन्हें 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उनकी विधायकी जा सकती है। हालांकि, हाईकोर्ट से सजा पर स्टे मिलने की स्थिति में राहत संभव है।
विधायक के बेटे अनुज भारती ने बताया कि उनके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है और वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। इस फैसले के बाद क्षेत्र में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। अगर सीट खाली होती है, तो दतिया में उपचुनाव की स्थिति बन सकती है। फिलहाल सभी की नजर कोर्ट के अंतिम सजा के ऐलान पर टिकी हुई है।