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जिस RNA को समझा गया ‘बेकार’, वह नर्व्स को फिर से बढ़ाने में सहायक, चूहे पर किया गया शोध; लकवाग्रस्त मरीजों के लिए उम्मीद की किरण

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जिस RNA को समझा गया ‘बेकार’, वह नर्व्स को फिर से बढ़ाने में सहायक, चूहे पर किया गया शोध; लकवाग्रस्त मरीजों के लिए उम्मीद की किरण
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    एक समय पर जिन्हें ‘जंक’ यानी बेकार समझा जाता था, वैसे RNA अणुओं की एक खास किस्म अब तंत्रिकाओं (nerves) को फिर से बढ़ाने में सहायक पाई गई है। हाल ही में किए गए एक रिसर्च में चूहे पर किए गए प्रयोग में यह सामने आया है कि इन RNA अणुओं की मदद से क्षतिग्रस्त तंत्रिकाओं की मरम्मत की जा सकती है। यह खोज भविष्य में उन लोगों के लिए आशा की नई किरण बन सकती है जिन्हें ब्रेन या स्पाइनल कॉर्ड में चोट की वजह से तंत्रिका क्षति हुई है।

    इंसानों में डैमेज नर्व्स को ठीक करने की क्षमता सीमित

    इंसानों में, खासतौर पर सेंट्रल नर्वस सिस्टम यानी मस्तिष्क और मेरुदंड में क्षतिग्रस्त तंत्रिकाओं को ठीक करने की क्षमता बहुत ही सीमित होती है। पेरिफेरल नर्वस सिस्टम यानी बाहरी तंत्रिका तंत्र में भी यह क्षमता उम्र, चोट की गंभीरता और स्थान पर निर्भर करती है। इसके अलावा कुछ ऐसे अणु भी शरीर में मौजूद होते हैं जो nerve regeneration को रोकते हैं।

    कोई असरदार इलाज अब तक नहीं

    वाइजमैन इंस्टिट्यूट के बायोमोलेक्यूलर साइंसेज और मॉलिक्यूलर न्यूरोबायोलॉजी विभाग से जुड़े प्रोफेसर माइक फैनजिलबर बताते हैं, “तंत्रिका कोशिकाओं की वृद्धि और पुनर्जनन को तेज करने के लिए आज तक कोई प्रभावशाली इलाज नहीं है। हालांकि हमारी रिसर्च में जो ग्रोथ देखी गई है, वह अभी लकवाग्रस्त मरीजों के लिए पूरी तरह पर्याप्त नहीं है, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण कदम जरूर है।”

    GI-SINEs वही RNA जो कभी जंक माने गए थे

    शोधकर्ताओं ने RNA की एक विशेष श्रेणी की खोज की है जिन्हें GI-SINEs (Growth-Inducing Short Interspersed Nuclear Elements) कहा जाता है। ये RNA असल में B2-SINEs नामक एक बड़ी फैमिली का हिस्सा हैं। ये B2-SINEs बार-बार दोहराए जाने वाले (repetitive) और नॉन-कोडिंग DNA तत्व होते हैं। इन्हें पहले जंक DNA माना जाता था क्योंकि ये सीधे प्रोटीन नहीं बनाते, लेकिन अब समझ आया है कि ये कोशिकाओं के भीतर प्रोटीन निर्माण की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं। GI-SINEs चोट लगने के बाद तंत्रिका कोशिकाओं में एक खास जैविक प्रोग्राम को सक्रिय करते हैं जो अक्ष (axon) को दोबारा बढ़ने में मदद करता है।

    RNA कैसे मदद करते हैं तंत्रिका बढ़ाने में

    जब किसी तंत्रिका में चोट लगती है, तो GI-SINEs नामक RNA सेंसर नर्व कोशिकाओं में सक्रिय हो जाते हैं। ये RNA शरीर में प्रोटीन बनाने की प्रक्रिया को बढ़ाते हैं जो कि अक्ष को फिर से विकसित करने के लिए जरूरी होता है। ये RNA तीन तरीकों से यह काम करते हैं,

    पहला, ये AP-1 नामक प्रोटीन के ज़रिए सक्रिय होते हैं, जो कि तनाव या चोट के समय जीन को नियंत्रित करते हैं। दूसरा, ये राइबोसोम और न्यूक्लोलिन नामक अणुओं से जुड़ते हैं जो प्रोटीन बनाने में महत्वपूर्ण होते हैं। तीसरा, ये प्रोटीन निर्माण को अक्ष के छोर से हटाकर मुख्य कोशिका केंद्र (cell body) की ओर मोड़ते हैं, जिससे दोबारा वृद्धि में तेजी आती है।

    कैसे किया गया शोध

    शोधकर्ताओं ने तंत्रिका पुनर्जनन की प्रक्रिया को समझने के लिए कई उन्नत प्रयोगशाला तकनीकों का उपयोग किया। RNA-seq नामक तकनीक से यह जाना गया कि चोट लगने के बाद RNA में क्या बदलाव आते हैं और यह तुलना सेंट्रल तथा पेरिफेरल नर्वस सिस्टम की कोशिकाओं में की गई।

    माउस पर किए गए प्रयोग में सायाटिक नर्व (जो पेरिफेरल सिस्टम का हिस्सा है) और ऑप्टिक नर्व (जो सेंट्रल सिस्टम का हिस्सा है) में चोट दी गई और GI-SINEs की क्रिया को देखा गया। शोधकर्ताओं ने वाइरल जीन डिलीवरी तकनीक से GI-SINEs को कोशिकाओं में डाला और देखा कि इसका असर अक्ष की वृद्धि पर कैसा होता है। इसके अलावा, प्रोटीन अस्से (protein assays) की मदद से यह पता लगाया गया कि GI-SINEs किन प्रोटीनों से जुड़ते हैं। GI-SINEs को रोकने के लिए एंटीसेन्स ओलिगोन्यूक्लियोटाइड (ASO) का उपयोग किया गया और देखा गया कि इससे तंत्रिका की वृद्धि में क्या असर पड़ता है।

    केंद्रीय तंत्रिका में GI-SINEs को कैसे सक्रिय किया गया

    शोध में पाया गया कि जब माउस के सायाटिक नर्व में चोट लगाई गई, तो GI-SINEs खुद-ब-खुद सक्रिय हो गए और इससे नए अक्ष की वृद्धि शुरू हुई। लेकिन जब सेंट्रल नर्वस सिस्टम के भाग जैसे आंख की रेटिना या रीढ़ की हड्डी के कॉर्टिकोस्पाइनल ट्रैक्ट में चोट की गई, तो GI-SINEs खुद से सक्रिय नहीं हुए। हालांकि जब शोधकर्ताओं ने जीन थेरेपी की मदद से GI-SINEs को कृत्रिम रूप से डाला, तो इन केंद्रीय तंत्रिकाओं ने भी अक्ष की वृद्धि शुरू कर दी।

    अभी और शोध की जरूरत

    यह शोध अभी सिर्फ माउस पर किया गया है। इंसानों में भी ऐसे RNA अणु मौजूद हो सकते हैं, लेकिन इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। GI-SINEs ने माउस में तंत्रिका वृद्धि तो बढ़ाई है, लेकिन यह पूरी तरह से तंत्रिका की मरम्मत और उसके कार्य को पुनर्स्थापित करता है या नहीं, यह साबित नहीं हुआ है। साथ ही, GI-SINEs जिन प्रोटीनों से जुड़े पाए गए हैं, उनके अलावा भी अन्य असर हो सकते हैं, जिन्हें अभी नहीं परखा गया है।

    प्रोफेसर फैनजिलबर ने कहा, “बुनियादी शोध से इलाज तक पहुंचने की राह लंबी होती है और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इस तरह की वृद्धि को बढ़ावा देने वाले तरीकों से कैंसर जैसी बीमारी का खतरा न बढ़े।”

    वह बताते हैं कि मधुमेह जैसी बीमारियों में जो तंत्रिकाएं प्रभावित होती हैं, उनमें रिकवरी बहुत धीमी होती है। इसलिए अब एक ऐसी थेरेपी पर काम किया जा रहा है जो B2-SINEs की क्रिया की नकल करके तंत्रिका वृद्धि को तेज कर सके।

    उन्होंने बताया कि UCLA के साथ मिलकर एक रिसर्च चल रही है जिसमें यह तंत्र स्ट्रोक के बाद रिकवरी में भी मददगार पाया गया है। इसके अलावा, तेल अवीव यूनिवर्सिटी, हिब्रू यूनिवर्सिटी और शेबा मेडिकल सेंटर के साथ मिलकर इसका अध्ययन ALS (एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी) में भी किया जा रहा है।

    Wasif Khan
    By Wasif Khan

    फिलहाल जुलाई 2024 से पीपुल्स अपडेट में सब-एडिटर हूं। बीते 3 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हूं। 12वीं म...Read More

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