चीन में डोभाल की एंट्री क्यों खास? चिकननेक और जिनपिंग की भारत यात्रा पर बड़ा दांव!

नई दिल्ली। भारत और चीन के रिश्तों में लंबे तनाव के बाद बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ता दिख रहा है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल बीजिंग पहुंचे हैं। वह चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की बैठक में हिस्सा लेंगे। बातचीत का मुख्य केंद्र सीमा विवाद रहेगा, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। डोभाल की यात्रा की टाइमिंग इसलिए खास है क्योंकि सितंबर में भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होना है। इस बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना पर भी नजर बनी हुई है।
डोभाल को ही क्यों मिली अहम जिम्मेदारी?
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत का रास्ता 2003 में तैयार किया गया था। भारत की ओर से अजीत डोभाल और चीन की तरफ से वांग यी इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं। दोनों देशों के बीच सीमा का मुद्दा बेहद संवेदनशील है, इसलिए इस स्तर की बातचीत में डोभाल की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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गलवान के बाद बदले रिश्तों का माहौल
2020 में गलवान घाटी की झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में काफी तनाव आया था। पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने रहीं। इस वजह से विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत भी लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ पाई। दिसंबर 2024 में बीजिंग में 23वें दौर की बैठक से यह प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई। इसके बाद नई दिल्ली में 24वां दौर हुआ और अब 25वें दौर की बैठक हो रही है।
सीमा पर शांति और सैनिकों की स्थिति पर नजर
डोभाल और वांग यी की बातचीत में सीमा पर मौजूदा हालात अहम मुद्दा रहेंगे। दोनों पक्ष सैनिकों की तैनाती, तनाव कम करने और सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के उपायों पर चर्चा कर सकते हैं। भारत का रुख साफ रहा है कि चीन के साथ रिश्तों में सुधार के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है।
डोकलाम और चिकननेक क्यों हैं खास?
डोभाल के चीन दौरे में डोकलाम का मुद्दा सीधे एजेंडे में हो या नहीं लेकिन इसका रणनीतिक महत्व जरूर है। 2017 में डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं 73 दिनों तक आमने-सामने रही थीं। यह क्षेत्र सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकननेक के करीब है। यह संकरा कॉरिडोर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है, इसलिए इसकी सुरक्षा भारत के लिए बेहद अहम है।
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जिनपिंग के भारत आने पर भी नजर
डोभाल की बीजिंग यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियां चल रही हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सम्मेलन में आने की संभावना जताई जा रही है।




















